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अब महर्षि नारद के जिम्मे बदरी विशाल

Chamoli

Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
गोपेश्वर। हिंदुओं के आस्था के पवित्र धाम श्री बदरीनाथ के कपाट रविवार को परंपरागत रीतिरिवाज और मंत्रोच्चार के बीच अपराह्न तीन बजकर 25 मिनट पर बंद हो गए। शीतकाल में कपाट बंद रहेंगे। धाम में मौजूद करीब 16 हजार श्रद्धालु कपाटबंदी के साक्षी बने। मान्यता है कि छह माह तक भगवान बदरीविशाल की पूजा अर्चना का जिम्मा महर्षि नारद संभालते हैं।
बदरीनाथ धाम में तड़के शुरु हुई श्री बदरी विशाल के महाभिषेक पूजा दोपहर कपाट बंद की प्रक्रिया के साथ संपन्न हुई। इस दौरान बदरीनाथ मंदिर के सिंह द्वार के दोनों ओर वेद वेदांत संस्कृत महाविद्यालय जोशीमठ के 20 छात्रों ने स्वस्ति वाचन और विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया। परंपरा के अनुसार बदरीनाथ के मुख्य पुजारी रावल केशवन नंबूरी ने स्त्री वेश धारण कर माता लक्ष्मी को बदरीनाथ गर्भगृह में रखा। तदोपरांत माणा गांव की कन्याओं द्वारा निर्मित कंबल पर घी का लेपन कर बदरीविशाल को ओढ़ाया गया। बदरीश पंचायत से कुबेर जी, गरुड़ जी और उद्धव जी की मूर्ति को पांडुकेश्वर के लिए रवाना किया गया। इस दौरान बदरीनाथ धाम में स्थित श्रद्धालुओं ने बदरीविशाल को वस्त्र व आभूषण भेंट किए। इस अवसर पर बीकेटीसी के सीईओ बीडी सिंह, धर्माधिकारी भुवन उनियाल, चार धाम विकास परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष सूरत राम नौटियाल, गढ़वाल स्कॉट के सीओ कर्नल लोकेश कुमार आदि मौजूद थे।


जय हो पंच बदरी-पंच केदार.....
गोपेश्वर। कपाट बंद होने के दौरान धाम में लोक गायक मंगलेश डंगवाल ने कीर्तन-भजन कर बदरीनाथ धाम को गुंजायमान कर दिया। उन्होंने सबसे पहले जय हो पंच बदरी-पंच केदार व कई अन्य धार्मिक भजनों की प्रस्तुति दी। इस मौके पर गढ़वाल स्कॉट की बैंड धुनों और श्री बदरीनाथ जी के जयघोष के साथ कपाट बंद होने की प्रक्रिया संपन्न हुई।


नृसिंह मंदिर जोशीमठ रवाना डोली
गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम में छह माह तक आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी भी मौजूद रहती है। जो धाम के कपाट बंद होने पर जोशीमठ नृसिंह मंदिर में विराजमान होती है। मान्यता के अनुसार शीतकाल में छह माह तक श्री बदरीविशाल की पूजा नृसिंह मंदिर परिसर में की जाती है।


कब क्या हुआ----
रात्रि 2.30 बजे--- श्री बदरीनाथ जी का अभिषेक और श्रृंगार
प्रात: 3.00 बजे-- श्री बदरीनाथ जी की पूजाएं शुरु।
सुबह 3.15 बजे--आम श्रद्धालुओं द्वारा श्री बदरीनाथ जी के दर्शन।
सुबह 10.00 बजे--वेद वेदांत संस्कृत महाविद्यालय के छात्रों द्वारा स्वस्ति वाचन।
अपराह्न 1.30 बजे- रावल द्वारा स्त्री वेश धारण कर मां लक्ष्मी को गर्भगृह में रखा।
अपराह्न 2.00 बजे- मंगलेश डंगवाल का भजन-कीर्तन कार्यक्रम शुरु।
अपराह्न 3.15 बजे- श्री बदरीनाथ जी के कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरु।
अपराह्न 3.25 बजे-श्री बदरीनाथ जी के कपाट बंद।
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