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घुन बने बवाल-ए-जान

Varanasi

Updated Sat, 22 Sep 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। मंडुवाडीह स्थित भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदाम के आसपास के इलाकों में इतने घुन पैदा हो गए हैं कि लोगों का घर में रहना, सोना, खाना-पीना तक दुश्वार हो गया है। कई बार तो घुन बच्चों के कान में घुस जाते हैं। आसपास के दुकानदारों के व्यवसाय पर घुनों के चलते असर पड़ने लगा है। दक्षिणी ककरमत्ता, हसनपुर आदि कालोनियों के लोग कई बार एफसीआई के अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, मगर इस समस्या का कोई हल नहीं निकला। क्षेत्र की करीब 50 हजार की आबादी इस कदर परेशान है कि उसे कोई उपाय नहीं सूझ रहा।
क्षेत्रीय लोगों की मानें तो यह समस्या एफसीआई में सड़े-गले राशन रखने से उत्पन्न हुई है। मंडुवाडीह स्थित गोदाम का पिछला हिस्सा घनी आबादी से घिरा हुआ है। पांच किलोमीटर की परिधि में बने एफसीआई के भंडार गृह के पिछले हिस्से में रखे अप्रयोज्य राशन की साफ-सफाई भी नहीं होती। इसके चलते राशन के उन बोरों में बड़ी संख्या में घुन पैदा हो रहे हैं। ये घुन आसपास के गांव सहित कई कालोनियों को अपनी जद में ले चुके हैं। ये घुन जब उड़ते हैं तो आसपास के इलाकों के अलावा शहरी क्षेत्र के जेपिस नगर, श्यामा नगर, न्यू कालोनी, श्रीरामनगर कालोनी की ओर रुख कर लेते हैं। हालत किस कदर खराब है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि घुन कान में, बाल में, कपड़ों और भोजन तक में चले जाते हैं। बिस्तर पर छा जाते हैं। ककरमत्ता के मेराज जुग्गन फारुकी, न्यू कालोनी के दीपू यादव गुलाब और समझू की मानें तो घुन के चलते रात में नींद नहीं आती। धूप तेज में तो इनकी संख्या और बढ़ जाती है।

लोगों से बातचीत :
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कोई सामान किसी ग्राहक को दो तो वह उसमें घुन की शिकायत करता है। घुन के चलते कई दुकानदारों का धंधा चौपट हो रहा है। उसका कोई उपाय होना चाहिए।- लियाकत अली, दुकानदार, ककरमत्ता
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दिन-रात उड़ रहे घुनों के चलते बेहद परेशानी होती है। जब ये घुन बालों में घुस जाते हैं तो उन्हें निकाले बिना आप सो नहीं सकते।-राम अयोध्या प्रसाद, रिटायर्ड कर्मचारी, डीरेका
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घुनों ने नाक में दम कर रखा है। रास्ते में चलते वक्त ये आंखों में पड़ जाते हैं। इनके चलते सड़क पर सावधानीपूर्वक चलना पड़ता है। -राहुल कुशवाहा, दक्षिण ककरमत्ता
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खाना बनाकर रखते समय यदि उसे ढंकने में थोड़ी देर हो जाए तो उसमें घुन पड़ जाते हैं। फिर तो खाने से मन ही भटक जाता है। - ममता, उत्तरी ककरमत्ता
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