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जनाब! दिलाशा नहीं दवा दीजिए

Haridwar

Updated Mon, 08 Oct 2012 12:00 PM IST
हरिद्वार। जिले में जानलेवा स्क्रब टायफस और डेंगू की जानलेवा बीमारी पैर पसार रही है। लेकिन स्वास्थ्य महकमा से पीड़ितों को सिवाय दिलाशा देने के कुछ नहीं बन पा रहा है। मामले सामने आने के बाद मौके पर स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंचती तो है। लेकिन जांच पड़ताल कर मामले की पुष्टि होती ही लौट आती है। प्रभावित क्षेत्रों अभी तक न तो कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया गया और न ही मेडिकल कैंप या जागरुकता अभियान चलाया गया है।
जिले में अब तक डेंगू और स्क्रब टायफस के जितने भी मामले सामने आए हैं वह हरिद्वार शहर के ज्वालापुर और शहर से सटे रावली महदूद गांव के हैं। अब स्क्रब टायफस के चार मामले सामने आ चुके हैं। जिसमें एक मामला शहर क्षेत्र का है। जबकि तीन ग्रामीण क्षेत्र के। जबकि शहर और ग्रामीण क्षेत्र में तकरीबन आठ मामले डेंगू के सामने आ चुके हैं। जिसमें एक की मौत हो चुकी है। आलम यह है कि ज्वालापुर क्षेत्र और रावली महदूद गांव में अभी तक कीटनाशक दवाओं का छिड़काव तक नहीं किया गया। स्थिति तो यह है कि प्रभावित क्षेत्र में एक के बाद एक मामले सामने आ रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग मेडिकल कैंप तक लगाने की जहमत नहीं उठा रहा। ज्वालापुर क्षेत्र में पहले पीलिया बीमारी ने कहर बरपाया था। अब डेंगू और स्क्रब टायफस पांव पवार रहा है। ऐसे में लोगों में भय का माहौल है। क्षेत्रीय लोग स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम से कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराने की मांग उठा रहे हैं।

फोटो-
यहां शहर ही बना जंगल, स्क्रब टायफस को न्यौता
हरिद्वार।
शहर की हर कालोनियां स्क्रब टायफस बीमारी को न्यौता दे रही है। शहर की ज्यादातर कालोनियों में बने पार्कों में घनी झाड़ियां खड़ी हैं। जिनमें स्क्रब टायफस को जन्म देने वाले कीट पनप सकते हैं।
स्क्रब टायफस की बीमारी एक कीट के काटने से होती है। खटमल की तरह दिखने वाला यह कीट जंगल से जुडे इलाकों में ज्यादा पनपता है। घनी झाड़ियों में इस कीट के पनपने की अधिक संभावना रहती है। लेकिन शनिवार को शहर के ज्वालापुर में नाथनगर निवासी एक महिला स्क्रब टायफस की चपेट में आ गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच में पाया कि महिला के घर के आसपास घनी झाड़ियां उगी हैं। आशंका जताई जा रही है कि इन झाड़ियों में इस जानलेवा बीमारी को जन्म देने वाला कीट पनप सकता है। लेकिन शहर में स्थिति इतनी बुरी है कि शहर कालोनी में घनी झाड़ियां उगी है। चाहे एचडीए के पार्क हो या नगर निगम के पार्क। गंगनगर के किनारे या रेलवे स्टेशन के किनारे। घनी जंगली झाड़ियों से शहर जंगह नजर आने लगा है। ऐसे में लोगों में भय बना हुआ है कि कहीं जानलेवा स्क्रब टायफस का कीट उनकी कालोनियों में न पनप जाए।

- स्वास्थ्य विभाग अपने स्तर से पूरी तरह सतर्कता दिखा रहा है। विभागीय टीम ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया है, लेकिन यहां डेंगू का लार्वा नहीं मिले। जल्द प्रभावित इलाकों में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराया जाएगा। मेडिकल कैंप लगाने की तैयारी की जा रही है।
डा. दीपा शर्मा, सीएमओ

शहर में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव अब नियमित किया जाएगा। पहले सप्ताह में तीन दिन किया जा रहा था। खासकर ज्वालापुर क्षेत्र में सुबह और शाम दोनों समय फागिंग और छिड़काव कराया जाएगा। नगर निगम प्रशासन अपने क्षेत्र में झाड़ियों को नष्ट करने के काम भी शुरु कर रहा है।
- हर्ष वर्धन मिश्रा, अपर मुख्य नगर अधिकारी, नगर निगम
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रावली महदूद में डेंगू का एक और मामला
देहरादून में हो रहा पीड़ित मरीज का इलाज
स्वास्थ्य विभाग मान रहा मामले को संदिग्ध
हरिद्वार।
रावली महदूद में डेंगू का एक और नया मामला सामने आया है। पीड़ित का इलाज देहरादून के सीएमआई अस्पताल में चल रहा है। नए मामले के साथ ही गांव में अब तक डेंगू के तीन पीड़ित मरीज सामने आ गए हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग मामले को संदिग्ध बता रहा है।
जिला मुख्यालय से सटे रावली महदूद गांव में एक नया डेंगू का मामला सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार गांव के मोहल्ला बीआईपी निवासी 40 वर्षीय प्रदीप चद्र को तीन दिन पहले तबीयत बिगड़ने पर देहरादून के सीएमआई अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां इलाज के दौरान प्रदीप में डेंगू की पुष्टि हुई है। पीड़ित अभी भी देहरादून में भर्ती है। हालांकि इस सम्बंध आईडीएसपी के डा. नवनीत किशोर का कहना था कि इस सम्बंध में विभाग को कोई सूचना नहीं मिली है। जांच के बाद ही पता चलेगा कि मामला डेंगू का है। गांव में स्क्रब टायफस के दो मामले भी सामने आ चुके हैं। जबकि इससे पूर्व दो लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। गांव में डेंगू का नया मामला सामने आने से दहशत का माहौल है।

फोटो-
महकमे की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों में रोष
फैल रही बीमारी, स्वास्थ्य विभाग बना मूक दर्शक
बहादराबाद।
रावली महदूद के ग्रामीणों में स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली को लेकर रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में जानलेवा स्क्रब टायफस और डेंगू के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा हुआ है। न ही गांव में फागिंग कराई जा रही है और न ही छिड़काव किया जा रहा है। ऐसे में मच्छर पनप रहे हैं। गांव के नाले में गंदगी पसरी हुई है। जिससे बीमारियों के फैलने का भय बना हुआ है।

सिंगल फोटो-
बोले लोग-
डेंगू या स्क्रब टायफस पीड़ित मिलने की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंचती है और पूछताछ कर चली जाती है। गांव में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। गांव में गंदगी बीमारियों के फैलने का सबसे बड़ा कारण बन रही है।
- बबली सैनी, ग्राम प्रधान

गांव में डेंगू बुखार के अलावा वायरल भी फैल रहा है। गांव में भारी संख्या में लोग बीमार हैं। विभाग की ओर से गांव में मेडिकल कैंप लगाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा। ग्रामीणों को राहत नहीं मिल रही।
- योगेश कुमार, ग्रामीण

मेरे पड़ोस में रहने वाले प्रदीप चंद डेंगू से पीड़ित हैं। जिनका इलाज देहरादून चल रहा है। घर के पास ही पानी जमा हो रहा है। जहां मच्छर पनप रहे हैं। जिन्हें नष्ठ करने के लिए कीटनाशक का छिड़काव जरुरी है।
- कमलराज, ग्रामीण

एक सप्ताह के भीतर गांव में तीन लोग डेंगू की चपेट में आ गए हैं। यहां तक की जानलेवा स्क्रब टायफस ने भी दो लोगों को अपनी चपेट में लिया है। इसके बावजूद भी स्वास्थ्य महकमा गंभीरता नहीं दिखा रहा।
- रमेश सैनी, ग्रामीण
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इलेक्ट्रोहोम्योपैथी में भी स्क्र्रब टायफस का इलाज
हरिद्वार।
इलेक्ट्रोहोम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन उत्तराखंड की ओर से स्क्रब टायफस और डेंगू फीवर बीमारियों पर चिकित्सकों को इलेक्ट्रोम्योपैथिक डायग्नोसिस एवं गाईड लाइन ऑफ ट्रीटमेंट का प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण शिविर में एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डा. केपीएस चौहान ने चिकित्सकों को बताया कि स्क्रब टायफस एक कीट के काटने से होता है। जबकि डेंगू फीवर मच्छर के काटने से होता है। इसमें रोगी के शरीर में संचरित होने वाला ब्लड दूषित हो जाता है। रक्त की प्लेटीलैटस तेजी के साथ कम होती जाती हैं। डा. अजीत सिंह ने गाईड लाइन ऑफ ट्रीटमेंट पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्क्रब टायफस और डेंगू फीवर रोगों की चिकित्सा हेतु फेब्रियोम, सैप्टियोम, न्यूट्रियोम, पेटेंड मेडिकल की बीस ड्राप्स तथा एथ्री, एस वन, एस टैन तथा वर्मिफ्यूगो वन, स्पेजरिक एसेंस की दस ड्राप्स आधा कप पानी में दिन बार पिलाने से रोगी शीघ्र एवं पूरी तरह स्वस्थ्य हो जाता है। रोगी की देखभाल करने वाले तिमारदार को एस वन मेडिसन की दस ड्राप्स तीन बार पीने से स्क्रब टायफस का संक्रमण नहीं होता। प्रशिक्षण के दौरान डा. मिनाक्षी, डा. शालू कश्यप, डा. वीएल अलखनिया, डा. गीता सिंह, डा. गायत्री, डा. तलहा, डा. राजीव शर्मा, डा. आदेश शर्मा आदि मौजूद रहे।
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ठाकुर नेगी
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