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बैंकों में ठनठन गोपाल, लोगों में उबाल

अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव

Updated Thu, 01 Dec 2016 12:26 AM IST
Banks, cashless, people boil

बैंक में लेनदेन करते ग्राहकPC: अमर उजाला ब्यूरो

करीब एक घंटे तक सभी कर्मचारी बैंक में ही बंद रहे। पुलिस ने बैंक मैनेजर से बात कर गुरुवार को भुगतान कराने का आश्वासन दिया तब लोग शांत हुए। सेंट्रल बैंक में एक ठेकेदार ने पचास हजार का भुगतान न होने पर आपा खो दिया। मैनेजर से तूतू-मैमै हुई तो स्टाफ के मोर्चा संभाल लिया। ठेकेदार ने अपनी चेक फाड़ दिया। बांगरमऊ में पीएनबी में लाइन में लगे लोगों को दोपहर बाद कर्मियों ने कैश खत्म होने की बात कहकर चलता कर दिया तो लोग आपा खो बैठे और उन्नाव-हरदोई मार्ग पर बैठ गए। हालांकि पुलिस के समझाने पर लोग शांत हुए और कुछ ही देर में सड़क से हट गए।
बैंकों में कैश किल्लत की हालत यह है कि किसी को रोज मर्रा के घरेलू खर्चे चलाना मुश्किल है तो किसी की बेटी शादी की तैयारियां अटकी हैं। आरबीआई के कैश न देने से बैंकों के हाल खराब हो गए हैं। बुधवार को बैंक में पर्याप्त कैश न होने से सेंट्रल बैंक में बवाल हुआ तो पीएनबी व एसबीआई में भी खाताधारक व प्रबंधकों में कई स्थानों पर तीखी नोकझोक हुई। समझाने पर कुछ लोग सिस्टम की मार को समझ रहे थे लेकिन कुछ 24 हजार का भुगतान करने की बहस भी कर रहे थे। इन्हें समझाने में प्रबंधकों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। बैंकों में कैश की किल्लत के चलते सुबह से शाम तक किसी भी समय बैंकों में भीड़ के हालात नहीं बने। अपने ही पैसे के लिए भटक रहे लोगों में गुस्सा का अब उबाल मारने लगा है। मोतीनगर स्थित कैनरा बैंक शाखा प्रबंधक की सख्त जुबानी खाताधारकों के लिए मुसीबत का सबब बन रही है। बुधवार को कैश की कमी बता प्रबंधक ने सभी को बाहर निकाल दिया। इस पर कुछ ने विरोध जताया तो पुलिस का हौव्वा दिखा बैकफुट पर ला दिया। यही नहीं शाम के 4:30 बजे ही चैनल बंद करा ताला डलवा दिया। इससे कैश जमा करने आए लोग भी मायूस होकर लौट गए।

सपा नेता के भाई ने धमकी दी तो ठेकेदार ने फाड़ दिया चेक
उन्नाव। आईबीपी चौराहा के बगल स्थित सेंट्रल बैंक में दोपहर लगभग 2 बजे एक सपा नेता के भाई पचास हजार का भुगतान कराने पहुंचे। शाखा प्रबंधक पीएस भाटिया ने भुगतान से मना किया तो सत्ता की हनक दिखाते हुए देख लेने की धमकी तक दे डाली। बात न बनने पर सपा नेता के भाई लौट गए। कुछ देर बाद ही शहर के एक ठेकेदार पचास हजार का चेक लेकर भुगतान कराने पहुंचे। प्रबंधक ने 24 हजार रुपये की गाइड लाइन होने की बात कही तो वह भड़क गए। भुगतान करने का दबाव बनाते हुए वो इतना उग्र हो गए कि प्रबंधक से धक्कामुक्की पर आमादा हो गए। शोर सुन बैंक कर्मी प्रबंधक केबिन पहुंच गए। पुलिस को सूचना देने की धमकी दी तो ठेकेदार चेक फाड़ खिसक लिए। इसके बाद बैंक ने भुगतान काउंटर बंद कर हाथ खड़े कर दिए। प्रबंधक ने बताया कि उच्चाधिकारियों को मामले की जानकारी देकर समस्या हल करने की बात कहेंगे। बताया कि मंगलवार को लखनऊ से दस लाख रुपये आया था इसी से करेंसी से सोमवार तक भुगतान करने को कहा गया है।

पीएनबी ने किया दो हजार का भुगतान
उन्नाव। बैंकों में कैश की कमी अब शाखा प्रबंधकों को ही अखरने लगी है। आरबीआई से करेंसी न आना बैंक कर्मियों के लिए बड़ी मुसीबत का कारण बनती जा रही है। शहर की चेस्ट पीएनबी में सोमवार से कैश की किल्लत इस कदर है कि दो से एक हजार विड्राल का ही संभव हो पा रहा है। इससे बुधवार को शाखा प्रबंधक वरुण दीक्षित कई बार खाताधारकों के गुस्से का शिकार बने। तो वहीं बस स्टाप स्थित पीएनबी शाखा प्रबंधक बीएन शुक्ल ने बताया कि मंगलवार को भुगतान नहीं किए गए थे। जो कैश जमा हुआ उससे बुधवार को भुगतान किया गया।  सोमवार तक गाइड लाइन के तहत अधिकतर विड्राल का भुगतान करने वाली मुख्य शाखा एसबीआई भी बुधवार को 15 हजार से ऊपर के भुगतान से हाथ खींचे रही। शाखा प्रबंधक दीपेंद्र यादव ने बताया कि कैश की कमी के चलते खाताधारकों को समझा बुझाकर काम चलाया गया। अगर यही स्थित रही तो हालात दिन पर दिन खराब होंगे।

डाकघर से पेंशनर्स लौटे मायूस
प्रधान डाकघर की तिजोरी भी हल्की पड़ गई है। बुधवार को एक-दो हजार रुपये का भुगतान कर जैसे तैसे खाताधारकों को काम चलाया जा रहा था। दोपहर बाद कैश की कमी के चलते भुगतान काउंटर लगभग बंद कर दिया गया। इससे पेंशन लेने आए पेंशनर्स घंटों के इंतजार के बाद खाली हाथ लौटने को मजबूर रहे।


एटीएम भी दे गए दगा
पाबंदी के बाद छोटे नोट की पर्याप्त करेंसी उपलब्ध करा पाने में बैंक फिसड्डी साबित हो रही है। बैंकों में कैश न होेने से कतार में लगने के बाद भी अधिकतर खाताधारक बिना नगदी के वापस लौटे। बैंक से निराश होकर लोग एटीएम बूथ पहुंचते तो वहां भी उम्मीद दम तोड़ जाती। बुधवार को शहर के अधिकतर एटीएम बूथ सुबह से ही कैशलेस हो चुके थे। हां एसबीआई के एटीएम जरूर कुछ लोगों के लिए राहत बने।
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