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बनारसी वस्त्र उद्योग को नया आयाम दे रहे युवा

Varanasi

Updated Mon, 26 Nov 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय से टेक्सटाइल डिजाइनिंग में डिग्री हासिल करने वाले पंकज शाह नेे जब वस्त्र का पैतृक कारोबार संभाला तो उन्होंने इसमें डिजिटल डिजाइनिंग और प्रिंटिंग का नया आयाम जोड़ दिया। उनकी मानें तो डिजिटल प्रिंटिंग के जरिये क्रेप, काटन पर तैयार कपड़ों, ड्रेस मैटेरियल और होम फर्निशिंग की खूब मांग है। वर्तमान समय में इस काम से जुड़े कई उद्यमी ठीकठाक कारोबार कर रहे हैं।
सिल्क और जरी के काम के चलते बनारसी वस्त्र उद्योग की पहचान दुनिया भर में है। किमखाब, सिल्क, जरी के कामों की मांग रही है। चूंकि दस्तकारी से तैयार होने वाले इन राजशाही वैभव वाले वस्त्रों की खरीद हर किसी के वश में नहीं थी, लिहाजा सिल्क उद्योग पिछड़ता चला गया। अब नई पीढ़ी इस उद्योग को अपनी कल्पना से नया आयाम देकर उबारने में लगी है। यह पीढ़ी साडि़यों के बजाय ड्रेस मैटेरियल, होम फर्निशिंग और दस्तकारी के बजाय डिजिटल प्रिंटिंग पर जोर दे रही है।
बनारस में बने सूती कपड़े अड्डकाशी में भगवान बुद्ध की देह ताजा रखने के लिए लपेटे गए थे, मगर बाद में इस तरह का बारीक और तापरोधी कपड़ा बुनने का हुनर इतिहास का हिस्सा बन गया। बनारसी दस्तकारी की पहचान सिल्क, सोने-चांदी की जरी से बने शाही वस्त्रों से होने लगी। रेशम की बढ़ती कीमतों, श्रम साध्य होने के कारण बनारसी कपड़ों का खरीदार उच्चवर्ग ही रह गया था। पावर लूम के पास थोड़ा बहुत काम था लेकिन हैंडलूम वाले बुनकर बदहाल होते गए। इधर, पिछले कुछ महीनों में नई पीढ़ी ने वस्त्र उद्योग को पूरी तरह बदल दिया है। अब सूती, क्रेप, लिनेन पर काम हो रहे हैं। डिजिटल प्रिंटिंग से साडि़यां और ड्रेस मैटेरियल तैयार कराए जा रहे हैं। बीएचयू से एमबीए करके पैतृक कारोबार संभालने वाले प्रदुम्न अग्रवाल स्कार्फ, स्टोल, शाल का एक्सपोर्ट करते हैं। चौक निवासी टेक्सटाइल्स का कारोबार संभालने वाले एक अन्य युवा उद्यमी वैभव शाह की मानें तो कंप्यूटर से डिजाइन तैयार करना आसान है। उसकी प्रिंटिंग भी सहजता से हो जाती है।
कोट:-
टेक्सटाइल डिजाइनिंग का कोर्स करने के बाद खरीदार की मांग और फैशन के ट्रेंड को समझने में आसानी होती है। ग्राहकों की मांग के अनुसार परिधान तैयार करने में दिक्कत नहीं होती।-पंकज शाह
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