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न किताबें मिलीं न शिक्षक, कैसे हो पढ़ाई

Varanasi

Updated Sat, 08 Dec 2012 05:30 AM IST
वाराणसी। मदरसा बोर्ड की लापरवाही से न सिर्फ विद्यार्थी बल्कि शिक्षकों को भी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। कहने को तो बोर्ड आगामी परीक्षा नए पाठ्यक्रम के आधार पर लेगा, लेकिन सत्र शुरू हुए आठ माह हो गए और अब तक किताबें भी नहीं उपलब्ध कराई गईं। यही नहीं, शिक्षकों की कमी दूर करने का भी कोई प्रयास नहीं किया गया। मदरसा प्रबंधन किसी तरह जोड़तोड़ करके विद्यार्थियों को पढ़ा रहा है।
प्रदेश में मान्यता प्राप्त कुल 2799 मदरसे हैं। इनमें 459 अनुदानित और 2340 गैर अनुदानित हैं। यहां मौलवी-मुंशी (हाईस्कूल), आलिम (इंटर, अरबी-फारसी), कामिल (स्नातक तीन वर्ष अरबी-फारसी) और फाजिल (स्नातकोत्तर दो वर्ष अरबी-फारसी) की शिक्षा दी जाती है। होना तो ये चाहिए था कि पहले शिक्षकों की कमी दूर की जाती फिर कोर्स बढ़ाए जाते, मगर मदरसा बोर्ड ने शिक्षकों की कमी पर ध्यान ही नहीं दिया और पाठ्यक्रम बढ़ा दिए। वर्तमान समय में मदरसों में आलिया स्तर पर (हाईस्कूल से स्नातकोत्तर) सिर्फ पांच शिक्षक नियुक्त हैं, जबकि पुराने पाठ्यक्रम में जहां सात पेपर होते थे वहीं अब नए पाठ्यक्रम में पेपर बढ़कर 12 हो गए हैं।
कोट : -
बोर्ड का काम किताबें छपवाना नहीं है। सरकारी किताब की तो बात ही मत कीजिए। इतनी किताबें नहीं छपवाई जा सकती हैं। हां, अगर बड़े मदरसे किसी प्रकाशक को पकड़कर किताबें छपवा लें तो बेहतर है। एक बार ऐसा हो जाएगा तो हर बार किताबें छपने लगेंगी। -असलम जावेद, रजिस्ट्रार मदरसा बोर्ड

- नया पाठ्यक्रम लागू तो हो गया, लेकिन न तो बढ़े कोर्स के टीचर मिले और न ही नई किताबें। ऐसे में नये पाठ्यक्रम से कैसे परीक्षा होगी, यह समझ में नहीं आ रहा। -मौलाना अब्दुल अव्वल, प्रिंसिपल, मदरसा जामिया रहमानिया, मदनपुरा

- मदरसा बोर्ड की जिम्मेदारी होती है कि वह नवीन पाठ्यक्रम और विषयों के अनुसार किताबें छपवाए, लेकिन बोर्ड के अधिकारी इससे पल्ला झाड़ रहे हैं। बार-बार लिखने के बाद न तो सरकार ध्यान दे रही और न ही बोर्ड ।-वहीदुल्लाह खां सईदी, राष्ट्रीय महामंत्री, आल इंडिया टीचर्स एसोसिएशन मदारिसे अरबिया
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