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संसाधनों के अभाव से घिरा औद्योगिक क्षेत्र

Unnao

Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
उन्नाव। उत्पाद कर, बिक्रीकर जैसे करों के माध्यम से भारी राजस्व देने वाली औद्योगिक इकाइयां प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हैं। औद्योगिक क्षेत्र में तमाम मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। आवागमन और पेयजल की समस्या प्रमुख है। क्षेत्र की सड़कें बदहाल हैं।
जिले के करीब बीस किलोमीटर क्षेत्रफल में स्थापित औद्योगिक इकाइयां आयात-निर्यात और उत्पाद आदि के नाम पर भारी राजस्व देती हैं। औद्योगिक इकाइयों की वैसे तो संख्या करीब पांच सौ के करीब है, लेकिन इनमें से करीब तीन दर्जन औद्योगिक इकाइयां ऐसी है जिनके उत्पादों का बड़े पैमाने पर निर्यात होता है। इन सबके बाद भी यहां समस्याओं की भरमार है। करीब पूरे ही क्षेत्र में सड़के जर्जर एवं गड्ढा युक्त हैं। इन्हीं रास्तों से होकर लोडिंग और अनलोडिंग के लिए वाहनाें को गुजरना होता है। बरसात में जलभराव के बाद वाहन फंसने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। यही स्थिति पेयजल व्यवस्था की भी है। इकाइयों में काम करने वाले श्रमिकों को तो प्रबंधन की ओर से सुविधा मिल जाती है, लेकिन बाहर से आने वालों को फैक्ट्रियों में प्रवेश मिलने के पूर्व तक इस समस्या से जूझना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी ट्रक चालकों और लोडिंग, अनलोडिंग आदि जैसे कामों के लिए दैनिक पारिश्रमिक पर आने वाले श्रमिकों को होती है। इन्हें मजबूरी में बाहर से प्रदूषित पानी पीकर अपनी प्यास बुझानी होती है। पंजाब के ट्रक चालक जसविंदर सिंह, मंटू, भूपेंदर, राजू, इकबाल सिंह समेत अन्य कई ने बताया कि वे दही चौकी क्षेत्र की कई इकाइयों का सामान लेकर यहां अक्सर आते हैं। यहां पर उन्हें बिसेलरी खरीदकर लाना पड़ता है। इन समस्याओं को लेकर यूपीएसआईडीसी और प्रशासन अनजान है।

इनसेट-
दो वर्ष से की जा रही है मांग
आईआईए के चेयरमैन एके अग्रवाल बताते हैं कि औद्योगिक क्षेत्र की समस्याओं को लेकर वह करीब दो वर्षों से लगातार मांग करते आ रहे हैं। लेकिन प्रत्येक बैठक में अगली बैठक पर मामला टाल दिया जाता है। इन दो समस्याओं का तत्काल प्रभाव से निस्तारण किया जाना चाहिए।

इनसेट-
उद्योगपति बोले हो रही उपेक्षा
औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित राज स्टील, एसआरपी, केवीके, इंडो प्रो सोया, एमआई फुटवियर जैसी नामी और बड़ी इकाइयों के मालिक/प्रबंधक वीएन मिश्रा, संदीप शुक्ला, अरुण खन्ना, अशोक गर्ग, इमरान अली बेग आदि का कहना है कि वे नियमानुसार राजस्व का भुगतान करते हैं, जिससे विकास कार्य कराए जाते हैं। लेकिन राजस्व देने वालों को ही विकास से वंचित रहकर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जो कि सर्वथा अनुचित है।
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