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कबीरचौरा मठ की संपत्ति को बेचने की साजिश

Varanasi

Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
वाराणसी। कबीरपंथ की कबीरचौरा मूलगादी पीठ से संबद्ध मवइया मठ की संपत्ति को बेचने की साजिश का खुलासा हुआ है। पांच बीघा जमीन को नौ करोड़ रुपये में बेचने का सट्टा एक व्यक्ति से किया गया है। इस जमीन पर डेढ़ दशक से भूमाफिया की निगाह है। वे दो साधुओं की हत्या और एक साधु को अगवा कर चुके हैं। वर्ष 1994 में साधु अशोक दास का अपहरण होने के बाद साधु समाज आंदोलित हो गया था। भूमि विक्रय की सूचना से कबीरपंथ के संतों में खलबली मची हुई है। मूलगादी पीठाधीश्वर संत विवेक दास आचार्य सोमवार को मंडलायुक्त और जिलाधिकारी से मुलाकात कर बिक्री पर रोक लगाने की मांग करेंगे।
केंद्रीय तिब्बती विश्वविद्यालय के सामने कबीरचौरा मठ से संबद्ध मवइया मठ है। मठ का संचालन श्री सद्गुरु कबीर रघुपतिदास रामस्वरूप ट्रस्ट करता है। इसके मैनेजिंग ट्र्स्टी विचार दास ने ट्रस्ट की जमीन विक्रय का सट्टा गाजीपुर के सुरेंद्र प्रताप सिंह से नौ करोड़ रुपये में किया है। इसके एवज में उन्होंने 50 लाख रुपये की पेशगी भी ले ली है। इसकी जानकारी मिलने पर साधुओं ने मूलगादी पीठाधीश्वर संत विवेक दास आचार्य को दी। जमीन बिक्री की खबर सुनकर वह बनारस पहुंचे। उन्होंने बताया कि संपत्ति विचार दास के नाम से है लेकिन वह उनकी निजी संपत्ति नहीं है। वर्ष 2009 में विचार दास ने एक इकरारनामा में कहा है कि वे मूलगादी मठ से जुड़ी किसी भी संपत्ति का विक्रय नहीं कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि दो अन्य लोगों से भी जमीन बेचने का करार करने की जानकारी मिली है। मवइया मठ की संपत्ति पर कब्जे के लिए माफिया ने बाबा रामस्वरूप दास और उनके एक शिष्य और ट्रस्ट के ट्रस्टी अशोक दास का अपहरण करके हत्या कर दी थी।


कबीरचौरा मूलगादी मठ से जुड़ी किसी भी जमीन की बिक्री करने का अधिकार किसी को नहीं है। ट्रस्ट की वसीयत के मुताबिक, संपत्ति का रेहन, सट्टा या अंतरण ट्रस्ट मंडल की राय से ही किया जा सकता है। बिक्री के लिए मंडलायुक्त एवं जिला जज की अनुमति लेनी जरूरी है। सोमवार को वह मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और रजिस्ट्री विभाग के अफसरों से इस पर रोक लगाने के लिए मुलाकात की जाएगी। विचार दास ने गोरखपुर, पटना, संत कबीरनगर में भी कुछ जमीनों की बिक्री की है, जिन पर मुकदमे चल रहे हैं। -संत विवेक दास आचार्य, पीठाधीश्वर कबीरचौरा मूलगादी मठ
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