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सियासी शतरंजी चाल में प्रशासन को मात

Varanasi

Updated Fri, 29 Jun 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। दे छापामारी दर छापामारी की स्थानीय प्रशासन ने। अंतिम दम तक वे इस प्रयास में रहे कि किसी भी तरह जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा ही न होने पाए। जिन लोगों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किया है वे जिला पंचायत कार्यालय के सभागार तक पहुंच न पाएं, लेकिन सियासत की शतरंजी चाल में में प्रशासन के सारे प्यादे खड़े ही रहे और सकलडीहा के निर्दल विधायक सुशील के भाई सुजीत की अगुवाई वाली टीम मात देने में सफल हो गई।
जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव संबंधी नोटिस पर हस्ताक्षर करने वाले सदस्यों के घरों पर मंगलवार की रात से जो छापेमारी शुरू हुई वह गुरुवार को दिन में साढ़े दस बजे तक जारी रही। गुरुवार को भोर में तीन बजे चौबेपुर के जाल्हूपर में रहने वाली एक महिला सदस्य को पुलिस ने उठाया। फिर मिर्जामुराद की रहने वाली एक महिला सदस्य को रोडवेज क्षेत्र में घर में जबरन तब तक रोके रखा गया जब तक वह मतदान में शामिल न होने के लिए राजी नहीं हो गईं। इसके लिए मिर्जामुराद के थानाध्यक्ष अमित कुमार अपना इलाका छोड़कर रोडवेज के समीप सोनकर बस्ती में सुबह ही डेरा डाल दिए थे। यह मकान एक अधिवक्ता का बताया जाता है। रास्ते में वज्र वाहन को खड़ा किया गया था। पूछने पर थानाध्यक्ष ने बताया कि वह अपने करीबी अधिवक्ता से मिलने आए हैं। कोई और वजह नहीं है। महिला के एक वाहन में बैठकर जाने के बाद ही पुलिस का पहरा वहां से खत्म हुआ। बताया जाता है कि यह वाहन अविश्वास प्रस्ताव के विरोधी गुट की ओर से भेजा गया था। इसी प्रकार कैंटोंनमेंट स्थित एक होटल में कुछ सदस्यों को नजरबंद किया गया था। उधर, कचहरी परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। पुलिस प्रशासन की चाल थी कि जिन सदस्यों तक वे नहीं पहुंच पाए हैं अगर वे पंचायत कार्यालय तक आते भी हैं तो उन्हें रोक लिया जाएगा। आलम यह था कि कचहरी और कलेक्ट्रेट परिसर के गेट पर खड़े पुलिसकमी हर आने वालों से कारण पूछ रहे थे। बड़ागांव के एक सदस्य को घेरने के लिए पुलिस ने बुधवार को ही उसके परिवार के सदस्य को उठा लिया था।
इन सबके बावजूद पुलिस के चक्रव्यूह को तोड़ते हुए 20 सदस्य विभिन्न गाडि़यों से कचहरी के समीप उतरे और पुलिस चौकी के सामने वाले रास्ते से अधिवक्ता अजय सिंह की चौकी पर पहुंच गए। यहां अधिवक्ताओं की टोली ने उनको जिला पंचायत कार्यालय तक पहुंचाया। इस रणनीति की भनक पुलिस को नहीं लग सकी। हालांकि, पुलिस ने इस पूरे प्रकरण में चुप्पी साध रखी है। चर्चा यह भी रही कि अविश्वास प्रस्ताव की अगुवाई कर रहे सुजीत सिंह के समर्थक 23 जिला पंचायत सदस्य घूमने के लिए देहरादून गए थे लेकिन चर्चा फैलाई गई कि वे काठमांडू गए हैं। लौटते समय तीन सदस्य रास्ते में उतर गए। तीनों को पुलिस ने नजरबंद कर लिया। बतादें कि मंगलवार को विधायक सुशील सिंह के कपसेठी स्थित आवास सहित कई पंचायत सदस्यों के घर पुलिस ने छापेमारी की थी। इसको लेकर प्रशासन पर उंगली भी उठने लगी थी। विधायक के भाई सुजीत सिंह की ओर से इस पुलिसिया कार्रवाई की मानवाधिकार आयोग से शिकायत भी की गई थी।

कुर्सी पर 17 महीने भी काबिज नहीं रह पाए मधुकर
वाराणसी (ब्यूरो)। सत्रह महीने पहले मधुकर मौर्य निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष जरूर बने पर उस वक्त भी कम खेल नहीं हुआ था। तब भी सुजीत ने दावेदारी की थी, लेकिन अंतिम समय में ऐसी घेरेबंदी हुई कि वह पर्चा दाखिल करने कचहरी नहीं पहुंच सके। ऐसे में मधुकर निर्विरोध निर्वाचित हो गए। लेकिन सत्ता परिवर्तन के साथ ही पूर्वांचल में जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की बयार चली वह बनारस तक आई और वह उसी में उड़ गए। मधुकर ने 14 जनवरी 2011 को शपथ ली थी। मधुकर के खिलाफ विरोध की सुगबुगाहट विधानसभा चुनाव के तत्काल बाद शुरू हो गई। मई महीने में ही 26 सदस्यों ने अध्यक्ष पर भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी के यहां शिकायत की थी। इसके बाद छह जून को 23 सदस्यों ने जिलाधिकारी को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था।
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