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इसी माह हैंडओवर हो जाएगा ट्रामा सेंटर

Chamoli

Updated Mon, 10 Dec 2012 05:30 AM IST
कर्णप्रयाग। ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लाखाें की लागत से बना ट्रामा सेंटर भवन सीएचसी कर्णप्रयाग को इसी माह हैंडओवर हो जाएगा। सेंटर से अगले वर्ष मार्च से जरूरतमंदों का इलाज भी शुरू हो जाएगा। विभागीय स्तर पर हैंडओवर प्रक्रिया की कवायद तेज हो गई है। मकसद ये ही है कि यात्रा सीजन और नंदा राजजात के दौरान ट्रामा सेंटर का लाभ मिले।
ट्रामा सेंटर का निर्माण 88 लाख की लागत से किया गया है। सेंटर से सिटी स्केन की सुविधा भी मिल सकेगी। मौजूदा स्थितियों में श्रीनगर और गोपेश्वर में ट्रामा सेंटर है। कर्णप्रयाग से इन दोनों ही जगहों की दूरी 55 से 60 किमी तक है। दुर्घटनाओं में गंभीर घायलों को इन जगहों तक पहुंचाने में काफी देर लगती है। फिर, पिंडर घाटी के किसी दूरदराज के इलाके में दुर्घटना हो जाए, तो मरीज की जान जाने की पूरी आशंका रहती है।



ये मिलेगा लाभ --
ट्रामा सेंटर में सिटी स्केन की सुविधा के साथ ही आर्थोपेडिक, न्यूरो सर्जन एवं जनरल सर्जन तैनात होंगे। टीम की मदद से वाहन दुर्घटना और पहाड़ी से गिरकर गंभीर रुप से घायल होने वाले लोगों को उचित उपचार मिलेगा। अभी तक सीएचसी कर्णप्रयाग से दुर्घटनाओं के अस्सी प्रतिशत से अधिक केस हायर सेंटर रेफर किए जाते हैं।


मोर्चरी भी होगी जल्द शुरू
कर्णप्रयाग में ढाई वर्ष पूर्व तैयार हुई मोर्चरी के हैंडओवर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभाग ने राज्य सरकार को इस संबंध में नोटिफिकेशन भेज दिया है। उम्मीद है कि अगले वर्ष के मार्च तक इसे भी स्वीकृति मिल जाएगी। मोर्चरी शुरू होने से सड़क दुर्घटना के मृतकों का पोस्टमार्टम यहीं हो सकेगा। मौजूदा स्थिति में यह काम गोपेश्वर जिला मुख्यालय में कराया जाता है।


कोट---
ट्रामा सेंटर दिसंबर आखिरी सप्ताह तक विभाग के हैंडओवर हो जाएगा। उम्मीद है कि मार्च से यहां कार्य भी शुरू होगा। आगामी यात्रा सीजन और राजजात के दौरान जरूरतमंदों को इसका लाभ मिल सकेगा। मोर्चरी के हैंडओवर के लिए राज्य सरकार को नोटिफिकेशन का ड्राफ्ट भेज दिया गया है।
--- डा. अजीत गैरोला सीएमओ चमोली


मरीजों की भरमार, डॉक्टर एकमात्र
गुप्तकाशी स्वास्थ्य केंद्र का नहीं हो पाया उच्चीकरण
गुप्तकाशी। केदारनाथ यात्रा मार्ग के मुख्य पड़ाव गुप्तकाशी में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति संभल नहीं पा रही है। कालीमठ घाटी, केदार घाटी और बांगर क्षेत्र के दर्जनों गांव यहां के स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं, मगर इसका उच्चीकरण नहीं किया जा रहा है। भाजपा शासनकाल में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री बलवंत सिंह भौर्याल इसके उच्चीकरण की घोषणा कर चुके हैं, मगर प्रगति कहीं दिखाई नहीं दे रही है। नाराज ग्रामीण एक बार फिर आंदोलन छेड़ने की योजना बना रहे हैं।
विश्वनाथ संघर्ष समिति के अध्यक्ष हरि प्रसाद बताते हैं कि सात सितंबर को केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम लगाने पर तहसील प्रशासन द्वारा उनकी मांग को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया गया था। तीन माह बीतने के बाद भी इस पर कार्रवाई नहीं हुई। बीच में आपदा की वजह से आंदोलन धीमा रहा। लेकिन इसे दोबारा तेज किया जाएगा।

यात्राकाल में लग जाती है सीजनल ड्यूटी
गुप्तकाशी। यात्राकाल में जब अस्पताल पर सबसे अधिक मरीजों का दबाव होता है, यहां के एकमात्र डॉक्टर को सीजनल ड्यूटी पर केदारनाथ भेज दिया जाता है, जिससे सारी व्यवस्था बिगड़ जाती है।

17 हजार मरीजों का हो चुका स्वास्थ्य परीक्षण
गुप्तकाशी। आंकडे़ बताते हैं कि अस्पताल में अतिरिक्त डॉॅक्टरों की कितनी आवश्यकता है। जनवरी माह से अब तक अस्पताल में 16 हजार मरीज पंजीकृत हो चुके हैं। 108 इमरजेंसी वाहन से 800 इमरजेंसी केसों को अस्पताल लाया गया, जबकि 500 मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। अस्पताल में अधिकतर सर्जरी, महिला रोग और हड्डियों से संबंधित केस आते हैं।

गर्भवती महिलाएं होती हैं रेफर
रुद्रप्रयाग। केदारघाटी सहित अन्य क्षेत्रों में सबसे अधिक दिक्कत गर्भवती महिलाओं के प्रसव की आती है। क्षेत्र में स्त्री रोग विशेषज्ञ/महिला चिकित्सक के न होने पर महिलाओं को अगस्त्यमुनि या रुद्रप्रयाग ले जाना पड़ता है, जिसके चलते कभी- कभी उनकी जान पर बन आती है। पूर्व ब्लाक प्रमुख ममता नौटियाल का कहना है कि यदि स्वास्थ्य केंद्र में महिला डॉक्टर की तैनाती हो जाए, तो रेफर करने के झंझट से छुटकारा मिल जाएगा।

पत्रावली डीजी को भेजी: सीएमओ
स्वास्थ्य केंद्र के उच्चीकरण संबंधी पत्रावलियां स्वास्थ्य महानिदेशक को भेजी जा चुकी हैं। उच्चीकरण के लिए 20 नाली भूमि की आवश्यकता है। स्थान की अनुपलब्धता आड़े आ सकती है। केडी शर्मा, सीएमओ रुद्रप्रयाग

13 नाली भूमि भूमि स्वास्थ्य विभाग के नाम दर्ज है। यदि केंद्र का उच्चीकरण हो, तो ग्रामीण और भूमि उपलब्ध करा सकते हैं। बचन सिंह पंवार, स्थानीय निवासी
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