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800 रुपये में कैसे होगा बच्चों का लालन पालन

Almora

Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा के कर्नाटकखोला में स्थित राजकीय शिशु सदन में कुमाऊं के सभी जिलों के लावारिश और अनाथ बच्चों की परवरिश की जाती है, लेकिन बजट की कमी तथा अन्य कारणों से शिशु सदन को खुद संरक्षण की जरूरत है। बच्चों के राशन, नाश्ता, दूध, कपड़े आदि सहित सभी तरह के खर्चों के लिए शासन से हर माह प्रति बच्चा 800 रुपये मिलते हैं, जबकि इन सब खर्चों के लिए हर बच्चे को कम से कम दो हजार रुपये की जरूरत है। बजट के अभाव में बच्चों को पौष्टिक भोजन और अच्छे कपड़ों की व्यवस्था संभव नहीं है। जिन चार चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के ऊपर बच्चों की जिम्मेदारी है उन्हें पिछले पांच महीने से वेतन भी नहीं मिला है। अधीक्षिका का पद भी चार साल से खाली है।
अल्मोड़ा में 1979-80 में राजकीय शिशु सदन की स्थापना की गई। शिशु सदन में कुमाऊं के सभी जिलों से आने वाले अनाथ और लावारिश बच्चों की परवरिश की जाती है। यहां 0-10 साल की उम्र तक के बच्चे रखे जाते हैं। 10 साल की उम्र पूरी हो जाने के बाद लड़कों को किशोर निकेतन हरिद्वार और बालिकाओं को अल्मोड़ा में ही स्थित बालिका निकेतन भेजा जाता है। राजकीय शिशु सदन में इस समय शून्य से 10 साल की उम्र वाले 27 बच्चों की परवरिश हो रही है। हालांकि किराए के भवन पर चल रहे सदन में जगह की कोई कमी नहीं है, लेकिन बजट की कमी के चलते बच्चों को अभाव झेलने पड़ रहे हैं। शासन से शून्य से आठ साल के बच्चों के लिए 800 रुपये और शून्य से 10 साल के बच्चों के लिए प्रति माह एक हजार रुपये मिलते हैं। इतनी धनराशि में बच्चों को पौष्टिक खाना दिया जाना संभव नहीं है। कपड़े, दूध, पढ़ाई आदि की अच्छी व्यवस्था भी मुश्किल से हो पा रही है। हालत यह कि जिन चार चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के ऊपर बच्चों को नहलाने, धुलाने सहित सभी तरह की देखरेख की जिम्मेदारी है उन्हें पिछले पांच महीने से वेतन भी नहीं मिला है। चारों कर्मचारी दैनिक वेतन पर काम कर रहे हैं। उन्हें वर्षों से नियमित नहीं किया गया है। प्रभारी अधीक्षिका सुशीला देवी ने बताया कि शासन से समय पर बजट नहीं मिलने के कारण इन कर्मचारियों को वेतन मिलने में विलंब हो रहा है। उन्होंने बताया कि शिशु सदन में लिपिक का पद भी रिक्त है। सदन के नए भवन का बख में निर्माण चल रहा है। कुछ माह में भवन का काम पूरा होने की उम्मीद है।
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