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किसी को भौतिक, रसायन ने मारा तो किसी को अंग्रेजी ने

Varanasi

Updated Tue, 29 May 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। निजी स्कूलों में अच्छी पढ़ाई होती है और सरकारी विद्यालयों में अध्यापक विद्यार्थियों पर ध्यान नहीं देते। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के बारहवीं के नतीजों ने इस मिथक को तगड़ा झटका दिया है। सरकारी विद्यालयों के नतीजे निजी स्कूलों की तुलना में कहीं बेहतर रहे। वहां के विद्यार्थियों को अंग्रेजी ने जरूर कुछ झटका दिया है। प्राइवेट स्कूलों के परीक्षार्थियों को भौतिक और रसायन विज्ञान की मार झेलनी पड़ी है।
शीर्ष तीन स्थानों में तीसरे नंबर पर केंद्रीय विद्यालय बीएचयू की छात्रा एस माधवी रही। यहां के 124 में 117 विद्यार्थी सफल रहे। पास प्रतिशत 94.4 रहा। केंद्रीय विद्यालय डीरेका में सुनील कुमार ने 96 फीसदी अंक हासिल किए। यहां से 86 फीसदी छात्रों ने परीक्षा में सफलता हासिल की। सेंट्रल हिंदू स्कूल की ब्वायज शाखा का परीक्षाफल 96 फीसदी रहा है। यहां के आठ विद्यार्थियों ने 90 फीसदी से ऊपर अंक हासिल किए हैं। सेंट्रल हिंदू गर्ल्स कालेज में 234 छात्राओं ने परीक्षा दी थी। इसमें से 221 सफल हुईं। विज्ञान वर्ग में मेधा अग्रवाल ने सर्वाधिक 94.2 और कला वर्ग में अलका नेहाल ने 93.2 फीसदी अंक हासिल किए। विद्यालय की दो छात्राओं ने 94 फीसदी नंबर प्राप्त किए हैं। केंद्रीय विद्यालय 39 जीटीसी के 91.4 प्रतिशत विद्यार्थी सफल रहे। अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में सनबीम स्कूल समूह, डालिम्स, सनबीम एकेडमी के नतीजे तो बेहतर रहे लेकिन अन्य विद्यालयों स्थिति ज्यादा बेहतर नहीं रही। डीपीएस में लगभग 79 प्रतिशत विद्यार्थियों ने ही सफलता हासिल की है। अन्य विद्यालयों के नतीजे भी 90 फीसदी से कम ही रहे। इस लिहाज से सरकारी स्कूलों ने बेहतर परिणाम दिए। सीएचएस के प्रधानाचार्य एनके शाही के मुताबिक, सर्वाधिक 92.6 फीसदी अंक पाने वाले जितेंद्र कुमार का प्रतिशत अंग्रेजी में कम अंक आने की वजह से घट गया। ज्यादातर सरकारी स्कूलों के परीक्षार्थियों को अंग्रेजी ने मात दी है। सनबीम समूह के अध्यक्ष दीपक मधोक ने बताया कि जिले में 70 के करीब स्कूल हैं। उनमें से कुछ के पास प्रतिशत 95 फीसदी से ऊपर हैं जबकि कुछ के उससे बहुत नीचे। भौतिक और रसायन विज्ञान में आमतौर पर कम अंक मिले हैं। दोनों विषयों ने विद्यार्थियों के झटका दिया है। डालिम्स समूह के प्रदीप मधोक बाबा ने भी बताया कि रसायन विज्ञान में अपेक्षाकृत कम अंक मिले हैं।
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