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सुडि़या में सजा धन्वंतरि का दरबार

Varanasi

Updated Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। त्रिविध ताप से मुक्ति देने वाले भगवान धन्वंतरि के आगे हथेलियां पसार कर भक्तों ने रविवार को सुख-समृद्धि और निरोगी काया की प्रार्थना की। काशी में जगह-जगह धन्वंतरि के दरबार सजाए गए। सुडि़या स्थित धन्वंतरि निवास में तीन सौ साल पुरानी अष्टधातु की नयनाभिराम प्रतिमा का औषधीय पौधों से शृंगार किया गया। हिमाचल प्रदेश की पहाडि़यों के अलावा हिमालय और दिल्ली से फूल और वनस्पतियां मंगाई गई थीं।
दुर्लभ औषधि के निर्माण में काम आने वाले फूल आर्किड को हिमाचल प्रदेश से मंगाया गया। लिलियन, ग्लेडियोलस जैसे फूल दिल्ली और उत्तराखंड से आर्डर देकर मंगाए गए थे। दोपहर बाद राजवैद्य पं. शिव कुमार शास्त्री ने भगवान धन्वंतरि का षोडसोपचार पूजन किया। सविधि आरती के बाद शाम पांच बजे षष्ठपीठाधीश्वर श्याम मनोहर महाराज ने धन्वंतरि की शृंगार झांकी के पट खोले। इसी के साथ दर्शन-पूजन आरंभ हो गया। आईजी जीएल मीणा के अलावा तमाम आला अधिकारी दरबार में माथा टेकने पहुंचे थे। झांकी में भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा के दोनों तरफ सेविकाएं मोरपंखी डुलाते हुए दिखाई गई हैं। भगवान की झलक पाने के लिए सुडि़या में देर रात तक भक्तों का तांता लगा था। महिलाएं-बच्चे निरोगी काया की कामना लेकर दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे। नंद कुमार शास्त्री, समीर शास्त्री समेत वैद्यराज परिवार के अन्य सदस्य पूजन में शामिल हुए। इसी तरह, सुडि़या में ही मालवीय भवन में भगवान धन्वंतरि की जयंती पर सविधि पूजन के बाद मोहक शृंगार किया गया।

कोट
देश में मौजूदा समय गरीबी और दुराचार की बीमारी फैली है। मन की शुद्धता रखने के साथ ही और कड़ी मेहनत जब तक देश का हर नागरिक नहीं करेगा, तब तक इस बीमारी से छुटकारा नहीं मिल सकता। -राजवैद्य पं. शिव कुमार शास्त्री

इनसेट
धन्वंतरि कूप का जल लेने की मची होड़
वाराणसी। धन्वंतरि कूप का जल अमृत के समान कंठ से उतारने को तमाम पुरनिया आतुर थे। पेट की बीमारी से पीडि़त लोगों के अलावा तमाम वैद्य महामृत्युंजय महादेव मंदिर परिसर स्थित धन्वंतरि कूप का जल लेने पहुंचे। इस दिन कूप से लिए गए जल का इस्तेमाल औषधि के निर्माण में किया जाएगा। मान्यता है कि काशी के अधिपति के रूप में कभी दिवोदास ही धन्वंतरि के अवतार थे। काशी छोड़ते समय अपनी औषधियों को उन्होंने इसी कूप में डाल दिया था। तभी से लोग उस जल के प्रति आस्था रखते हैं।
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