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नियमों कायदों पर भारी अफसरशाही

Haridwar

Updated Tue, 21 Aug 2012 12:00 PM IST
रुड़की। सूचना के अधिकार को लेकर अफसर कितने जागरूक हैं, इसका पता सरकारी दफ्तरों के बाहर लगे आरटीआई के बोर्डों से आसानी से चल जाता है। किसी बोर्ड पर ऐसे अधिकारी का नाम लिखा है, जिनका की कई माह पहले तबादला हो चुका है। जबकि कुछ बोर्ड पर अधिकारियों का नाम ही गायब है। ऐसा हाल तहसील, नगरपालिका, ऊर्जा निगम और नेशनल हाईवे समेत कई विभागों के दफ्तरों में लगे बोर्डों का है।
सात साल पहले यानि 2005 मेें केंद्र सरकार ने लोगों के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम लागू किया था। यदि सूचना देने वाले अधिकारी खुद ही जागरूक हों तो क्या कहना। मगर सरकारी दफ्तरों का हाल कुछ ऐसा है कि कई जगह तो आरटीआई के बोर्ड ही नहीं लगे हैं। जहां लगे भी हैं तो वहां या तो अधिकारी का नाम गलत है या फिर नाम ही गायब कर दिया गया है। वहीं कई ऐसे दफ्तर भी हैं जहां अधिकारी तो बदले जा चुके हैं, मगर बोर्ड बदलने की जहमत किसी ने नहीं उठाई।

क्या कहती है पड़ताल

नगरपालिका
नगरपालिका में लगे सूचना अधिकार अधिनियम के बोर्ड में चार अफसरों के नाम लिखे हैं। जिनमें से तीन का यहां से तबादला हो चुका है। बोर्ड पर अभी अपीलीय अधिकारी का नाम एसडीएम सविन बसंल दर्ज है। जबकि करीब तीन माह पूर्व उनका यहां से तबादला हो चुका है। लोक सूचना अधिकारी का नाम ईओ प्रहलाद सिंह रावत दर्ज है। जबकि उनकी जगह नए ईओ वीएस पंवार यहां आ चुके हैं। इस बोर्ड पर सहायक लोक सूचना अधिकारी अभी तक उत्तम सिंह नेगी ही चल रहे हैं। जबकि उनका तीन माह पूर्व मंगलौर नगर पालिका में स्थानांतरण हो चुका है।

तहसील कार्यालय
तहसीलदार कार्यालय के बाहर लगा सूचना अधिकार अधिनियम का बोर्ड का भी यही हाल है। पहले इस बोर्ड पद तत्कालीन तहसीलदार देवेंद्र सिंह नेगी का नाम अंकित था। उनका तबादला हो जाने के बाद उनके नाम पर पेंट कर दिया गया है। लेकिन लापरवाही ऐसी है कि अभी तक नए तहसीलदार का नाम नहीं लिखा गया है। मौजूदा तहसीलदार का ध्यान भी अभी तक इस तरफ नहीं गया है। तहसील में आने वाले लोग नाम पर पेंट पुता देख हर दिन चर्चाएं करते हैं।

नगर स्वास्थ्य विभाग-
नगर स्वास्थ्य विभाग की ओर से नगरपालिका में लगवाए गए सूचना अधिकार के बोर्ड का भी यही हाल है। बोर्ड पर अभी तक पुराने नगरपालिका ईओ का नाम दर्ज है। इनका नाम बदलवाने की जरूरत अभी तक विभागीय अधिकारियों ने नहीं समझी है। लोग भी इस बोर्ड को देखकर अधिकारियों पर कटाक्ष करने से नहीं चूकते।


राष्ट्रीय राजमार्ग लोक निर्माण विभाग
राष्ट्रीय राजामार्ग लोक निर्माण विभाग के खंजरपुर रोड स्थित दफ्तर में लगे सूचना के अधिकार के बोर्ड का भी ऐसा ही हाल है। सूचना अधिकार अधिनियम के बोर्ड पर अभी तक लोक सूचना अधिकारी के नाम के सामने इंजीनियर यूसुफ का नाम दर्ज है। जबकि 15 दिन पूर्व उनका तबादला देहरादून हो चुका है। यहां के अधिकारी भी सूचना अधिकार का मोल नहीं समझ रहे।

ऊर्जा निगम का दफ्तर
बोट क्लब रोड स्थित उर्जा निगम के उपमहाप्रबंधक के कार्यालय के बाहर भी सूचना अधिकार अधिनियम का बोर्ड लगा हुआ है। इस बोर्ड में भी लोक सूचना अधिकारी के आगे किसी अफसर का नाम दर्ज नहीं है। इतने समय से लगे इस बोर्ड पर अधिकारी का नाम लिखवाने की जहमत नहीं उठाई गई।

पुलिस ही जागरूक
सूचना अधिकार अधिनियम के तहत सभी विभागों के कार्यालयों में लगे बोर्ड में कुछ ना कुछ खामियां नजर आई हैं। जिससे अधिकारियाें की जागरूकता पर भी सवाल उठ रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच पुलिस सबसे अलग नजर आई। सीओ कार्यालय से लेकर दोनों कोतवाली में लगे सूचना के अधिकार के बोर्ड पूरी तरह से अपडेट हैं। पड़ताल के दौरान सूचना अधिकार के बोर्ड पर मौजूदा अधिकारियाें के नाम ही लिखे हुए मिले।
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