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..तो अन्नदाता भी खरीदकर खाएंगे चावल

Haridwar

Updated Sat, 11 Aug 2012 12:00 PM IST
रुड़की। अन्नदाताओं को इस बार खुद भी चावल खरीदकर खाने पड़ेंगे। मौसम की बेरुखी के चलते सैकड़ों किसान धान की रोपाई समय पर नहीं कर पाए हैं। जिससे खेत खाली रह गए। ऐसे में, धान का उत्पादन घटना तय माना जा रहा है। कषि विभाग के ही आंकड़ों पर गौर करें, तो जनपद में इस साल तय लक्ष्य की अपेक्षा 15 हजार बीघा कृषि भूमि पर धान की रोपाई नहीं हो पाई है। जाहिर है, किसानों को खुद ही इस बार चावल के लाले पड़ेंगे।
क्षेत्र में इस बार कृषि विभाग ने करीब 13 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई का लक्ष्य रखा था। लेकिन, विपरीत मौसम के चलते यह टारगेट पूरा नहीं हो सका। कृषि विभाग के ही एक अनुमान के मुताबिक, हरिद्वार जनपद में करीब एक हजार हेक्टेयर (करीब 15 हजार बीघा) भूमि पर धान की रोपाई नहीं हो पाई है। समय पर बारिश नहीं होने से रुड़की क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। अधिकांश क्षेत्र असिंचित होने से हजारों की संख्या में किसान धान की रोपाई नहीं कर पाए। इससे खेत भी खाली रह गए। वहीं, जिन किसानों ने धान की रोपाई की भी है, उनके उत्पादन में भी गिरावट आने की पूरी संभावना जताई जा रही है। क्योंकि, फसल को समय पर पानी नहीं मिल पाया है। किसान राज कुमार, इरशाद, सतीश, योगेेंद्र आदि ने बताया कि विद्युत चालित नलकूपों के अलावा सिंचाई का उनके पास कोई साधन नहीं है। इससे वे न तो समय पर धान की पौध तैयार कर पाए, न ही उसकी रोपाई। ऐसे में, उन्हें इस साल चावल बाजार से खरीदकर ही खाने पड़ेंगे।

उत्पादन घटेगा, बढ़ेंगे दाम
रुड़की। देर से मानसून आने के चलते धान की फसल की बुवाई प्रभावित हुई है। जिसका असर प्रति बीघा उपज पर भी पड़ना तय है। कृषि अधिकारियों के मुताबिक, पछेती फसल होने और समय पर पर्याप्त पानी नहीं मिलने से प्रति बीघा 10 से 15 प्रतिशत उत्पादन घटने के आसार हैं। वहीं, कम रकबा और प्रति बीघा घटती धान की उपज के कारण दामों में तेजी आना भी तय माना जा रहा है। जानकाराें की माने तो धान की उपज में गिरावट के चलते जो चावल आमतौर पर 2500 रुपये कुंतल मिल रहा है, वह आने वाले सीजन में 3500 रुपये तक पहुंच सकता है।

कोट
मौसम ने इस साल धान की रोपाई पर विपरीत असर डाला है। रुड़की क्षेत्र में ज्यादा असर देखने को मिला है, क्योंकि यहां बारिश कम हुई। अनुमान के मुताबिक, पहले ही करीब एक हजार हेक्टेयर भूमि पर कम रोपाई हुई है। ऐसे में, यदि मौसम का मिजाज भी ऐसा ही रहा तो 10 से 15 फीसदी उत्पादन घटने की आशंका है ।
- जेपी तिवारी, मुख्य कृषि अधिकारी।
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