आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

न्याय स्थापना का माध्यम बन सकता है विज्ञान

Varanasi

Updated Sun, 04 Nov 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी को समाज में न्याय की स्थापना का एक प्रभावी माध्यम बनाया जा सकता है। विकास के साथ सामाजिक मूल्याें में होने वाले परिवर्तनों के अनुरूप विधि में अपेक्षित परिवर्तन ही विधि सुधार कहलाता है। सुधार की प्रक्रिया में विधि अकेले ही समस्याआें का समाधान नहीं कर सकती। ये बातें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार ने ये कहीं। वे पं. मदनमोहन मालवीय की 150वीं जयंती वर्ष के आयोजनाें के क्रम में शनिवार को बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में आयोजित विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं विधि सुधार विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में संबोधित कर कर रहे थे।
उन्हाेंने कहा कि नवीन वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी तकनीकाें का उपयोग विकास और विनाश, हित और अहित, सुख और दुख दोनों के लिए किया जा सकता है। यदि इन तकनीकों के प्रभाव को विधिक उपायों के माध्यम से विनियमित और नियंत्रित करने की व्यवहारिक प्रणाली विकसित कर ली जाए तो इन विधि सुधाराें के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के नकारात्मक प्रभाव को समाप्त किया जा सकता है। विशिष्ट अतिथि इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश दिलीप गुप्ता ने कहा कि तीन दशकाें में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के तेज विकास का गहरा प्रभाव सामाजिक जीवन के प्रत्येक पहलुआें पर पड़ा है। विधि और विज्ञान दो ऐसे विषय हैं जिनका उद्देश्य है सत्य का अन्वेषण करना। उन्हाेंने कापीराइट, पेटेंट, साइबर ला, अंतरिक्ष विधि तथा इलेक्ट्रानिक साक्ष्य आदि में सुधाराें पर बल दिया। भारतीय विधि संस्थान नई दिल्ली के उपाध्यक्ष आरके मुंजाल ने कहा कि प्रौद्योगिकी के साथ विधिक विकास संबंधी समस्याओं को निश्चित करते समय यह विचार करना होगा कि कब और किस सीमा तक प्रौद्योगिकी विकास का प्रतिउत्तर विधि को देना चाहिए। गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. आरके मिश्र, जेएनयू के प्रो. एस भट्ट, प्रो. बीएन पांडेय, चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय पटना के कुलपति प्रो. ए लक्ष्मीनाथ, प्रो. वीसी निर्मल आदि ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता संकाय के पूर्व प्रमुख प्रो. एमपी सिंह ने की। छात्राें ने चित्र प्रदर्शनी लगाई। चित्र प्रदर्शनी अधिवक्ता के रूप में महामना के योगदान, बालश्रम, सूचना का अधिकार, दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, साइबर क्राइम, भ्रूण हत्या आदि पर आधारित थी।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

Bigg Boss : मनवीर से अंडे फुड़वाएंगे शाहरुख, सलमान हो जाएंगे हैरान

  • शनिवार, 21 जनवरी 2017
  • +

इन प्राकृतिक तरीकों से घर पर बनाएं ब्लीच, त्वचा को नहीं होगा नुकसान

  • शनिवार, 21 जनवरी 2017
  • +

सोई हुई लड़कियों को गंदे तरीके से उठाते हैं लड़के, देखिए जापान का अजीब गेम शो

  • शनिवार, 21 जनवरी 2017
  • +

सिक्योरिटी गार्ड के बेटे ने हासिल किया ऐसा मुकाम, पहली ही कोशिश में बना सीए

  • शनिवार, 21 जनवरी 2017
  • +

पीरियड्स के दौरान नहीं करने चाहिए ये काम, पड़ सकते हैं भारी

  • शनिवार, 21 जनवरी 2017
  • +

Most Read

शिवपाल समर्थकों ने बनाया नया संगठन, नाम जानकर हो जाएंगे हैरान

shivpal supporters created new organization
  • शनिवार, 21 जनवरी 2017
  • +

अखिलेश की सूची में कुछ नाम बदले, कुछ निरस्त, यहां देखें

correction in akhilesh yadav list
  • शुक्रवार, 20 जनवरी 2017
  • +

बोले राजा भइया- नहीं है गठबंधन की जरूरत, अकेले ही जीत लेंगे चुनाव

there is no need of alliance with congress
  • शुक्रवार, 20 जनवरी 2017
  • +

बीजेपी को झटका, पूर्व विधायक ने थामा अखिलेश का हाथ

shiv singh chak joins samajwadi party
  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +

टिकट बंटवारे को लेकर बीजेपी से नाराजगी पर आया स्वामी प्रसाद मौर्या का बयान

swami prasad maurya denies news of being unhappy due ticket distribution
  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +

...तो सीएम हरीश रावत इन दो सीटों से चुनाव में ठोकेंगे ताल?

harish rawat may contest in election from two seats
  • शनिवार, 21 जनवरी 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top