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इंदिरा आवासों पर भी महंगाई का ग्रहण

Unnao

Updated Wed, 03 Oct 2012 12:00 PM IST
उन्नाव। महंगाई का ग्रहण इंदिरा आवासों के निर्माण में भी दिखने लगा है। सरकार निर्माण के लिए जो धनराशि दे रही है, मानक के अनुरूप आवास बनवाने में उससे कई गुना ज्यादा खर्च आ रहा है। इसकी वजह साफ है कि निर्माण सामग्री की कीमतें भी इस समय आसमान छू रही है। ऐसे में इंदिरा आवास पाने की चाहत से लोगों का मोह भंग होने लगा है। हाल यह है कि सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए मुख्यालय की दौड़ लगाने वाले ग्रामीण इंदिरा आवास का नाम आते ही पीछे हट जाते हैं। उधर, अधिकारी इसे शासन की नीति बता कर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।
गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले ग्रामीणों को आशियाना उपलब्ध कराने के लिए सरकार इंदिरा आवास योजना चला रही है। 2001 की जनगणना के आधार पर बीपीएल परिवारों को इस योजना के तहत आवास बनाने के लिए सरकार की ओर से 45 हजार रुपया दिया जाता है। इस धनराशि से लाभार्थी को स्वयं ही अपना आवास बनवाना होता है। योजना के तहत लाभार्थी को आवास में 20 वर्ग मीटर का कवर्ड एरिया निर्मित कराना होता है। शासन के मानकोें के मुताबिक इंदिरा आवास में 13 गुणा 8 फिट का एक कमरा और 6 गुणा 7 फिट का बरामदा इसके अलावा रसोई और शौचालय का निर्माण होना चाहिए। इतना निर्माण करवाने के लिए वर्तमान बाजार मूल्य पर सिर्फ निर्माण सामग्री खरीदने में ही करीब 60 हजार रुपया खर्च हो जाएगा। यदि मनरेगा की मजदूरी और निर्माण सामग्री के 60:40 के अनुपात को मानक मान लिया जाए तो इस आधार पर मजदूरी पर करीब 85 हजार रुपया खर्च होगा। इस तरह गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लाभार्थी को अपनी जेब से करीब एक लाख रुपया और खर्च करना होगा, तब जाकर सरकारी मानकों के अनुरूप आवास तैयार हो पाएगा। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 6668 बीपीएल परिवारों को इंदिरा आवास की सुविधा मुहैया कराया जाना है। लागत और सरकारी धन के बीच जमीन आसमान का अंतर होने के कारण लाभार्थी सूची में नाम आने के बाद भी इस योजना में रुचि नहीं ले रहे हैं। मालूम हो कि पिछले वित्तीय वर्ष में कई लाभार्थी पूरी धनराशि मिलने के बावजूद मानक के अनुरूप आवास का निर्माण नहीं करा सके थे। प्रशासन ने इन ग्रामीणों, वर्क इंचार्ज और बीडीओ के खिलाफ कार्रवाई का फरमान जारी किया था।
उधर, इस बाबत परियोजना निदेशक डीआरडीए जावेद अख्तर जैदी का कहना है कि शासन से जो धनराशि लाभार्थी को दी जाती है, उसे उपलब्ध करा दी जाती है। आवास बनवाने की जिम्मेदारी लाभार्थी की है, हमारा कार्य सिर्फ निगरानी करना और आवास बनाने के लिए प्रेरित करना है।
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