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भगवानपुर से संकटमोचन तक हाहाकार

Varanasi

Updated Thu, 14 Jun 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। बीएचयू 33 केवी उपकेंद्र के जलने से भगवानपुर से संकटमोचन के बीच की दो दर्जन से ज्यादा बस्तियों में बिजली-पानी के लिए हाहाकार मचा रहा। सारी रात लोग सो नहीं पाए। सुबह तमाम मुहल्लों में जलापूर्ति नहीं होने से संकट और गहरा गया। कई मुहल्लों के लोग अगल-बगल के इलाकों में परिचितों के यहां चले गए। इलाके के इक्का-दुक्का हैंडपंपों पर पानी के लिए मारामारी की स्थिति रही। नर्सिगिं होम और अस्पतालों में जेनरेटर के सहारे आवश्यक सेवाएं बहाल की गईं लेकिन संचालक दिन भर परेशान रहे। शाम को तीन बजे के करीब विभाग ने उपकेंद्र को चालू किया तो लोगों को राहत मिली।
आग लगने के बाद बीएचयू उपकेंद्र पूरी तरह ठप हो गया था। रात में कुछ मुहल्लों को कबीरनगर एवं महामनापुरी और उससे सटे इलाकों को करौंदी उपकेंद्र से जोड़ दिया गय। नगवां के कुछ इलाकों को सुंदरपुर फीडर से जोड़ कर आपूर्ति बहाल की गई। भगवानपुर, सरायनंदन, संकटमोचन और लंका फीडरों को दूसरे उपकेंद्रों से जोड़ना संभव नहीं था। इससे भगवानपुर, सामनेघाट, लंका, शिवमनगर कालोनी, नरिया, कौशलेशनगर, इंदिरा नगर, सरायनंदन, दशमी, साकेतनगर आदि दो दर्जन से ज्यादा कालोनियों में अंधेरा छाया रहा। भीषण गर्मी में बिजली नहीं मिलने से लोग रात में सो नहीं पाए। सुबह इनमें से कई मुहल्लों में एक बूंद पानी नहीं आया। संकट की घड़ी में पड़ोसी क्षेत्रों के लोगों ने मदद की। ब्रिज इंक्लेव की पानी टंकी से दशमी और सरायनंदन के कुछ इलाकों में जलापूर्ति हुई तो लोगों ने पड़ोसियों को भी जरूरत भर जल मुहैया कराया। मगर कृष्णदेवनगर का नलकूप नहीं चला और वहां पानी का गंभीर संकट बना रहा। सामनेघाट और भगवानपुर के लोग स्नान आदि के लिए गंगा से ढोकर जल लाते रहे। सरायनंदन, दशमी और लंका में रहने वाले तमाम लोग खोजवां, नेवादा आदि समीपवर्ती मुहल्लों में रहने वाले रिश्तेदारों और परिचितों के घर सुबह पानी की तलाश में पहुंचे और वहीं दोपहरी काटी। पूरे इलाके में सरकारी हैंडपंपों की बहुत कमी है। नरिया में लगे हैंडपंप पर सुबह पानी के लिए मारामारी की नौैबत थी। दिन भर लोग यहां से पानी ढोते रहे। नरिया के रोहित नगर में लोगों ने प्रयास करके जल संस्थान का टैंकर मंगवाया।
इलाके में 20 से ज्यादा छोटे-बड़े अस्पताल हैं। सिंगल जेनरेटर वाले नर्सिगिं होम में डीजल बदलने के लिए उसे बंद भी करना पड़ा। इससे परेशानी हुई। हेरिटेज हास्पिटल के जनसंपर्क अधिकारी अजय राय ने बताया कि जेनरेटर से ही वेटिंलेटर जैसी तमाम मशीनों को दिन भर चलाना पड़ा। कई दिनों तक यह संभव नहीं हो पाता। इलाके में जेनरेटरों को शोर से भी परेशानी बढ़ गई थी। कुछ आइसक्रीम विक्रेताओं को नुकसान भी उठाना पड़ा।
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दिन भर लगे रहे अफसर तब बना काम
शाम को बहाल हुई उपकेंद्र से आपूर्ति
वाराणसी। बीएचयू 33 केवी उपकेंद्र में आग लगने से 10 एमवीए के दो ट्रांसफार्मर पूरी तरह से जल गए हैं। तीसरा ट्रांसफार्मर किसी तरह बचाया जा सका लेकिन आग की चपेट में आकर उसके वायरिंग की केबिल, करेंट ट्रांसफार्मर (सीटी), पोटेेंशियल ट्रांसफार्मर (पीटी), लाइटिनिंग डायरेक्टर सब नष्ट हो गए थे। सब कुछ बदल कर शाम तीन बजे आपूर्ति बहाल की गई। पर इकलौते 10 एमवीए के ट्रांसफार्मर पर पूरे इलाके का लोड डालना संभव नहीं था। शाम तक एक फीडर को काटा जाता रहा जबकि पीक आवर में दो-दो फीडर बंद करके आपूर्ति दी गई। उपकेंद्र को कटौती से मुक्त कर दिया गया है। नए ट्रांसफार्मरोें के गुरुवार तक पहुंचने की उम्मीद है।
आमतौर पर शहर की कटौती होने पर 132 केवी उपकेंद्र से 33 केवी सब स्टेशनों की आपूर्ति बंद कर दी जाती है। बीएचयू 33 केवी उपकेंद्र पर कुछ ऐसे फीडर हैं जो कटते नहीं है। उनको चलाने के लिए यहां लगातार आपूर्ति होती है। मंगलवार की रात को सवा आठ बजे कटौती के दौरान उपकेंद्र पर 39 केवी विद्युत आपूर्ति होने लगी थी, जिसके चलते आग लग गई। आग सन् 1989 में लगे सबसे पुराने ट्रांसफार्मर में लगी। उसकी चपेट में तीनों ट्रांसफार्मर आ गए। दमकलों के प्रयास से तीसरे को बचा लिया गया था लेकिन उसका प्रोटेक्शन सिस्टम, केबिल और एक तरफ का पेंट आदि जल गए थे। सुबह दो घंटे फायर ब्रिगेड का फोम हटाने और टेस्टिंग में लग गए। उसके बाद मरम्मत का काम शुरू हुआ। प्रबंध निदेशक कार्यालय के स्टाफ अफसर एसपी त्रिपाठी, नगरीय विद्युत वितरण मंडल प्रथम के अधीक्षण अभियंता एके दूबे की देखरेख में केबिल आदि की मरम्मत कर तीन बजे उसे चालू किया गया। करौंदी और कबीरनगर में नया उपकेंद्र बन जाने के कारण बीएचयू का 40 फीसदी लोड इन पर डाल दिया गया था। बचे हुए 60 फीसदी में से 20 प्रतिशत से ज्यादा भार अधिकारियों ने दोनों उपकेंद्रों और भिखारीपुर के सुंदरपुर फीडर पर डाल दिया। ऐसे में शाम को उपकेंद्र चालू होने पर महज एक ही फीडर काटना पड़ रहा था। शाम सात बजे के बाद दो-दो फीडरों को रोस्टरिंग कर चलाया जाता रहा। अधिकारियों ने बताया कि आजमगढ़ और जौनपुर से ट्रांसफार्मर लेकर वाहन देर शाम चल चुका था। दिल्ली से भी दो ट्रांसफार्मर मंगाए गए हैं। उनमें से एक रोहनिया में लगाया जाएगा।
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