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आखिर कैसे निर्मल हों गंगा

Varanasi

Updated Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। गंगा निर्मलीकरण योजना को लागू हुए ढाई दशक से ज्यादा का समय गुजर गया। अरबों रुपये मां जाह्नवी की धारा में बह गए पर पतित पावनी की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। आलम यह कि अस्सी नाला, भदैनी, कोनिया, खिड़किया घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट, राजा घाट, मानसरोवर घाट और भैंसासुर घाट से सीधे गंगा में जा रहा है गंदा पानी। इन सभी जगहों पर पंपिंग स्टेशन बने हैं। इसके अलावा 19 ऐसे स्थान हैं जहां से सीवर का पानी वरुणा के रास्ते गंगा में जाता है। ये किसी के अनुमान नहंीं बल्कि सरकारी रिकार्ड में दर्ज आंकड़े हैं। कहने को गंगा कार्ययोजना के तहत तीन एसटीपी भी हैं लेकिन उससे काम नहीं चल पा रहा। अभी तीन और एसटीपी प्रस्तावित हैं जिन पर अब तक काम शुरू ही नहीं हो सका।
मजेदार तो यह कि कुछ दिनों पहले तक राजेंद्र प्रसाद घाट पर सीवर का काला, बदबूदार गंदा पानी पूरे वेग से गंगा में गिरता था। ऐसा नहीं कि यह अब बंद हो गया है, बल्कि नाले को लोगों की नजरों से छिपा दिया गया है। एक विभागीय अधिकारी कहते हैं कि यह सबकी नजर में आता था इसलिए इसे बंद कर दिया गया है। इस तरह सरकारी आंकड़ों के मुताबिक शहर से निकलने वाले 310 एमएलडी सीवेज में से 208 एमएलडी परोक्ष व प्रत्यक्ष तरीके से सीधे गंगा में जाकर मिल रहा है। इसमें वरुणा के रास्ते गंगा में आने वाले सीवेज की मात्रा 100 एमएलडी है। सरकारी आंकड़ों की ही मानें तो अस्सी से कोनिया तक जब गंदा पानी गंगा में जा रहा है तो आखिर बचा क्या। ये आंकड़े यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि गंगा का जल काशी में कहीं भी आचमन योग्य भी नहीं रह गया है। फिर भी लोग आस्था के चलते स्नान भी करते हैं और पूजन-अर्चन भी।
बता दें कि जून 1986 में गंगा को प्रदूषणमुक्त करने के लिए गंगा एक्शन प्लान की शुरुआत हुई थी। योजनाएं दर योजनाएं अस्तित्व में आती गईं और गंगा की निर्मलता कलुषित होती रही। अब गंगा में गंदा पानी न गिरे इसके लिए सथवां, दीनापुर और रमना में एसटीपी प्रस्तावित है पर यह कागज पर ही बन बिगड़ रहा है। अब एक और पहल की गई है। इसके तहत गंगा को निर्मल बनाने के लिए करीब 1630 करोड़ रुपये की अलग-अलग योजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें से कुछ पर काम चल रहा है और कुछ फिलहाल कागजी औपचारिकताओं में उलझी हुई हैं। हालत इतने बदतर हैं कि गंगा निर्मलीकरण के नाम पर पूरे शहर को खोद दिया गया है।

स्वीकृत एवं प्रस्तावित योजनाएं
-गंदे पानी को गंगा में जाने से रोकने के लिए जेएनएनआरयूएम से 191 करोड़ की योजना
- 623 करोड़ लागत की योजना राष्ट्रीय नदी गंगा बेसिन अथारिटी के विचारार्थ

प्रस्तावित एसटीपी
सथवां, दीनापुर और रमना
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