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संतूर पर सोपोरीबाज ने गतों से बदली फिजा

Varanasi

Updated Wed, 28 Nov 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। मैं वो गीत हूं जिसे गाया न किसी ने /मैं वो राग हूं जो किसी साज पे लाया न गया...। मंगलवार को गंगा महोत्सव की आखिरी शाम कुछ ऐसे ही अनछुए पहलुओं को लेकर गुजरी। लंबे इंतजार के बाद संतूर के तारों पर भजन सोपोरी की साधना सुकून की छांव गढ़ती रही। पद्मश्री भजन सोपोरी ने रागों-बंदिशों की अवतारणा के साथ गंगा तट पर तमाम दिलोदिमाग को सींच कर हरा कर दिया तो पं.जसराज के भांजे ने आवाज की कशिश के खयाल गायन की शुद्धता की बानगी पेश कर संगीत रसिकों को मुग्ध किया। वादन-नृत्य से सजी यह महफिल देर रात तालियों की गड़गड़ाहट के साथ मंजिल तक पहुंची।
भजन सोपोरी ने चिर परिचित अंदाज में संगीत प्रेमियों को साधना का रसपान कराया। राग किरवानी में अलाप, जोड़ के बाद सोपोरीबाज ने घराने की विशेष गतों से दर्शकों का दिल जीत लिया। फन के जादूगर ने अखरोट की लकडि़यों से संतूर की बारीकियां नाजोअदा के साथ बार-बार पेश कर वाहवाही लूटी। पारंपरिक गतों को उन्होंने सधे अंदाज में सामने रखा। तबले पर मिथिलेश कुमार झा की संगत को कोई जवाब नहीं था। ताप पर बरसते उंगलियों के पोर-पोर से उन्होंने दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ी। इनके बाद राग पुरिया में पं. जसराज के भांजे रतन मोहन शर्मा ने बंदिश पेश की। बोल थे- फूलन के हरवा...। तबले पर काली नाथ मिश्र, पखावज पर विजय रामदास और हारमोनियम पर पं. धर्मनाथ मिश्र ने संगत की। इनके बाद श्रीधर ने कर्नाटक शैली में वायलिन की प्रस्तुति की। मृदंगम पर संगत की वीसी सुधीर ने. राग नलिन कांति में कंपोजीशन बेजोड़ था। इसी राग में पारंपरिक धुन भी उन्होंने बजाई। बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय की छात्राओं ने भरत नाट्यम शैली में नृत्य की मोहक प्रस्तुति की। ऊं नम: शिवाय के लिए अर्पित इस भरत नाट्यम और कथक मिश्रित नृत्य का नाम था पंच पुष्प। नृत्य संरचना प्रेमचंद होम्बल की थी। प्रियंका बाजोरिया, प्रियंवदा तिवारी, नुपूर मिश्रा, अनन्या त्रिपाठी ने भरत नाट्यम शैली पेश कियाजबकि कथक शैली में प्रीति सिंह, श्रीपर्णा नंदी,पायल दास और वसुंधरा शर्मा ने नृत्य किया। गायन जया शाही का था। बांसुरी पर हरि पौड्यिाल, तबला किशोर कुमार मिश्र, मृदंगम पर संगत की सत्यवर प्रसाद ने। परिकल्पना विधि नागर ने की थी।
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