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ऐसे तो ताकती रह जाएंगी शहरी छात्राएं

Varanasi

Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। कन्या विद्याधन योजना के लिए निर्धारित लक्ष्य और उसके सापेक्ष आवंटित धनराशि से साफ है कि 12 हजार छात्राओं को योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। इसमें भी छात्रा के परिवार की जो सकल आय निर्धारित है, उसमें शहरी छात्राओं का ही नुकसान ज्यादा है। कारण कि 35 हजार रुपये सकल आय से कम के परिवार शहरों की तुलना में गांवों में ही ज्यादा हैं।
वाराणसी की 2351 छात्राओं को ही योजना का लाभ मिलना है। इसके लिए शासन ने सात करोड़ पांच लाख 30 हजार रुपये आवंटित किया है। 20 सितंबर तक कुल 17 हजार 143 छात्राओं ने जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में आवेदन किया है। ऐसे में आवेदन पत्र के साथ जमा परिवार की सकल आय संबंधी प्रमाणपत्र के आधार पर नीचे से ऊपर की ओर चयन किया जाएगा। इस सूरत में ग्रामीण छात्राएं ही ज्यादा लाभान्वित होंगी। कारण गांवों में अगर मनरेगा मजदूरी करने वाले परिवार को ही लें तो नियम के तहत एक व्यक्ति को साल में सौ दिन का रोजगार मिलता है और मजदूर को रोजाना 125 रुपये। इन परिवारों की मनरेगा मजदूरी के हिसाब से आय होती है 12 हजार 500 रुपये। जिला विद्यालय निरीक्षक चंद्रजीत यादव बताते हैं आवेदन करने वाली छात्राओं से उनके पिता की प्रतिदिन की मजदूरी पूछने पर जवाब मिलता रहा 80 रुपये। इस लिहाज से 265 दिन का हुआ 21 हजार दो सौ रुपये। अब दोनों को जोड़ दें तो 33 हजार 700 रुपये होती है आय। इन्हें तो योजना का लाभ मिलेगा ही। शहरी क्षेत्र में राजगीर मिस्त्री को भी रोजाना मिलता है 300 रुपये। इस हिसाब से 365 दिन की आय होगी एक लाख नौ हजार पांच सौ रुपये। गारा मिट्टी ढोने वाले मजदूर को प्रतिदिन मिलते हैं 200 रुपये। उसकी सकल आय हुई 73 हजार रुपये। अब बचती है बर्तन मांजने वाली मजुर्नी, जो इस योजना का लाभ पाने की हकदार होगी। कारण अगर वह एक घर से क म से कम पांच सौ रुपये भी पाती है और पांच घरों में काम करना दर्शाते हुए आय का विवरण देती है तो उसकी सकल आय होगी 30 हजार रुपये। लोहता निवासी राजगीर धन्नी का कहना है कि हम बच्चियों को कैसे पढ़ा रहे हैं हम ही जानते हैं। सरकार ने एक योजना भी लागू की है तो उसका भी लाभ नहीं मिल पाएगा। यानी हमें तो शहरी गरीब होने का दंश झेलना होगा।
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