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करेला में लगा मुजैक रोग, लाखों की फसल बर्बाद

Unnao

Updated Sat, 06 Oct 2012 12:00 PM IST
परियर (उन्नाव)। मुजैक रोग के प्रकोप से गंगा कटरी में किसानों की सैकड़ों बीघा करेला की फसल बर्बाद हो रही है। किसानों का कहना है कि फसल को मुजैक रोग से बचाने के लिए तरह-तरह की दवाओं का छिड़काव किया गया, लेकिन कोई असर नहीं हो रहा है। अब तक लाखों की फसल चौपट हो चुकी है। रोग से बचाव का हर हथकंडा अपनाने के बाद निराश किसानों ने कृषि रक्षा विभाग से मदद की गुहार लगाई है।
सिकंदरपुर सरोसी ब्लाक के गंगा कटरी क्षेत्र के हाजीपुर, अगेहरा, अतरी, रौतापुर, फतेहपुर, बरधना, परियर, मरौंदा, बहरौला, मक्कापुरवा, रामपुर, टेपरा, कोलवा, कनवापुर, लालूपुर, जूड़ापुरवा, पटियारा, शंकरपुर सहित दर्जनों गांव में किसान सब्जी की पैदावार करते हैं। इस क्षेत्र में उगाई गई सब्जियां कानपुर के साथ ही लखनऊ, दिल्ली व मुंबई तक भेजी जाती हैं। बीते कई साल से किसानों का रुझान करेला की खेती की ओर बढ़ा है। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि करेला की खेती से प्रति बीघा एक से तीन लाख तक की आमदनी हो जाती है। इसके चलते करेला की खेती का रकबा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। इस साल सैकड़ों एकड़ में करेला की फसल बोई गई थी, लेकिन मुजैक रोग के प्रकोप से फसल बर्बाद हो रही है। किसान बनवारी कश्यप, दिनेश निषाद, देवी, सुरेश, गोपाल, सूरज कनौजिया आदि बताते हैं कि मुजैक रोग की चपेट में आकर करेला की बेल पीली पड़कर सूख जाती है, धीरे-धीरे खेत में लहलहा रही पूरी फसल चौपट हो जाती है। किसान रामनारायण अवस्थी, अजय अवस्थी, बेनी निषाद, नरपति, राम खिलावन आदि की माने तो मुजैक रोग से फसल को बचाने के लिए मोनो पोटोफास, लैनर, एम-45 पाउडर, टाप पाउडर आदि कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया गया, लेकिन इन कीटनाशक दवाओं का कोई असर नहीं हुआ। किसान परशुराम, छेदी निषाद, मूलचंद्र, केशनू, रामभजन, गोविंद, रंजीत कश्यप, रामेश्वर के मुताबिक करेला की फसल में रोग लगने से किसानों को लाखों रुपए का नुकसान हो चुका है।
वर्जन:--
करेला की फसल में मुजैक रोग लगा है, यह एक वायरस है। इस रोग में पत्तियां सिकुड़ जाती हैं और सफेद मक्खी इस वायरस को एक से दूसरे और उससे तीसरे पौधे पर बैठकर सारी फसल को प्रभावित कर देती हैं। इस रोग के लगते ही 20-25 दिनों के अंदर ही कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करना चाहिए। ऐसा न करने पर यह रोग फसल को पूरी तरह से बर्बाद कर देता है। यह वायरस मिर्च, भिंड़ी आदि फसलों को भी अपनी चपेट में ले लेता है।
रामबचन राम, जिला कृषि रक्षा अधिकारी
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