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आस्था को भी खरीदने चला था पोंटी!

Almora

Updated Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
अल्मोड़ा। पोंटी चड्ढा एंड कंपनी ने उत्तराखंड के प्रसिद्ध ग्वल देवता मंदिर (चितई) में भी पैसे के बल पर आस्था को खरीदना चाहता था। उत्तराखंड के इस प्रसिद्ध मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा देवता को अर्पित की गई घंटियों से छेड़छाड़ कर पोंटी ने उन्हें पिघलाकर उनकी जगह बड़ी घंटियां लगा दीं और उस पर पोंटी का नाम लिख दिया। पोंटी ने मंदिर के जीर्णोद्धार के नाम पर उसका मूल स्वरूप ही बदल डाला। बाद में शराब विरोधी कार्यकर्ताओं के आंदोलन के बाद इन घंटियों से पोंटी का नाम हटाया गया। चितई में एक पट्ट पर शराब के धंधे से जुड़े एक अन्य हिस्ट्रीशीटर का नाम भी लिख दिया गया। इस सब को देखते हुए श्रद्धालुओं का एक तबका और शराब आंदोलन से जुड़े तमाम लोगों का मानना है कि पोंटी चड्ढा को ग्वल देवता का भी श्राप लगा होगा।
‘नशा नहीं रोजगार दो’ आंदोलन में शुरू से ही सक्रिय रहे उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पीसी तिवारी का कहना है कि पोंटी चड्ढा ने चितई के ग्वल देवता मंदिर की घंटियों के साथ छेड़छाड़ की। इसके खिलाफ माफिया संस्कृति विरोधी अभियान के अंतर्गत आंदोलन किया गया। इस आंदोलन के दबाव में आखिरकार पोंटी चड्ढा ने अपना नाम घंटियों से हटवाया। इसके अलावा पोंटी चड्ढा ने आपसी द्वंद्व में मारे गए एक हिस्ट्रीशीटर की स्मृति में भी अपना एक पट लगवा दिया। साथ ही मंदिर के जीर्णोद्धार के नाम पर उसका मूल स्वरूप ही बदल डाला। श्री तिवारी का कहना है कि पोंटी चड्ढा एंड कंपनी ने मंदिरों में भी सुनियोजित ढंग से कब्जा करने की कोशिश की। पुलिस की चैक पोस्टों में पोंटी के लोग खाकी वर्दी में तैनात रहते थे और पूरा प्रशासनिक, पुलिस तंत्र उसके साथ खड़ा रहता था।
नशा नहीं रोजगार दो आंदोलन के एक और प्रमुख नेता और उलोवा के केंद्रीय अध्यक्ष डा. शमशेर सिंह बिष्ट के मुताबिक पोंटी चड्ढा ने धार्मिक स्थलों के अलावा खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ ही सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र में भी हस्तक्षेप किया। बेरोजगारी का लाभ उठाकर युवाओं को गांव-गांव शराब बेचने के काम में लगा दिया। पुजारियों आदि को पक्ष में करके चितई के ग्वल देवता मंदिर में एक अपराधी के नाम से पट लगा दिया। डा. बिष्ट का कहना है कि पोंटी ने इन सब गतिविधियों में शामिल होकर लोक कल्याणकारी कार्य प्रदर्शित करने की कोशिश की।
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