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बीएचयू समाज शास्त्र विभाग के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. एसके श्रीवास्तव का तिरोधान

Varanasi

Updated Thu, 17 May 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र कुमार श्रीवास्तव का बुधवार की सुबह निधन हो गया। वह 85 वर्ष के थे। उनकी अंत्येष्टि हरिश्चंद्र घाट स्थित विद्युत शवदाह गृह में की गई। पौत्र आकाश ने मुखाग्नि दी। ऐसा उनकी इच्छानुसार किया गया। शवयात्रा में विश्वविद्यालय के समाजशास्त्री और अन्य विद्वतजन शामिल हुए। उनके परिवार में तीन पुत्रियां, दामाद और नाती पौत्रियां हैं।
प्रो. श्रीवास्तव भारतीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय ख्याति के समाजशास्त्री रहे। स्नातकोत्तर और पीएचडी की डिग्री उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से हासिल की, फिर उच्चस्तरीय शिक्षा के लिए अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय चले गए। 1956-62 तक वह आगरा विश्वविद्यालय में रहे। 1963-64 में जोधपुर विश्वविद्यालय की स्थापना के समय बतौर रीडर नियुक्त हुए। 1965 में महामना मदन मोहन मालवीय के आग्रह पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय आए तो समाज शास्त्र विभाग जो तब राजनीति शास्त्र विभाग का अंग था, उसे अलग विभाग बनवाया। यहीं से वह 1989 में अवकाश ग्रहण कि ए। मालवीय प्रोफेसर के रूप में बीएचयू में कार्यरत रहे। हाल के दिनों में मालवीय हेरिटेज के लिए उन्हाेंने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उनके निधन से देश भर के समाजशास्त्रियों में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने परिजनों से इच्छा जताई थी कि मृत्यु के उपरांत उनकी अंत्येष्टि विद्युत शवदाहगृह में ही हो। कुछ वर्ष पूर्व उन्होंने अपनी पत्नी की भी अंत्येष्टि विद्युत शवदाह गृह में ही की थी, जिसका कई लोगाें ने विरोध किया और शवयात्रा में शामिल नहीं हुए। उस समय उन्होंने मानव कल्याणार्थ, पर्यावरण संरक्षण और अनावश्यक व्यय की बात कह लोगों को निरुत्तर कर दिया था। उनका मानना था कि ऐसा करने से शवों से होने वाले प्रदूषण से मां गंगा को बचाया जा सकता है। वैसे भी कमजोर वर्ग के व्यक्ति जहां अंतिम क्रिया करें वहां सबल लोगाें को अंत्येष्टि कर कमजोर लोगों का मन बढ़ाना चाहिए।
बुधवार की शाम नंद नगर करौंदी से निकली प्रो. श्रीवास्तव की शवयात्रा में विभागाध्यक्ष प्रो. जयकांत तिवारी, प्रो. विश्वनाथ पांडेय, प्रो. पीएन पांडेय, प्रो. अशोक कौल, प्रो. रामप्रवेश पाठक, प्रो. सोहन राम, प्रो. नारायणन, आईआरडीपी के डा. एके त्रिपाठी, प्रो. अरविंद कायस्थ, प्रो. एके श्रीवास्तव, प्रो. अरविंद जोशी आदि शामिल थे। इसके अलावा बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. वाईसी शिमाद्री, यूनेस्को के प्रोफेसर योगेश अटल, अंबेडकर इंस्टीट्यूट महाराष्ट्र के निदेशक नंदू राम, आल इंडिया सोशियोलाजिकल सोसाइटी के अध्यक्ष ईश्वर मोदी आदि ने शोक संदेश भेजे। वहीं पूर्व रजिस्ट्रार प्रो. आरपी सिन्हा, वाराणसी विकास समिति के अध्यक्ष आरके चौधरी समेत शहर के गणमान्य लोगाें ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।


प्रोफाइल
नाम : प्रो. सुरेंद्र कुमार श्रीवास्तव, जन्म सीतापुर के तेतेपुर गांव में 01 जून 1928 को। प्रारंभिक शिक्षा महमूदाबाद सीतापुर में। स्नातक. स्नातकोत्तर और पीएचडी लखनऊ विश्वविद्यालय।
विश्वस्तरीय समाजशास्त्री थे प्रो. एसके श्रीवास्तव
प्रो. एसके श्रीवास्तव भारतीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के समाज शास्त्री थे। 1947 में वह अमेरिका गए और प्रख्यात समाज शास्त्री प्रो. सोरोकिन और प्रो. पारसंस के निर्देशन में शोध किया। उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में समाज शास्त्र विभाग की स्थापना की। थारु जनजाति पर उनका विशेष अध्ययन रहा। इसी पर शोध किया, इस शोध प्रबंध ने जब पुस्तक का आकार लिया तो उस पर डा. संपूर्णानंद जी ने आमुख लिखा। आधुनिक ीकरण पर भी उन्होंने खास काम किया। वह मालवीय प्रोफेसर आफ सोसियोजिस्ट थे। मेरे घनिष्ठ लोगों में थे, उनके निधन से मेरी व्यक्तिगत क्षति हुई है जो कभी पूरी नहीं होगी। मेरे महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में रहते वे अक्सर या तो विद्यापीठ आते या मुझे बीएचयू बुला लेते। समाज शास्त्र के विकास और नवीन शोध पर अक्सर विचार विमर्श करते रहे। -सेवानिवृत्त प्रो. बंशीधर त्रिपाठी


शिक्षा के सतत विकाश के लिए आजीवन संघर्षशील रहे
प्रो. सुरेंद्र कुमार श्रीवास्तव काशी हिंदू विश्वविद्यालय के समाज शास्त्र विभाग के संस्थापक अध्यक्ष रहे। उन्हीं के प्रयास से 1962 में वह विश्वविद्यालय में आए और 1966 में विभाग को राजनीति शास्त्र विभाग से अलग कर नया कलेवर दिया। उन्हीं की पहल पर विभाग के संस्थापना समारोह में विजया लक्ष्मी पंडित, विख्यात समाज शास्त्री प्रो. श्यामाचरण दुबे, प्रो. राधा कमल मुखर्जी जैसी शख्सियत शामिल हुईं। उन्होंने वह लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र रहे, वहंीं से वह हावर्ड विश्वविद्यालय में शोध क रने गए जहां प्रो.सोरोकिन और प्रो. पारसंस के निर्देशन में काम किया। फिर स्वदेश लौटने पर लखनऊ विश्वविद्यालय में अध्यापन शुरू किया। जोधपुर विश्वविद्यालय के संस्थापकों में से एक थे। मेरे जैसे लोग 1969 में उन्हीं की कृपा से आए। विभाग के विकास के लिए वह सतत प्रयत्नशील रहे। बीएचयू एकेडमिक काउंसिल के सदस्य के रूप में शिक्षा के विकास के लिए नए-नए सुझाव दिए। उनका ऐसा व्यक्तित्व था कि विश्वविद्यालय के हर विभाग और संस्थान के लोगों के बीच सम्मानीय रहे। कभी भी शिक्षा के मुद्दे पर किसी से समझौता नहीं किया। उनके निधन से एक युग का अंत हो गया। प्रो. पीएन पांडेय, पूर्व विभागाध्यक्ष समाज शास्त्र विभाग बीएचयू

प्रगतिशील विचारक और विख्यात समाजशास्त्री थे
प्रो. एसके श्रीवास्तव का व्यक्तित्व काफी ऊंचा रहा। समाज शास्त्र के योगदान को देखते हुए ही इंडियन सोसियोलाजिकल सोसाइटी ने उन्हें 2011 में लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड से नवाजा। वह प्रगतिशील विचारक और अंतरराष्ट्रीय स्तर के समाजशास्त्री रहे। बीएचयू में समाज शास्त्र विभाग के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में उन्होंने ऐसे लोगों को जोड़ा जिससे काशी में रह कर समाज शास्त्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर का शोध हो सके। उन्होेंने जितनी भी नियुक्तियां कीं वे सभी आधार स्तंभ रहे। 1970 के पूवार्ध में उन्होंने वैचारिक मतभेद के चलते न केवल समाज शास्त्र विभाग के अध्यक्ष बल्कि विश्वविद्यालय की नौकरी से त्यागपत्र भी दिया पर उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया। उनके जाना मेेरी व्यक्तिगत क्षति है।-प्रो. मनजीत चतुर्वेदी, पूर्व विभागाध्यक्ष समाज शास्त्र विभाग बीएचयू


ढह गया समाजशास्त्री स्तंभ
प्रो. एसके श्रीवास्तव अंतरराष्ट्रीय ख्याति के समाज शास्त्री रहे। हारवर्ड यूविर्सिटी से शिक्षा ग्रहण करने वाले अत्यंत सरल व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति थे। बीएचयू के अलावा वह लाल बहादुर शास्त्री एकेडमी आफ एडमिनिस्ट्रेशन मंसूरी में भी प्रोफेसर रहे। उनके निधन से समाजशास्त्र जगत का स्तंभ ही ढह गया। हम लोगों को तो ऐसा लग रहा कि विभाग पर से पिता की छाया ही समाप्त हो गई। उनकी कमी को कभी दूर नहीं किया जा सकता। -प्रो. अरविंद जोशी, समाज शास्त्र विभाग काशी हिंदू विश्वविद्यालय

वर्तमान भारतीय समाजशास्त्रियों में अग्रणी रहे
प्रो.एसके श्रीवास्तव के निधन से जो अपूरणीय क्षति हुई है उसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं। उन्होंने समाज शास्त्र को नईं ऊंचाइयां प्रदान कीं। शोध के क्षेत्र में 60 के दशक में होने वाले आधुनिकता अभिमुख परिवर्तनों को नया आयाम दिया। भारत विद्या अभिगम तथा समाज के द्वंद्ववादी नजरिए से शोध पर विशेष ध्यान दिया। उत्तर प्रदेश समाजशास्त्र परिषद और आल इंडिया सोसियोलाजिकल सोसाइटी के सदस्य के रूप में समाज शास्त्र को राष्ट्रीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय पैमाने परअन्य सामाजिक विज्ञान विषय की तुलना में महत्व दिलाया।1989 में बीएचयू से सेवानिवृत्त होने के बाद भी चिंतन, विचार और लेखनी से सामाजिक समस्याओं की नई चुनौतियों पर शोध व लेखन जारी रखा। -प्रो. रविप्रकाश पांडेय समाज शास्त्र विभाग महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ
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