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ऐसे तो नहीं बचेगी कुंभ भूमि

Haridwar

Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
हरिद्वार। कुंभ मेला भूमि पर हो रहे कब्जों पर प्रशासनतंत्र उदासीन बना रहा तो कुछ सालों के बाद मेलों के लिए भूमि ही नहीं बचेगी। बैरागी कैंप की 300 बीघा से अधिक मेला भूमि पर बस्तियां आबाद हो चुकी है। कई पक्के निर्माण हो चुके हैं। वोट के लिए सरकारी खजाने से नेताओं ने बिजली-पानी और सड़कें तक बनवा दी हैं।
उत्तरी हरिद्वार के संत बाहुल्य क्षेत्र में भूपतवाला, सप्तसरोवर में गंगातट की कुंभ भूमि पर कच्ची-पक्की बस्तियां आबाद हो चुकी हैं। गौशालाएं बन गई हैं। दूधियाबंद से गीता कुटीर तपोवन तक गंगा किनारे सैकड़ों झोपड़ियों पड़ चुकी हैं। जिनमें सैकड़ों लोग रह रहे हैं। एक महंत ने गंगातट पर मकान बनाकर दो महीने पहले ही लेंटर डाल दिया है। अब दूसरी मंजिल का निर्माण भी शुरू करा दिया है। एक महंत ने 12 नंबर ठोर पर गंगातट पर कमरा बनाकर टिन की छत डाली है। जाहिर है कुछ दिन बाद लेंटर डाल दिया जाएगा। इस महंत का हरिपुर कलां में भी विशाल आश्रम पहले से है।
इनसेट
कुंभ पर भूमि का रोना, सो रहा प्रशासन
-प्रशासन कुंभ और अन्य मेलों पर भूमि की कमी का रोना रोता है। लेकिन जब बहुमूल्य भूमि पर कब्जे हो रहे हैं तो प्रशासन की नींद नहीं टूट रही। सिंचाई विभाग के अधिकारी भी जमीन पर कब्जा होने से नहीं रोकते और बाद में फोर्स नहीं मिलने की बात कहकर कब्जा हटाने से पल्ला झाड़ लेते हैं।
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प्रशासनिक प्रत्यावेदन में बताई गई भूमि की कमी
- कुंभ मेेला 2010 के बाद मेलाधिकारी की ओर से प्रशासनिक प्रत्यावेदन बनाकर शासन को भेजा था। 543 पन्नों के इस प्रत्यावेदन में भूमि की कमी का जिक्र भी किया गया। 163वें पेज पर लिखा गया कि कुंभ मेला में कुछ भूमि की कमी रह गई, जिसके चलते कई संस्थाएं अपना कैंप नहीं लगा सकी। साथ ही यह भी लिखा गया कि भविष्य में कुुंभ मेला के लिए इससे दोगुनी भूमि विकसित किए जाने की जरूरत है।
इनसेट
मातृसदन भी लड़ रहा मेलाभूमि के लिए लड़ाई
- कुंभ मेला भूमि के लिए मातृसदन की ओर से भी लड़ाई लड़ी जा रही है। कुंभ मेला क्षेत्र विस्तार के लिए मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती महाराज ने पिछले दिनों अनशन भी किया था। मातृसदन के संत ब्रहमचारी दयानंद का कहना है प्रशासनिक प्रत्यावेदन को आधार मानें तो कुंभ के लिए अधिक भूमि की जरूरत रहती है। इसके लिए मेला क्षेत्र का विस्तार और मेला भूमि की रक्षा की जानी चाहिए।
कोट
दूधियाबंद से सप्तऋषि तक गंगा किनारे, आश्रमों के सामने और प्लाटों की मेला भूमि पर अवैध कब्जों की वीडियो रिकाडिंग करा ली है। डीएम, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को फोर्स और मजिस्ट्रेट उपलब्ध कराने के लिए अनुरोध पत्र भेजा जा रहा है। किसी भी दिन अवैध कब्जों और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
पुरुषोत्तम, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड, हरिद्वार।
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