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पुराने भवनों को भूकंपरोधी बनाना चुनौती

Haridwar

Updated Sun, 21 Oct 2012 12:00 PM IST
रुड़की। प्रख्यात भूकंप वैज्ञानिक प्रो. आनंद स्वरूप आर्य ने कहा कि भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में पुरानी इमारतों को भूकंपरोधी बनाया जाना वैज्ञानिकों के लिए चुनौती है। उन्होंने भूकंप के बाद क्षतिग्रस्त भवनों को ध्वस्त करने की संस्तुति किए जाने की प्रवृत्ति से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कोई भी वैज्ञानिक शोध आम आदमी की जरूरत को ध्यान में रखते होना चाहिए। यही नहीं उन्होंने वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में प्रकाशित होने वाले जनरल के कुछ हिस्से को हिंदी भाषा में दिए जाने की भी वकालत की।
आईआईटी के अर्थक्वेक डिपार्टमेंट की ओर से आयोजित आईसैट (इंडियन सोसायटी फॉर अर्थक्वेक) के स्वर्ण जयंती समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे प्रो. आर्य ने कहा कि आमतौर पर वैज्ञानिकों और राज्यों में स्थापित आपदा निरोधक सेल के बीच समन्वय नहीं हो पा रहा है। जिसके चलते राज्यों को वैज्ञानिक शोध और ज्ञान का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आईसैट जैसी वैज्ञानिक संस्थाओं के जरिए सरकार के साथ तालमेल बढ़ाए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। विशिष्ट अतिथि और सीबीआरआई (केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान) रुड़की के पूर्व निदेशक शमशेर प्रसाद ने भूकंपीय शोध ज्ञान के आदान-प्रदान की जरूरत पर बल दिया। आईसैट के अध्यक्ष प्रो. एचआर वासन ने संस्था के उद्देश्यों के बारे में बताया और विगत 50 सालों में हुए कार्यों का ब्यौरा प्रस्तुत किया। संस्थान निदेशक प्रो. प्रदीप्त बनर्जी ने आईसैट से जुड़े अनुभवों के बारे में बताया। इस मौके पर आईसैट के उपाध्यक्ष प्रो. एमएल शर्मा, सचिव डा. मनीष श्रीखंडे, को-एडिटर अजय चौरसिया एवं संस्था के पूर्व अध्यक्ष डा. केजी भटिया, प्रो. एसके ठक्कर, प्रो. वीएस जोशी, प्रो. डीके पाल, आईएसआरआई अहमदाबाद के निदेशक डा. वीके रस्तोगी आदि मौजूद रहे। समारोह में देश भर के 80 वैज्ञानिकों ने किया प्रतिभाग किया।

ऐतिहासिक बिल्डिंगों का करें संरक्षण
केंद्र सरकार के पूर्व नेशनल सेस्मिक एडवाइजर प्रो. आनंद स्वरूप आर्य ने कहा कि भूकंप से देश के कई प्राचीनतम धरोहरा को चोट पहुंची है। इनमें धार्मिक स्थल सहित कई ऐतिहासिक इमारतेें हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनमें भूकंप के कारण दरारें आई हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों से ऐसे मंदिरों को संरक्षण प्रदान करने के लिए काम किए जाने का आह्वान किया।

पूर्व में भूकंप आने वाली जगहों पर करें फोकस
समारोह के दौरान वैज्ञानिकों ने ऐसे स्थलों पर दोबारा भूकंप की आशंका जताई। जहां पूर्व में भूकंप आ चुके हैं। यूएसए की मिसोरी यूनिवर्सिटी में एमिरेटस प्रोफेसर और सीबीआरआई के पूर्व निदेशक प्रो. शमशेर प्रकाश ने बताया कि न्यूजीलैंड के क्रिस चर्च में भूकंप आने के कुछ वर्षों बाद फिर भूकंप आया था। ऐसे में उत्तरकाशी आदि जगहों पर भूकंपरोधी उपाय किए जाने जरूरी है।
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