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विरोध के आगे झुका प्रशासन

Varanasi

Updated Tue, 11 Sep 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। गंगा से दो सौ मीटर के दायरे में चिह्नित अवैध निर्माणों को सोमवार को गिराने पहुंचे विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को कार्रवाई के बगैर लौटना पड़ा। इस बीच घाट पर करीब सवा घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान तनाव की स्थिति बनी रही।
न्यायालय के आदेश के अनुपालन के लिए प्राधिकरण ने चिह्नित 13 अवैध निर्माणों के खिलाफ 10 से 14 सितंबर तक ध्वस्तीकरण अभियान चलाने की घोषणा की थी। व्यापारी संगठनों ने इसका विरोध करने की चेतावनी दी थी। एसीएम द्वितीय श्रीप्रकाश और सीओ दशाश्वमेध प्रकाश स्वरूप पांडेय, प्राधिकरण के अपर सचिव अनिल भटनागर, संयुक्त सचिव सतीश मिश्रा, प्रशासन और पुलिस के अधिकारी फोर्स के साथ अपराह्न 1.15 बजे दशाश्वमेध घाट स्थित जल पुलिस थाने पहुंचे। उधर, प्राधिकरण का दस्ता पहुंचते ही चितरंजन पार्क के पास चल रही महापंचायत में मौजूद विधायक ज्योत्सना श्रीवास्तव, रवींद्र जायसवाल और अजय राय ने अधिकारियों के यहां बातचीत के लिए संदेश भेजवाया। अधिकारियों का कहना था कि वे न्यायालय के आदेश का अनुपालन करने आए हैं, जबकि विधायकों ने इसका विरोध किया। बात नहीं बनने पर तीनों विधायक यह कहते हुए दशाश्वमेध घाट की सीडि़यों पर ही धरने पर बैठ गए कि वे किसी भी सूरत में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं होने देंगे। इस बीच प्रदर्शनकारी काफी देर तक प्राधिकरण विरोधी नारे लगाते रहे। करीब एक घंटे बाद विधायकों ने प्राधिकरण के अधिकारियों को बातचीत के लिए फिर बुलवाया। इस बार भी बातचीत सफल नहीं हुई। विधायकों ने अधिकारियों के वापस लौटने तक धरना जारी रखने की घोषणा की। इसके कुछ देर बाद अधिकारी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई किए बगैर लौट गए। अधिकारियों के जाते ही धरना समाप्त हो गया।

वीडीए के खिलाफ गोलबंदी से डोमराज परिवार अलग
ध्वस्तीकरण के खिलाफ अंतिम संस्कार रोकने से इनकार
वाराणसी। काशी के डोमराज परिवार ने सोमवार को वीडीए के खिलाफ गोलबंदी से कदम पीछे खींच लिया। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार निर्वाध गति से चला। डोमराज परिवार ने स्पष्ट किया कि अंतिम संस्कार बंद करने या ध्वस्तीकरण के विरोध में सड़क पर उतरने की घोषणा उनकी ओर से नहीं की गई थी। दोनों घाटों पर अंतिम संस्कार रोकने की अफवाह भी खूब उड़ी लेकिन ऐसे लोगों की पहचान नहीं हो सकी। शव लेकर घाट पर पहुंचने वाले लोग इस बारे में जानकारी लेते देखे गए। कालू डोमराज परिवार समिति के अध्यक्ष नाटे चौधरी ने सुबह ही घाटों पर इत्तला भिजवा दी कि किसी भी दशा में अंतिम संस्कार बंद नहीं किया जाएगा। उन्होंने आंदोलन में शामिल होने का वादा नहीं किया है। समिति के उपाध्यक्ष बहादुर चौधरी ने भी इसकी पुष्टि की। हालांकि हरिश्चंद्र घाट पर इस परिवार से जुड़े गुप्ता चौधरी का मकान दो सौ मीटर के दायरे में आ रहा है। उन्हें नोटिस भी जारी किया गया है।

भवनों का एक ईंट भी नहीं खिसकने देंगे काशीवासी
कौटिल्य सोसाइटी की जांच कराने की मांग
वाराणसी। चितरंजन पार्क के बाहर सोमवार को व्यापारी और काशी की जनता की ओर से आयोजित महापंचायत में वक्ताओं ने कहा कि किसी भी हाल में एक भी ईंट को नहीं खिसकने दिया जाएगा। किसी भी घाटों का स्वरूप नहीं बदले जाने की बात भी कही। उनका कहना था कि घाटों के सभी मकान एक से एक सटे हुए हैं। एक मकान गिरने पर दूसरे मकान अपने आप गिर जाएंगे। महापंचायत में लोग ‘वीडीए प्रशासन मुर्दाबाद’ की नारेबाजी के साथ हर-हर महादेव, मां गंगा, मां अन्नपूर्णा के जयकारे लगाते रहे।
वक्ताओं ने कौटिल्य सोसाइटी की जांच कराने की पुरजोर मांग की। विधायक ज्योत्सना श्रीवास्तव, अजय राय ने कहा कि लोगों को गुमराह करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। जो संस्थाएं खुद गलत हैं, उनके खिलाफ काशी की जनता को खुद कार्रवाई करनी चाहिए। सभा में डा. दयाशंकर मिश्र, डा. रत्नाकर त्रिपाठी, शैलेंद्र सिंह, अजय प्रताप सिंह, अतुल मिश्रा, अनिल शर्मा, संजय सिंह डाक्टर, शंभूनाथ बाटुल, अब्दुल अंसारी , प्रेमनाथ मिश्रा, गोकुल शर्मा, संजीव सिंह बिल्लू, महेश झुनझुनवाला, रजनीश कन्नौजिया, शोभनाथ विश्वकर्मा समेत अन्य वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए। संचालन बागीश दत्त मिश्र ने किया। इसमें सामाजिक, व्यापारिक, राजनीतिक संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लिया।

वीडीए की टीम घाट पर पहुंची तो बंद हो गईं दुकानें
वाराणसी। घाटों पर बने होटल और भवनों को गिराने के लिए जैसे ही वीडीए दस्ता दशाश्वमेध घाट पर पहुंचा, व्यापारी आक्रोशित हो गए। व्यापारियों का एक दल गोदौलिया तक की दुकानें बंद करा दिया। दूसरा दल घाट पर उनका विरोध शुरू कर दिया। यहां तक की घाटों पर भीख मांगने वाले भी अपना बोरिया बिस्तर समेट कर चले गए। व्यापारियों ने चाय पान तक की दुकानें भी बंद करा दिया। समझौता होने के बाद सभी दुकानें खुलीं।
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