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बीमारी से परेशान नहीं थे स्वामी शंकर देव

Haridwar

Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
हरिद्वार। देश को निरोग बनाने का दावा करने वाले योग गुरु बाबा रामदेव के गुरु स्वामी शंकर देव क्या लाइलाज बीमारी से ग्रस्त थे? ध्यान लगाने वाले शंकर देव क्या खुद बीमारी के कारण मानसिक अवसाद में आ गए थे? इन सवालों पर पुलिस और आश्रम के लोग साफ-साफ कुछ भी कहने से बचते रहे हैं। लेकिन शंकर देव का इलाज करने वाले डा.केएन गंभीर ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि बीमारी को लेकर शंकर देव कभी अवसाद में नहीं रहे। उन्हें स्पाइनल ट्यूबरक्लोसिस की बीमारी थी। डेढ़ साल तक चले इलाज के बाद उनका स्वास्थ्य बेहतर हो गया था। ऐसे में उनके लापता होने में बीमारी कोई वजह नहीं हो सकती।
स्वामी शंकर देव की गुमशुदगी की जांच में उनकी बीमारी को भी एक कारण माना जाता रहा है। कहा जाता है कि जब वह लापता हुए तो बीमार थे। अपनी बीमारी की वजह से वह अवसाद में चले गए थे। पुलिस को स्वामी के कमरे से उन्हीं का लिखा पत्र भी मिला था, जिसमें कहीं चले जाने का कारण बीमारी को बताया गया था। यह सच है कि अस्सी वर्षीय शंकर देव बीमार थे, लेकिन उनका इलाज कर रहे डा. केएन गंभीर कहते हैं कि बीमारी को लेकर वह अवसाद में नहीं थे। अमर उजाला को डा. केएन गंभीर ने बताया कि शंकर देव को स्पाइनल ट्यूबरक्लोसिस रोग था। करीब डेढ़ साल तक उनका इलाज डा. केएन गंभीर से चला। डा. गंभीर की मानें तो शंकर देव इलाज के आखिरी दौर में थे। उनका स्वास्थ्य बेहतर हो गया था। वह अपने इलाज से संतुष्ट भी थे। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि जो शख्स इलाज से बेहतर हो रहा था वह अचानक बीमारी की वजह से कहीं और जाने की क्यों सोचेगा? दूसरा सवाल यह भी है कि ध्यान लगाने वाला संत बीमारी के कारण अवसाद में कैसे आ सकता है? अपनी जांच के दौरान पुलिस को इन सवालों का जवाब खोजना चाहिए था, लेकिन उसने शायद इसमें कोई दिलचस्पी ही नहीं दिखाई। अब सीबीआई के सामने भी यही सवाल रहेंगे।

क्या है स्पाइनल ट्यूबरक्लोसिस
स्पाइनल ट्यूबरक्लोसिस को रीढ़ की हड्डी में टीबी होने को कहते हैं। चिकित्सकों के मुताबिक स्पाइनल ट्यूबरक्लोसिस लाइलाज बीमारी नहीं है। इसमें भी टीबी जैसे ही लक्षण होते हैं। ज्यादा बढ़ने पर रोगी का चलना मुश्किल हो जाता है। लेकिन स्वामी शंकर देव अस्सी साल की उम्र में भी खुद चलकर डा. गंभीर के पास दवाई लेने जाते थे।
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