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छात्राओं के साथ ही भेदभाव क्यों

Haridwar

Updated Fri, 07 Sep 2012 12:00 PM IST
हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विवि में केवल छात्राओं के साथ भेदभाव किया जा रहा है। शिक्षिकाओं और महिला कर्मचारियों को यहां पर पुरुषों के समान अधिकार मिले हुए हैं। शिक्षक संघ की चुनी हुई कार्यकारिणी में महिला पदाधिकारी हैं तो कर्मचारी यूनियन चुनाव में महिला कर्मियों को भी मतदान और उम्मीदवार बनने का अधिकार है। केवल छात्र कल्याण परिषद चुनाव में छात्राओं को शामिल होने का हक नहीं है।
विश्वविद्यालय की ओर से छात्राओं एवं महिला कार्मिकों में भी भेद किया जा रहा है। गुरुकुल कांगड़ी विवि शिक्षक संघ चुनाव में मुख्य कैंपस के साथ महिला परिसर ज्वालापुर और देहरादून की शिक्षिकाएं प्रतिभाग करती हैं। शिक्षक संघ में शिक्षिकाएं बाकायदा पदाधिकारी तक चुनी जाती हैं। मौजूदा शिक्षक संघ में अध्यक्ष प्रो. अंबुज शर्मा मुख्य परिसर से हैं जबकि उपाध्यक्ष डा. श्यामलता जुयाल कन्या गुरुकुल परिसर ज्वालापुर और संयुक्त सचिव डा. हेमन पाठक कन्या गुरुकुल परिसर देहरादून से ताल्लुक रखती हैं।
कर्मचारी यूनियन के चुनाव में भी पुरुष कर्मचारियों के महिला कर्मचारी प्रतिभाग करती हैं। शिक्षक संघ और कर्मचारी यूनियन तीनों कैंपस की एक ही होती है। अलग-अलग कैंपस की अलग यूनियन नहीं बनाई जाती। विवि की इसी नीति पर सवाल उठता है। जब तीनों कैंपस को मिलाकर शिक्षक संघ और कर्मचारी यूनियन बनाई जाती है तो छात्र कल्याण परिषद क्यों नहीं बनाई जा सकती। इसका जवाब विवि प्रशासन को देना चाहिए।
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कालेज की व्यवस्था खत्म कर चुकी यूजीसी
हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विवि के महिला परिसरों का पूर्व नाम कन्या गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर और देहरादून था। लेकिन विवि अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से 2010 में स्पष्ट गाइडलाइन जारी की गई कि कोई भी डीम्ड विवि अपना कालेज नहीं खोल सकता। चूंकि गुरुकुल कांगड़ी विवि डीम्ड विश्वविद्यालय है। इसलिए 2011 में गुरुकुल कांगड़ी विवि की ओर से कन्या गुुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर और देहरादून का नाम बदलकर महिला कैंपस कर दिया।
गुरुकुल कांगड़ी विवि की ओर से कन्या गुरुकुल महाविद्यालय का नाम बदलने के साथ ही यहां प्राचार्या का पद भी खत्म कर दिया। अब यहां कोर्डिनेटर पदनाम की व्यवस्था है। हालांकि पूरा कंट्रोल मुख्य परिसर से ही होता है। व्यवस्थाओं को देखा जाए तो अब कन्या गुुरुकुल अलग इकाई नहीं है। छात्राओं के प्रवेश से परीक्षा तक के सारे फैसले, सारे प्रशासनिक कार्यालय, सब मुख्य परिसर में हैं। ऐसे में छात्राओं को केवल चुनाव के लिए अलग मान लेना उचित नहीं है।
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अलग कैंपस तो अलग कराओ चुनाव
-गुरुकुल कांगड़ी विवि प्रशासन की ओर से पहले तर्क दिया जाता रहा है कि छात्राओं का कैंपस अलग है। इसलिए मुख्य कैंपस के चुनाव से उनका कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन, इस जवाब पर भी सवाल उठता है। अगर छात्राओं का कैंपस अलग है तो फिर उनका अलग चुनाव कराने में क्या आपत्ति है।
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एचएनबी के तीनों कैंपस में होते हैं चुनाव
-एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विवि श्रीनगर के तीन कैंपस हैं। श्रीनगर स्थित बिरला, पौड़ी और टिहरी। इन तीनों कैंपस का अलग-अलग चुनाव होता है। तीनों की अलग-अलग छात्र संघ कार्यकारिणी चुनी जाती है। गुरुकुल कांगड़ी विवि के भी तीन कैंपस हैं। मुख्य कैंपस के साथ ही ज्वालापुर और देहरादून में दो महिला कैंपस हैं। इन तीनों कैंपस का अलग-अलग चुनाव कराए जाने में किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
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बोले गुरुकुल के छात्र- सिंगल फोटो
-छात्र कल्याण परिषद के चुनाव में छात्राओं को वोट का अधिकार होना चाहिए। लेकिन यहां छात्राओं को परिषद से दूर रखा गया है। इस बारे में विवि को अपनी नीति बदलनी चाहिए।
- मनीष चौहान, पूर्व अध्यक्ष छात्र कल्याण परिषद

-छात्र कल्याण परिषद चुनाव में छात्राओं की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। मतदाता के साथ ही छात्राएं प्रत्याशी बनकर छात्र राजनीति की मुख्यधारा से जुड़े। छात्र परिषद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व जरुरी है।
- रोहित बालियान, छात्र नेता

-अगर विवि प्रशासन छात्र परिषद को सभी परिसरों का प्रतिनिधित्व मानता है। तो फिर कन्या गुरुकुल के मुद्दों पर छात्र परिषद के पदाधिकारियों को बोलने क्यों नहीं दिया जाता। यह नाइंसाफी है।
- वीरेन्द्र चौधरी, छात्र नेता

-चाहे तीनों कैंपस की अलग-अलग कार्यकारिणी चुनी जाए या तीनों की एक कार्यकारिणी बनेे। यह विवि प्रशासन को तय करना चाहिए कि छात्राओं को उनका हक कैसे मिले।
- गौरव ठाकुर, छात्र नेता
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समर्थन में शहर से उठी आवाज
सिंगल फोटो
-समाज के हर क्षेत्र में महिलाओं की भागेदारी है। छात्र संघ चुनाव से छात्राओं को वंचित रखना उनके अधिकारों का हनन है। यह अमानवीय नीति है।
- डा. नलिनी जैन, विभागाध्यक्ष अंग्रेजी, एसएमजेएन कालेज
-भारतीय संस्कृति में नारी को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। महिलाएं किसी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। छात्र संघ चुनाव में छात्राओं की भागेदारी होनी चाहिए। उनको रोकना गलत है।
- डा. भारती शर्मा, हिन्दी विभाग, एसएमजेएन कालेज
- एक ओर जहां समानता का पाठ पठाया जा रहा है। वहीं दूसरी शिक्षा के मंदिर में छात्राओं के साथ भेदभाव किया जा रहा है। यह न्यायसंगत नहीं है। इस मुद्दे पर शहर की लड़कियां गुरुकुल की छात्राओं के साथ हैं।
- रेनू।
-समानता की बात करें तो छात्र संघ चुनाव में छात्राओं की हिस्सेदारी जरुर होनी चाहिए। गुरुकुल में छात्राओं को मतदान का अधिकार मिलना चाहिए। जब लड़के वोट डाल रहे हैं तो फिर लड़कियों से यह अधिकार कैसे छीना जा सकता है।
- संगीता
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एक्सपर्ट की राय
- यूजीसी की ओर से शिक्षण संस्थानों में छात्र-छात्राओं के लिए समान अधिकार और नियम तय किए गए हैं। इनमें फर्क करना कानूनन भी गलत है। छात्र संघ चुनाव के लिए बनी लिंगदोह समिति की रिपोर्ट में भी ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि छात्रों के चुनाव कराए जाएं और छात्राओं के नहीं। लिंगदोह समिति ने तो सभी योग्य छात्र-छात्राओं को वोट का अधिकार दिया है।
- डा. संतोष चौहान, पूर्व प्राचार्या महिला महाविद्यालय।
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