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जिले के अस्पतालों में कंपोनेंट मशीन नहीं

Haridwar

Updated Fri, 24 Aug 2012 12:00 PM IST
हरिद्वार। जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों में एक भी कंपोनेंट मशीन नहीं है। कंपोनेंट मशीन के जरिए रक्त से प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और आरबीसी को अलग निकाल लिया जाता है, जो डेंगू, आईटीपी, ब्लड कैंसर और संक्रमण रोगियों के काम आते हैं। जिले के अस्पतालों में कंपोनेंट मशीन नहीं होने के चलते मरीजों को देहरादून भेजना पड़ता है।
यूं तो जिला अस्पताल, मेला अस्पताल एवं महिला अस्पताल तथा रुड़की के सिविल अस्पताल की गिनती बड़े अस्पतालों में होती है। लेकिन ब्लड के लिए मरीजों को जिला अस्पताल हरिद्वार और सिविल अस्पताल रुड़की में बनाए गए ब्लड बैंक पर निर्भर रहना पड़ता है। इनसे मरीजों को ब्लड तो मिल जाता है लेकिन अगर किसी मरीज को प्लाज्मा, प्लेलेट्स, बफी कोट एवं आरबीसी की जरूरत है तो इनको ब्लड से अलग करने की व्यवस्था जिले में नहीं है। इन्हें ब्लड से अलग करने के लिए कंपोनेंट मशीन की जरूरत होती है, जो जिले में उपलब्ध नहीं है।

चिकित्सा उपकरण है कंपोनेंट
- जिला चिकित्सालय के सीएमएस डा. एएस रावत के मुताबिक कंपोनेंट एक चिकित्सा उपकरण है। डाक्टरों के मुताबिक कंपोनेंट के जरिए रक्त से प्लाज्मा, प्लेटलेट्स एवं आरबीसी को अलग अलग निकाल लिया जाता है। आवश्यकतानुसार मरीजों को दिया जाता है।
किसका क्या उपयोग
प्लाज्मा- आग से जले मरीजों को चढ़ाया जाता है।
प्लेटलेट्स- डेंगू, आईटीपी एवं ब्लड कैंसर के मरीजों को चढ़ाया जाता है। इन रोगों में मरीजों के रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाती है।
आरबीसी- ब्लड ग्रुप के आरबीसी निकाल लिए जाते हैं। जिन्हें आवश्यकतानुसार मरीजों को चढ़ाया जाता है।
(डा. नवनीत कुमार के मुताबिक)
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डेंगू के मरीजों को ज्यादा दिक्कत
हरिद्वार। डेंगू के मरीज के शरीर के रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाती है। डाक्टरों के मुताबिक प्लेटलेट्स की संख्या 50 हजार से कम होने पर मरीज की जान को खतरा हो सकता है। ऐसे में मरीज को प्लेलेट्स चढ़ाया जाता है। लेकिन जनपद में प्लेलेट्स उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को देहरादून जाना पड़ता है। यहां पर प्लेटलेट्स लाकर मरीज को चढ़ाने में भी दिक्कत आती है। प्लेलेट्स को आसानी से नहीं लाया जा सकता है। रक्त से निकाला गया प्लेटलेट्स एक निश्चित तापमान पर रखा जाता है। डाक्टरों के मुताबिक प्लेलेट्स स्पेशल मेडिकल सेफ्टी बाक्स में आठ घंटे तक सुरक्षित रह सकते हैं। इसके बाद प्लेटलेट्स बेकार हो जाते हैं।
कंपोनेंट के लिए बड़ा स्टाफ चाहिए
रोटरी क्लब कनखल के पदाधिकारी प्रेम अरोड़ा और अनिल दीवान ने बताया कि क्लब की ओर से अस्पताल को कंपोनेंट मशीन उपलब्ध कराई जा सकती है। लेकिन मशीन का आपरेट करने के लिए एक दर्जन लोगों का स्टाफ चाहिए होगा। सरकारी अस्पताल पहले से ही डाक्टरों की कमी से जूझ रहे है। ऐसे में सवाल उठता है कि मशीन के लिए स्टाफ कहां से आएगा। डाक्टरों के मुताबिक इसके लिए छह डाक्टर, एक टेक्निकल सुपरवाइजर एवं छह लैब टेक्नीशियन चाहिए।

- कंपोनेंट मशीन के लिए एक प्रस्ताव शासन स्तर पर प्रस्तावित है। विभागीय मंत्री ने भी हरिद्वार में एक कंपोनेंट मशीन लगाने की बात कही है। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
- डा. एएस रावत, सीएमएस जिला चिकित्सालय।
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