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विद्युत विभाग पर ठोंका 25 हजार रुपये जुर्माना

Unnao

Updated Mon, 30 Jul 2012 12:00 PM IST
उन्नाव। मीटर लगा होने के बावजूद विद्युत विभाग उपभोक्ता को कभी एनआर (रीडिंग नहीं) तो कभी आईडीएफ (मीटर खराब) में बिल भेजता रहा। पीड़ित हर माह मिलने वाले बिल लगातार जमा करता रहा। लेकिन विद्युत विभाग हर माह जमा होने वाले बिल दूसरे महीने की राशि में जोड़कर भेजता रहा। बिल समायोजन के लिए पीड़ित लगातार विभाग के चक्कर लगाता रहा लेकिन बिल लगातार बढ़ता गया। उपभोक्ता ने फोरम में मामला दर्ज कराया। फोरम ने मामले की सुनवाई करते हुए विद्युत विभाग पर जुर्माना ठोंका और उपभोक्ता को 25 हजार रुपए बतौर क्षतिपूर्ति व 2 हजार रुपए परिवाद व्यय के देने के आदेश दिए।
हसनगंज के मोहान कस्बा निवासी अरविंद कुमार ने स्वरोजगार के लिए 2 किलोवाट का बिजली कनेक्शन लिया है। काफी समय तक मीटर न लगने के कारण कनेक्शन नहीं जुड़ा। 17 अगस्त 1990 को मीटर लगाकर कनेक्शन जोड़ा गया। कनेक्शन चालू हुआ लेकिन विद्युत विभाग हर माह एनआर में बिल भेजता रहा। बिना रीडिंग के बिल आते रहे और अरविंद उन्हें जमा करते रहे। वर्ष 2006 में विद्युत वितरण खंड द्वितीय ने आईडीएफ में बिलिंग शुरु कर दी। यह 2008 तक जारी रहा। उपभोक्ता यह बिल भी जमा करता रहा। मई 2008 में विभाग ने मीटर बदला लेकिन बिल में दर्शा रहा पिछला बकाया 33 हजार 764 समाप्त नहीं किया। जनवरी 2010 से लगातार आईडीएफ दर्शाकर गलत बिल भेजे जाते रहे। बिल की यह राशि बढ़कर 61 हजार 876 हो गई। उपभोक्ता ने बिल संशोधन के लिए विभाग के चक्कर लगाए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई जिस पर उसने उपभोक्ता फोरम की शरण ली। विद्युत विभाग की ओर से प्रतिवाद पत्र दाखिल न किए जाने पर फोरम ने एकपक्षीय सुनवाई के आदेश दिए। फोरम अध्यक्ष पीयूष कुमार व सदस्य अब्दुल हफीज अंसारी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि परिवादी द्वारा जमा की गई धनराशि को कम्प्यूटर में न भरने के कारण भूल हुई है। विभाग के किसी अधिकारी व कर्मचारी ने यह जहमत नहीं उठाई कि कम्प्यूटर की रीडिंग सही कर दे जिससे यह त्रुटि बराबर बनी हुई है। फोरम ने उपभोक्ता को दिए गए बिल निरस्त करने व 25 हजार रुपए बतौर क्षतिपूर्ति व 2 हजार रुपए परिवाद व्यय के रुप में देने के आदेश विद्युत विभाग को दिए हैं।

इंसेट
नियम विरुद्ध हैं आईडीएफ में दिए गए बिल
उन्नाव। फोरम ने सुनवाई करते हुए तल्ख टिप्पणी की कि अधिक समय तक परिवादी को आईडीएफ के बिल दिए जा रहे हैं जोकि नियम विरुद्ध हैं। विद्युत विभाग द्वारा सही मांग का बिल जारी किया जाएगा तभी उस पर अधिभार लगा सकते हैं। गलत बिल को जमा करने का कोई दायित्व परिवादी का नहीं है। न ही उस पर कोई अधिभार वसूल किया जा सकता है। ऐसा नहीं है कि यदि विद्युत विभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा गलती की जाती है तो यह उपभोक्ता का दायित्व है कि वह उनको सही कागज दिखाए तब जाकर गलती सही होगी। विभाग के पास यदि कागज है तो विभाग उसके आधार पर कार्रवाई कर सकता है। उपभोक्ता को कहीं भी बुलाने की आवश्यकता नहीं है। इस मामले में मीटर सीलिंग प्रमाणपत्र की कार्यालय प्रति विभागीय अधिकारियों के पास थी इसलिए अधिकारी स्वयं गलती दूर कर सकते थे। लेकिन मामले में ऐसा नहीं किया गया। इसलिए इसका कोई लाभ विभाग पाने का अधिकारी नहीं है।
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