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महकमों को जनता की तकलीफ से क्या लेना

Chamoli

Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
नदी से सटे गांव में सूख रहे हलक
गोपेश्वर। इसे ग्रामीणों की बदकिस्मती कहें या फिर सरकारी तंत्र की लापरवाही, गांव से महज 50 मीटर की दूरी पर अलकनंदा नदी बह रही है, लेकिन फिर भी ग्रामीणों के हलक सूखे हैं। दशोली ब्लाक के बिरही गांव की यह विडंबना है। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित इस गांव के लिए वर्ष 2009 में जल निगम ने स्वैप मोड़ के तहत लगभग 17 लाख 18 हजार की पेयजल योजना का निर्माण शुरू किया था। वर्ष 2010 में बरसात के चलते योजना कार्य रुक गया, जो आज तक शुरू नहीं हो पाया है। गांव में वर्तमान में करीब 102 परिवार निवास करते हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कई बार कहने के बावजूद जल निगम योजना पर कार्य शुरू नहीं कर रहा है।


जल निगम को पेयजल योजना के निर्माण के लिए शासन से पूरी धनराशि भी मिल गई है। योजना निर्माण में कहीं कोई रुकावट भी नहीं है, बावजूद इसके योजना अधर में लटकी हुई है। इस समस्या को लेकर शीघ्र डीएम से मिलेंगे।-तारा दत्त थपलियाल, सामाजिक कार्यकर्ता, बिरही।

हमें पीने के पानी की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है। कई बार जल निगम के अधिकारियों को समस्या बताई गई। हमारे छोटे बच्चे भी पानी भरने के लिए अलकनंदा नदी में जा रहे हैं।-बसंती देवी, ग्रामीण, बिरही गांव।

बिरही गांव में पेयजल योजना निर्माणाधीन है। आपदा के चलते कई स्थानों में यह निर्माण क्षतिग्रस्त हो गया था। इस कारण दिक्कतें पैदा हुई। जल्दी ही निर्माण पूर्ण कर ग्रामीणों को पेयजल मुहैया कराया जाएगा। एससी जोशी, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान गोपेश्वर।

बिल चाहिए, चाय की दुकान पर आइए
गोपेश्वर। दशोली ब्लाक के ग्राम पंचायत छिनका में ऊर्जा निगम की लापरवाही ग्रामीणों पर भारी पड़ रही है। यहां ग्रामीणों को सुचारु बिजली मुहैया कराना तो दूर की बात है। बिजली के बिलों के लिए भी छिनका गांव में स्थित दुकानों की खाक छाननी पड़ती है। यहां ऊर्जा निगम का कर्मचारी ग्राम पंचायत के अंतर्गत छिनका, बौंला, चमेली, सेमला, टोलियाणा, तल्ला नौरी, मल्ला नौरी, चौधरियाणा और बांपाधार तोकों के बिल एक चाय की दुकान के बाहर टांग देता है, जिससे ग्रामीणों को कई महीनों तक बिल के दर्शन नहीं होते हैं।
ग्राम प्रधान छिनका सतेश्वर प्रसाद सती, बीडीसी सदस्य दर्शन सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता सुनील सती, बलवंत सिंह, कुंदन सिंह झिंक्वाण और नरेंद्र झिंक्वाण का कहना है कि कई बार ऊर्जा निगम के अधिकारियों को शिकायत कर दी गई है। इसके बावजूद बिल उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचाए जा रहे हैं। इधर, ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र पंवार का कहना है कि पूर्व सैनिकों को बिल वितरण का जिम्मा दिया गया है, छिनका गांव में क्या स्थिति है, इसे देखा जाएगा।




बदहाल जखेड़ गदेरा पेयजल योजना
कर्णप्रयाग। जल संस्थान की लापरवाही लोगों पर भारी पड़ रही है। एक ओर नगर के कई हिस्सों में नियमित सप्लाई न होने की शिकायतें आ रहीं है, वहीं दूसरी तरफ पांच लाख लागत से बनी जखेड़ गदेरा पेयजल योजना बदहाल है। योजना का चेंबर तीन बार बनने के बावजूद क्षतिग्रस्त पड़ा हुआ है।
नगर क्षेत्र के सुभाष नगर और खंपियाणा क्षेत्र मेें पेयजल सप्लाई के लिए तीन वर्ष पूर्व कर्णप्रयाग-नैनीताल राजमार्ग पर स्थित जखेड़ गदेरा प्राकृतिक स्रोत को पेयजल लाइन से जोड़ा गया, लेकिन कार्यदायी संस्था की लापरवाही के चलते निर्माण के कुछ ही दिनों में क्षतिग्रस्त हो गई। योजना के पाइप कई स्थानों पर छिटक गए, जबकि चेंबर क्षतिग्रस्त हो गया। विभाग द्वारा चेंबर की दो बार मरम्मत कराई गई है, लेकिन स्थिति बदहाल बनी हुई हैं।







नौ माह बाद मिली थी बिजली, फिर गुल
कर्णप्रयाग। पहले ऊर्जा निगम की लापरवाही और अब दैवी आपदा तल्ली गबनी वासियों पर भारी पड़ी है। नवंबर 2011 में फुंके गांव के ट्रंासफार्मर को निगम ने अगस्त 2012 में बदला था। नौ महीने में जाकर गांव में बिजली के दर्शन हुए थे, लेकिन सितंबर में दैवी आपदा में यह ट्रांसफार्मर फिर फुंक गया। अब फिर एक बार ग्रामीण 22 दिनों से अंधेरे में हैं। ग्रामीणों ने शीघ्र आपूर्ति सुचारु न करने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
ब्लाक के तल्ली गबनी में पिछले साल से नवंबर में ट्रासंफार्मर फुंक जाने से गांव के तीन दर्जन से अधिक परिवार अंधेरे में थे। निगम ने ट्रासंफार्मर भिजवाया, लेकिन यह सात माह तक सड़क किनारे धूल फांकता रहा। आखिरकार इस साल अगस्त माह में ट्रांसफार्मर गांव पंहुचा, तो ग्रामीणों ने समझा कि अब शायद उजाला नसीब होगा, लेकिन ग्रामीणों की किस्मत में मायूसी खत्म होनी नहीं लिखी थी। गत 19 सिंतबर को जबरदस्त भू-स्खलन व वज्रपात के चलते लाइन क्षतिग्रस्त हुई और ट्रांसफार्मर फुंका गया। इस वजह से गांव में फिर से अंधेरे का राज कायम हो गया है। प्रधान भागीरथी देवी, मनोज सिंह, बीरेन्द्र सिंह, कर्ण सिंह, अंजू देवी, त्रिलोक सिंह, पूर्व प्रधान धीरेंद्र भंडारी ने कहा कि निगम को शीघ्र लाइनों की मरम्मत कर दूसरा ट्रांसफार्मर लगाना चाहिए। इधर, एसडीओ गुलशन बुलानी ने कहा कि ट्रांसफार्मर मिलने पर गांव भेज दिया जाएगा।
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