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जमानत पर मुक्त होंगे संप्रेक्षण गृह के बच्चे

Varanasi

Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
रामनगर। राजकीय संप्रेक्षण गृह में नियमों को ताक पर रखते हुए बच्चों को रखा गया है। इसका खुलासा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की कोर कमेटी के चेयरमैन डा. योगेश दूबे के निरीक्षण के दौरान हुआ। उन्होंने बच्चों को जल्द ही जमानत दिलाने का आश्वासन दिया। उन पर लगे आरोपों का विवरण तलब करते हुए उन्होंने कहा कि वह प्रदेश सरकार को इसके लिए पत्र लिखेंगे। उन्होंने बच्चों को प्यार से सहलाया। इतने में बच्चे गदगद हो गए और तनावमुक्त होकर शाम को मैदान में खेलते नजर आए।
भदोही, सोनभद्र और बनारस के दौरे पर आए डा. दूबे शुक्रवार को भदोही में जन सुनवाई में भाग लेने गए थे। अमर उजाला में प्रवेश कुमार कन्नौजिया नामक संवासी की आत्महत्या के बाद महिला कल्याण के निदेशक शिवश्याम मिश्रा की संवासियों से तीखे सवाल-जवाब की खबर पढ़ने के बाद वह सीधे रामनगर पहुंचे। लगभग आधे घंटे तक बंद कमरे में संवासियों से बातचीत की। उन्होंने बताया कि संप्रेक्षण गृह में कोई तीन दिन से तो कोई चार साल से बंद है। जूविनाइल जस्टिस के नियमों का सरासर उल्लंघन किया जा रहा है। जूविनाइल जस्टिस के तहत जमानत हर बच्चे का अधिकार है। केवल यदि उनकी जान को खतरा हो या उनसे किसी की जान को खतरा तो जमानत नहीं दी जा सकती है। संप्रेक्षण गृह में एक भी बच्चा इस श्रेणी का नहीं है। यदि किसी बच्चे को सजा होती तो उसे स्पेशल होम में रखा जाना चाहिए न कि संप्रेक्षण गृह में। यहां बनारस और विंध्य मंडल के सात जिलों के 79 बच्चों में से ज्यादातर अधिक दिनों से रखे गए हैं जबकि तीन साल से ज्यादा उनको यहां नहीं रखा जा सकता है। बच्चों को इस तरह कैद करने से उनमें अवसाद उत्पन्न हो रहा है और भविष्य में भी अनहोनी की आशंका है। उन्होंने शंभूनाथ रिसर्च फाउंडेशन के राजीव सिंह को बच्चों का पूरा विवरण तैयार कर भेजने को कहा। बाल अदालतें लगाकर बच्चों के मामलों का तेजी से निस्तारण करने के लिए वह प्रदेश सरकार को लिखेंगे। उनके आने की सूचना पर फिनायल आदि छिड़कवाया गया। इस पर वह भड़क गए और अधीक्षक प्रभात कुमार से कहा कि इसको जेल क्यों बना रखा है। गोरखपुर के बाल अधिकार कार्यकर्ता राजेश मणि भी उनके साथ रहे।
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