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दंड देने के लिए भगवान डंडा नहीं चलाते

Varanasi

Updated Thu, 11 Oct 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। हम सब ईश्वर के पुत्र हैं। अमृत पुत्र हैं। स्वयं को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने में संलग्न हो, प्रकाश से अंधकार की ओर नहीं...। हमारी किसी भी त्रुटि के लिए दंड देना होता है तो प्रभु डंडा नहीं चलाते। प्रभु बुद्धि पर परदा डाल देते हैं। मतिभ्रष्ट होते ही व्यक्ति स्वत: अपने विनाश के साधन-संसाधन जुटाने लगता है।
यह कहना है आचार्य सुधांशु महाराज का। बुधवार से टाउनहाल के मैदान में विश्व जागृति मिशन की स्थानीय इकाई के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय भक्ति सत्संग के उद्घाटन सत्र में उन्होंने कहा हमें प्रार्थना करनी चाहिए कि निरंतर जारी रहने वाली हमारी परीक्षाओं का अंत हो, पीड़ा की यात्रा को विराम मिले, हमारा मन संतुलित रहे, हृदय प्रेम से भरा हो, हम ज्ञान, बल, शौर्य और धन से परिपूर्ण हों। हमें लगन लगे तो सिर्फ तेरे चरणों की। सहज-सरल भाव में सभी को प्रार्थना में संलग्न करने के उपरांत आचार्यवर ने प्रथम सत्र में आगामी संपूर्ण आयोजन की भूमिका का निर्माण किया। यथार्थवादी उदाहरणों के माध्यम से जीवन के सत्य को समझने का समर्थन करने वाले आचार्य सुधांशु महाराज ने विदेशी लेखक कार्लाइल और एडिसन जैसे लोगों के नाम लिए। कार्लाइल की 14 वर्ष की मेहनत पर उसके दोस्त की गलती से पानी फिर गया मगर वह न रोया, न चीखा-चिल्लाया, जो गया उसे वापस ला भी नहीं सकता था लिहाजा फिर से लिखना शुरू किया। तब जो लिखा दुनिया ने पढ़ा। एडिसन के प्रयोग दर प्रयोग विफल होते गए। उसे क्या क्या दुश्वारियां नहीं झेलनी पड़ीं लेकिन उसने हार नहीं मानी। वह इसलिए नहीं हारा कि उसका मन नहीं हारा था। मन हार गया तो मनुष्य जीवन से हार जाता है।
इन्सेट
जब गुरु हों लेट शिष्य कैसे करें वेट
वाराणसी। विश्व जागृति मिशन की ओर से आयोजित पांच दिवसीय भक्ति सत्संग के उद्घाटन सत्र में शिष्यों की बेचैनी देखते ही बन रही थी। उद्घाटन सत्र पांच बजे से शुरू होना था। वे चार बजे ही आ गए थे। उन्हें पता था गुरुदेव समय के पाबंद हैं। हुआ इससे विपरीत। आचार्य सुधांशु जी महाराज एक घंटा तीन मिनट विलंब से पहुंचे। दूसरे जरूरी कामों के चलते मजबूरी में कुछ ऐसे भी शिष्य थे जो लेट हुए गुरुदेव का वेट नहीं कर सके। यही नहीं पंडाल में प्रवेश के लिए निर्धारित किए गए सभी स्थानों से आगतों को अपने चप्पल-जूते रखने अपने पास रखने के लिए काले रंग की पॉलीथिन वितरित की जा रही थी। पॉलीथिन फ्री काशी के समर्थन में अभियान चलाने वाले कुछ संगठनों के सदस्यों ने इसपर आपत्ति भी जताई।
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