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...तो खंडहर देखने आएंगे पर्यटक!

Chamoli

Updated Fri, 26 Oct 2012 12:00 PM IST
लक्ष्मी प्रसाद कुमेड़ी
कर्णप्रयाग। आदिबदरी धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि मंदिर समूह के समीपवर्ती क्षेत्र में लोगों ने रिहायशी मकान भी बना लिए थे। जबसे यह मंदिर समूह पुरातत्व विभाग के अधीन आया है, तब से लोगाें की मुश्किलें भी खड़ी हो गई हैं। पुरातत्व विभाग के नियमों के अनुसार मंदिर समूह से एक सौ मीटर की परिधि में नए भवन नहीं बन सकते हैं, पुराने भवनों की मरम्मत के लिए भी अनुमति लेनी होगी। ग्रामीण भवनों की मरम्मत की अनुमति मांग रहे हैं, लेकिन प्रशासन इस ओर खामोशी ओढ़े है।
पंच बदरियों में से आदिबदरी धाम का मंदिर समूह राष्ट्रीय धरोहर घोषित है। यही घोषणा स्थानीय लोगों पर भारी पड़ रही है। 1992 के बाद राष्ट्रीय धरोहरों के 100 मीटर दायरे में नव निर्माण करने पर प्रतिबंध है। जबकि पुनर्निर्माण के लिए संबधित विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है। लोगों का कहना है कि नब्बे के दशक के बाद मंदिर समूह पुरातत्व विभाग के पास जाने से यहां मरम्मत की अनुमति भी नहीं मिल रही है। जिससे लगातार भवन जर्जर होकर खंडहरों में तब्दील हो रहे हैं। ऐसे में साल में 11 माह श्रद्धालुओं के लिए खुला रहने वाले धाम के आस पास जर्जर भवन पर्यटकों को कैसे लुभा पाएंगे। यह सवाल बन रहा है।

इंसेट ----------

नहीं हो रही कार्रवाई
कर्णप्रयाग। सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र चाकर का कहना है कि कस्बे में नरेंद्र सिंह कठैत, शंभू प्रसाद चौधरी, हरीश चौधरी सहित कई लोगों के भवन जर्जर स्थिति में है। खतरे को देखते हुए दो माह पहले पुलिस चौकी को भी अन्यत्र शिफ्ट किया गया था। लोगों को भवन मरम्मत के लिए अनुमति नहीं मिल रही है। लोग प्रक्रिया के सरलीकरण की मांग कर रहे हैं।

कोट-
मरम्मत के लिए अनुमति प्रक्रिया राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के अधीन है। जिसके अंतर्गत प्रत्येक राज्य में सक्षम प्राधिकारी की नियुक्ति की गई है। जिनके माध्यम से ग्रामीण भवनों के मरम्मत के प्रस्ताव राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण को भेज सकते है। जहां से स्वीकृत होने के बाद मरम्मत की जा सकती है। -अतुल भार्गव निदेशक पुरातत्व विभाग उत्तराखंड।
केस-1 बलवंत सिंह रावत का पुश्तैनी आवासीय भवन पुरातत्व विभाग के नियमों के फेर में फंस गया। जर्जर हुए भवन को छह साल पहले खाली कर दिया गया। नियमों के चलते इसका पुनर्निर्माण लटका है।

केस-2 नेशनल हाईवे पर धर्मानंद थपलियाल का दो मंजिला पुश्तैनी भवन है। पांच वर्ष पहले जब भवन की मरम्मत के प्रयास किए तो पुरातत्व के नियमों का पेच फंस गया। मजबूरन घर खाली करना पड़ा। यह मकान आज खंडहर में तब्दील हो गया है।
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