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.तो व्यापारियों में नहीं एफडीआई का खौफ

Haridwar

Updated Fri, 21 Sep 2012 12:00 PM IST
रुड़की। खुदरा बाजार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को लेकर स्थानीय व्यापारियाें में खौफ नजर नहीं आ रहा है। दस लाख से अधिक की आबादी वाले शहरों में ही विदेशी दुकानों के स्थापित होने की वजह से फिलहाल यहां का व्यापारी वर्ग निश्चिंत नजर आ रहा है। व्यापारियाें का मानना है कि आने वाले दस सालों में इसका असर देखने को मिलेगा। लेकिन तब तक स्थानीय व्यापारियाें के कामकाज का स्तर पर भी बढ़ चुका होगा।
बृहस्पतिवार को रुड़की में बंद का मिलाजुला असर दिखने से ऐसा लग रहा था कि मानो विदेशी दुकानाें के खुलने या न खुलने से यहां के व्यापारियों का कोई लेना देना ही न हो। दोपहर तक कुछ बाजार बंद भी रहे, लेकिन शाम होते ही बाजार की चमक रोज की तरह दिखने लगी। रुड़की शहर का व्यापारी वर्ग फिलहाल रिटेल में एफडीआई से खुद को प्रभावित होता नहीं मान रहा है। बीटी गंज के व्यवसायी मुकेश कुमार का कहना था कि महानगराें में ही इसका असर होगा तो अभी से यहां के दुकानदारों को डरने की क्या जरूरत है। इसके अलावा किसानों को भी यदि उनकी फसल का अच्छा दाम मिलेगा तो इससे फुटकर दुकानदारी भी बढ़ेगी। बाजार में अधिकतर दुकानदार इसे तत्काल रूप से बड़ा खतरा नहीं मानते हुए निश्चिंत नजर आ रहे हैं। इसी के चलते कुछ समय के लिए दुकानें बंद हुई और फिर पूरा बाजार रोशन नजर आया।

यहां के बंद से नहीं बदलने वाला निर्णय
व्यापारी वर्ग इस बात को शायद अच्छी तरह समझ चुका है कि स्थानीय स्तर पर होने वाले हो-हल्ले से केंद्र में बैठी सरकार का निर्णय बदलने वाला नहीं है। इसीके चलते व्यापारियों में बंद को लेकर न तो जोश दिखा है न ही विरोध। व्यापारियों का कहना था कि मामला केंद्र सरकार का है यदि दिल्ली में जाकर इसका विरोध हो तो शायद केंद्र सरकार पर भी इसका प्रभाव पड़े।

उन्हें पता ही नहीं कि क्यों है बंद
जिन लोगों ने प्रदर्शनकारियों के गुजरने के बाद ही अपनी दुकानों के शटर खोल दिए। उनके लिए एफडीआई का मुद्दा ही समझ से परे था। नाम न बताने की शर्त पर एक दुकानदार ने बताया कि उन्हें ठीक से मालूम नहीं है कि एफडीआई क्या है। कुछ व्यापारियाें ने अनुरोध किया तो उन्होेंने दुकानें बंद कर लीं।
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