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खाकी वर्दीधारियों ने छोड़ दिया मूंछों पर ताव देना!

Varanasi

Updated Mon, 10 Dec 2012 05:30 AM IST
वाराणसी। या तो खाकी वर्दी धारियों ने मूंछों पर ताव देना छोड़ दिया है या फिर पुलिस महकमे के सभी लोग मूंछमुंडे हो गए हैं। तभी तो जिले के किसी भी पुलिसकर्मी को मूंछों का भत्ता (स्पेशल अलाउंस) नहीं मिलता। उच्चाधिकारी जिले में तैनात डेढ़ हजार दारोगा और सिपाहियों में से एक की भी मूंछ को इसके काबिल नहीं समझते।
पुलिस महकमे में कई भत्ते विशेष परिस्थितियों में दिए जाते हैं। लेकिन, इसके लिए विभाग के आलाधिकारी की नजरे इनायत होनी चाहिए। मूंछ का भत्ता भी इसमें शामिल है। एसएसपी और उससे ऊपर रैंक के अधिकारी को विशेषाधिकार होता है कि मातहतों में किसी की मूंछ उसे खास दिख जाए तो उसे वह भत्ता दे सकता है। अधिकारी के निर्देश पर आरआई उस पुलिसकर्मी के वेतन में अतिरिक्त भत्ता जोड़कर शासन को भेज देता है।
मूंछ के लिए हर माह 100 रुपये का भत्ता दिया जाता है। इस तरह मूंछों के रखरखाव के लिए सालाना 1200 रुपये मिलते हैं। इसमें मूंछों की कटिंग से लेकर उसे रंगने तक का खर्च शामिल है। अगर सिपाही किसी वजह से मूंछ कटा लेता है या उसका आकार बदल देता है तो भत्ता निरस्त भी किया जा सकता है। यह भत्ता उनको ही दिया जाता है जो अपनी खास प्रकार की मूंछ के कारण पहचाने जाते हैं। सौ-दो सौ सिपाहियों की भीड़ में जिनको आसानी से पहचाना जा सके। रौबदार मूंछों को इसमें वरीयता दी जाती है। वैसे तो यह भत्ता अधिकारी का विशेषाधिकार है लेकिन यह भी सच है कि जिले में कई सिपाही ऐसे हैं जिनकी मूंछें भत्ते की शर्तों पर खरी उतरती हैं।

1200 रुपये सालाना मिलते हैं मूंछों को संवारने के लिए

जिले में इस समय किसी को भी मूंछ का भत्ता नहीं मिल रहा है। वैसे भी यह अनिवार्य भत्ता नहीं है बल्कि अधिकारी का विशेषाधिकार होता है। इसके लिए विभाग उस अधिकारी को मद अलाट करता है। उसका उपयोग अधिकारी की इच्छा और विवेक पर निर्भर करता है। -रणविजय सिंह, आरआई।
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नत्थूलाल को टक्कर देती हैं माताभीख की मूंछें
वाराणसी। सिगरा थाने में तैनात सिपाही माताभीख सिंह की मूंछें शराबी फिल्म के नत्थूलाल की मूंछों से टक्कर लेती हैं। जनपद में एक साल से तैनात माताभीख को भी भत्ता नहीं मिलता। प्रतापगढ़ के रहने वाले माताभीख पुलिस सेवा में 1974 से हैं। इसके पहले इलाहाबाद में तैनाती के दौरान उनको तत्कालीन एसएसपी वीके सिंह और डीआईजी चंद्रप्रकाश के निर्देश पर मूंछ का भत्ता दिया जाता था। इन खास मूंछों ने उनको कई रिवार्ड भी दिलाए हैं।
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