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मोमबत्ती के सहारे पढ़ाई को मजबूर दो सौ छात्राएं

Varanasi

Updated Sun, 23 Sep 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। विज्ञान एवं तकनीक के इस युग में जहां सारा संसार एक गांव का रूप ले चुका है और हम अंतरिक्ष में घर बसाने की योजना बना रहे हैं, वहीं जिले के दो कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की छात्राएं मोमबत्ती के सहारे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। चोलापुर और पिंडरा के इन विद्यालयों में प्रकाश की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। अंधाधुंध बिजली कटौती और अफसरों की लापरवाही के चलते पठन-पाठन बाधित हो रहा है।
चोलापुर और पिंडरा में 65-65 लाख की धनराशि से इसी साल कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का निर्माण हुआ। आननफानन बालिकाओं को अगस्त से नए भवन में शिफ्ट भी कर दिया गया लेकिन प्रकाश की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। दोनों स्कूलों में करीब दो सौ छात्राएं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बमुश्किल 3-4 घंटे ही बिजली मिलने के कारण छात्राओं को अंधेरे में रहना पड़ रहा है। इससे पढ़ाई बाधित होने के साथ ही कंप्यूटर पर भी छात्राएं काम नहीं कर पातीं। गर्मी और उमस में परेशान होती है सो अलग। इस समस्या से निबटने के लिए विद्यालय निर्माण के दौरान ही सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने को शासन 5.94 लाख रुपये जारी कर चुका है लेकिन जिम्मेदार अफसरों की लापरवाही के चलते अभी तक संयंत्र नहीं लगे। कस्तूरबा गांधी विद्यालय, पिंडरा की शिक्षिका सुधा और पूजा का कहना है कि छात्राओं के लिए किसी तरह प्रकाश कि व्यवस्था की जा जाती है।
ग्रामीण इलाका होने के चलते बिजली कम ही रहती है। ऐसे में मोमबत्ती के सहारे रात में पढ़ाई करते हैं। बिजली न होने से उमस और गर्मी से भी परेशानी होती है। -गुलशन वर्मा, कक्षा-8, पिंडरा।
बिजली नहीं होने से रात में पढ़ाई बाधित होती है। मोमबत्ती मिलती है तो रात में पढ़ते हैं, नहीं तो सो जाते हैं। -संजू यादव, कक्षा-8, पिंडरा

आमने-सामने
बालिकाओं को रात में प्रकाश मिले और उनकी पढ़ाई बाधित न हो इसके लिए नेडा को पैसा दे दिया गया है। सौर ऊर्जा संयंत्र से प्रकाश की व्यवस्था के अलावा सोलर वाटर हीटिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा ताकि जाड़े के मौसम में दिक्कत न हो।-परमहंस सिंह यादव, बीएसए।
संयंत्र जून तक लगाया जाना था लेकिन भवन निर्माण का काम पूरा नहीं होने के कारण काम रुका था। अब 15 अक्तूबर तक लगा दिया जाएगा।-राजमणि पांडेय, परियोजना अधिकारी (नेडा)।
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