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..ऐसे तो घट जाएगा गन्ने का उत्पादन

Haridwar

Updated Thu, 09 Aug 2012 12:00 PM IST
रुड़की। यदि ऐसा ही चलता रहा तो इस बार गन्ने का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। पहले मौसम की मार तो अब गन्ने की फसल में आई टॉप बोरर बीमारी फसल के उत्पादन पर प्रभाव पड़ रहा है। जुलाई माह में गन्ने के बोरू में सामने आने वाली बीमारी इस बार अगस्त में सामने आई है। बीमारी की रोकथाम के लिए गन्ने की फसल में दवा का छिड़काव करना भी मुश्किल भरा हो रहा है। इसका प्रमुख कारण गन्ने की फसल का बड़ा होना माना जा रहा है।
इस साल किसानों को खेतीबाड़ी करना लोहे के चने चबाने के बराबर हो रहा है। कभी मौसम की मार तो कभी ऊर्जा निगम की बेरुखी के चलते किसानों को खेती करना मुश्किल हो गया है। अब मौसम ने साथ देना शुरू किया तो अब गन्ने की फसल में लगे टॉप बोरर रोग से किसानों को चिंता में डाल दिया। टॉप बोरर रोग को समाप्त करने के लिए किसानों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह गन्ना बड़ा होने से दवाई का छिड़काव भी नहीं कर सकते हैं।
चुड़ियाला किसान विश्वास त्यागी, पंकज त्यागी, भक्तोवाली किसान चरण सिंह ने बताया कि टॉप बोरर रोग अक्सर जुलाई के प्रथम सप्ताह में गन्ने की फसल में आता था, जिसे गन्ना छोटा होने पर कीटनाशक दवाईयों का स्प्रे कर समाप्त कर दिया जाता है, लेकिन अगस्त माह में इस बीमारी के प्रकट होने से उनके होश उड़ गए हैं। किसानों का कहना है कि गन्ने बड़ा होने से अब टॉप बोरर रोग का स्प्रे के माध्यम से समाप्त नहीं किया जा सकता है। उनका कहना टॉप बोरर रोग का कीट गन्ने की गोभ को खाकर नष्ट कर देता है, जिससे गन्ने की बढ़वार रुक जाती है।


ज्यादा ऊंचे हो चुके गन्ने में किसान ट्राईकार्ड का प्रयोग कर सकते हैं। किसान ट्राईकार्ड से पत्तों को गन्ने के पत्तों पर 15 मीटर लंबाई और 10 मीटर चौड़ाई के अंतराल पर चिपका दें। इससे टॉप बोरर कीट समाप्त होने के साथ ही उसके अंडे भी नष्ट हो जाएंगे। -डा. पुरुषोत्तम कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी

चार फुट तक के गन्ने में किसान कारटप हाइड्रोक्लोराइड पौने दो किलो और कारबोफ्यूरान, फोरेट दो किलो का प्रति बीघा में छिड़काव कर सकते हैं। इसके अलावा परोफेनोफोस कीटनाशक दवा का छिड़काव 2 एमएल प्रति लीटर के हिसाब से भी किया जा सकता है। इससे छोटे गन्ने से रोग समाप्त हो जाएगा। -डा. दीप्ति चौधरी, कीट विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी
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