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अभिभावकाें की जेब से निकलेंगे 57 लाख

Haridwar

Updated Mon, 17 Sep 2012 12:00 PM IST
रुड़की। डीजल के दाम बढ़ने से आम आदमी पर महंगाई की मार बढ़ती ही जा रही है। एक दिन पहले ट्रक ट्रांसपोर्ट यूनियनों के मालभाड़े में वृद्धि करने से फल-सब्जी से लेकर सभी जरूरी वस्तुएं महंगी होना तय है। अब स्कूली बच्चों के बहाने अभिभावकों जेब पर कैंची चलेगी। स्कूल प्रबंधनों ने गुपचुप तरीके से डीजल के दाम के बहाने किराया बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। कुछ ही दिनों में यह फरमान स्कूली बच्चों को सुनाया जा सकता है। शहर में रोजाना करीब 4800 बच्चे स्कूल वाहनों से आते-जाते हैं। ऐसे में यदि 100 रुपये प्रतिमाह किराया बढ़ाया जाता है तो इससे शहर के अभिभावकाें की जेब से सालाना 57 लाख रुपये झटके जाएंगे।
शहर के दो दर्जन से अधिक कान्वेंट स्कूलों में करीब 80 बसें बच्चों को लाने और ले जाने के लिए संचालित हो रही हैं। इनमें दो स्कूल तो ऐसे हैं, जिनमें 20 से अधिक बसें हैं। इन बसों में रोजाना करीब 48 हजार बच्चे घर से स्कूल और स्कूल से घर जाते हैं। स्कूली वैन इनसे अलग हैं। सभी स्कूलाें में बच्चों से औसतन 800 रुपये प्रति माह के हिसाब से बस का किराया वसूला जा रहा है। लेकिन अब डीजल के दाम बढ़ गए हैं तो स्कूलों के पास भी किराया बढ़ाने का बहाना है। इसके लिए स्कूल प्रबंधन ने एक छात्र से प्रति माह कम से कम 100 रुपये किराया बढ़ाए जाने की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में 4800 बच्चाें पर शहर के अभिभावकाें की जेब से चार लाख अस्सी हजार रुपये प्रतिमाह के हिसाब से साल में 57 लाख 60 हजार रुपये निकलेंगे। उम्मीद है कि किराए में बढ़ोतरी का फरमान एक-दो दिन में बच्चाें को सुना दिया जाएगा।

स्कूल भले ही कितनी कमाई करें। महंगाई के दौर में स्कूल प्रबंधन किराया बढ़ाने से नहीं चूकता। किराया बढ़ता है तो अभिभावकाें पर बोझ बढ़ेगा।
- विहान कश्यप

पहले ही स्कूल प्रबंधन स्कूल बसों से मोटी कमाई कर रहे हैं। ऐसे में स्कूलों को फिलहाल किराया नहीं बढ़ाना चाहिए।
- वासुदेव कुकडे़जा

अभिभावकों को तो फीस वृद्धि की आदत सी पड़ गई है। ऐसे में स्कूल प्रबंधन बसों का किराया बढ़ता है पैसा देना हमारी मजबूरी है।
-आशा

डीजल के दाम बढ़ने से हर आदमी पर इसका असर पड़ा है। स्कूलों में मध्यम वर्गीय परिवारों के ही अधिक बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे में यह उनके लिए मुश्किल भरा होगा।
-रितू अग्रवाल
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