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गड्ढों में समा गई 15 करोड़ की सड़क

Varanasi

Updated Tue, 07 Aug 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। शहर की एक भी सड़क ऐसी नहीं है जिस पर आप सुकून से चंद कदम भी चल सकें। शहर की ज्यादातर सड़कों के रख-रखाव का जिम्मा लोक निर्माण विभाग और नगर निगम के पास है। फाइलों में तो सड़कें दुरुस्त हैं मगर मौके की तस्वीर इससे एकदम विपरीत है। दो साल पहले बनी थी चौकाघाट से पड़ाव तक की सड़क। चंद महीने के बाद ही सीवर पाइप लाइन बिछाने के लिए जल निगम ने उसे बुरी तरह खोद दिया। सरकार का 15 करोड़ रुपया गड्ढों में चला गया। इलाके के लोग सड़क की बदहाली से परेशान हैं। किनारे के मकानों में धूल का गुबार साफ देखा जा सकता है। कारोबारी ही नहीं इस सड़क पर चलने वाला हरेक शख्स परेशान है। अतिक्रमण और गंदगी ही अब इस सड़क की पहचान बन गई है।
मालूम हो कि 2008-09 में जिला योजना के तहत इस सड़क को बनाने का प्रस्ताव मंजूर हुआ था। 8.60 किलोमीटर लंबी इस सड़क के लिए लोक निर्माण विभाग को 13 करोड़ 45 लाख 28 हजार रुपये स्वीकृत हुए थे। काम शुरू तो समय पर हुआ मगर पूरा होने में देर हो गई। इस वजह से बजट बढ़कर 15 करोड़ रुपये पहुंच गया। डिवाइडर के साथ ही इस सड़क पर रिफ्लेक्टर भी लगना था। डिवाइडर तो बना मगर रिफ्लेक्टर किसी को नहीं दिखा। इस फोरलेन सड़क के दोनों ओर ढाई-ढाई मीटर की पटरी भी स्वीकृत थी, जो बनी ही नहीं।

इनसेट :
कैंट को मुगलसराय से जोड़ती है यह सड़क
कैंट से राजघाट और मुगलसराय जाने के लिए यह सीधा मार्ग है। चौबीसों घंटे इस सड़क पर छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन होता रहता है। वाराणसी सिटी और काशी रेलवे स्टेशन एवं रोडवेज का काशी डिपो भी इस सड़क से सीधे जुड़ा हुआ है। यह सड़क बुनकर बाहुल्य इलाकों से होकर गुजरती है। घनी आबादी के बीच होने के कारण इस सड़क पर आबादी का दबाव सबसे ज्यादा है। कारोबार की बात करें तो चौकाघाट और अलईपुर में बसों और ट्रकों की मरम्मत का पूर्वांचल का सबसे बड़ा सर्विस सेंटर हैं।


वर्जन- (फोटो सहित)
दो साल पहले ही सड़क बनी थी। अब सीवर पाइप लाइन के लिए उसे खोद दिया गया। जब पाइप लाइन बिछाना ही थी तो सड़क क्यों बनाई गई? यह पैसे की बर्बादी नहीं तो और क्या हैं? सरकार से यह पूछा जाना चाहिए कि उसे जनता के पैसे की बर्बादी का हक किसने दिया?-अंसार अंसारी, बुनकर, कमलगढ़हा

सड़क पर बडे़-बड़े गड्ढे हैं। बारिश में पानी भर जाता है। ऐसे में पैदल चलना खतरे से खाली नहीं रहता। दो पहिया वाहनों से भी चलना खतरनाक है। रिक्शे वाले तो इस सड़क पर चलना ही नहीं चाहते। महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है-अमिनुद्दीन, साड़ी कारोबरी, बकरिया कुंड

दो साल पहले ही आटो खरीदा था। चार बार उसकी सर्विस करा चुका हूं। दो बार बेयरिंग बदलवानी पड़ी। सॉकर भी जवाब दे चुका है। यह सब सड़क के खस्ताहाल होने के चलते है। वाहनों की आयु कम हो रही है। कमोबेश शहर की हरेक सड़क की यही तस्वीर है-संजय वर्मा, आटो चालक, अलईपुर

इस सड़क पर रिक्शे से चलना खतरे से खाली नहीं है। बड़े-बड़े रोड़े की वजह से कई दफा रिक्शा पलटते -पलटते बचा। मेरे फैमिली डाक्टर अलईपुर में रहते हैं। इस वजह से मुझे इस सड़क पर आना पड़ता है। मजबूरी न होती तो इधर कतई न आती-मनोरमा मिश्रा, छात्रा

चौकाघाट से पड़ाव तक की सड़क की गुणवत्ता को लेकर हमें कुछ नहीं कहना है। इतना ही कह सकता हूं कि सड़क निर्माण में सभी मानकों का ख्याल रखा गया। गुणवत्ता जांच में यह सड़क खरी उतरी है। दो साल बाद ही क्यों सड़क खोद दी गई, यह बता पाने में मैं फिलहाल असमर्थ हूं। फाइलों को देखने के बाद ही इस बारे में सही जानकारी दे पाऊंगा-राकेश राजवंशी, अधीक्षण अभियंता, लोक निर्माण विभाग
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