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बिना शिक्षकों के अनिवार्य शिक्षा का हक!

Unnao

Updated Thu, 12 Jul 2012 12:00 PM IST
उन्नाव। अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम जरूर लागू हो गया लेकिन जिले में इसके प्रभावी होने की संभावना नहीं दिख रही है। दरअसल अधिनियम के हिसाब से छात्रों के अनुपात में जितने शिक्षकों की जरूरत है उतने जिले में हैं ही नहीं। स्कूलों में दर्ज बच्चों के अनुपात में करीब छह हजार शिक्षकों की जरूरत है, जबकि तैनात महज सवा चार हजार ही हैं। अभी 5 से चौदह वर्ष के बच्चों के प्रवेश कराने को अभियान चलेगा तब छात्रों की संख्या के लिहाज से शिक्षकों का अनुपात और कम हो जाएगा।
जिले के गरीब बच्चों को साक्षर करने के लिए शासन की ओर से 2039 प्राथमिक और 802 उच्च प्राथमिक विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। करीब एक सैकड़ा नवीन विद्यालयों की इमारतें भी बनकर तैयार होने को हैं। संचालित प्राथमिक स्कूलों में शिक्षण कार्य के लिए 5183 जबकि उच्च प्राथमिक स्कूलों में 2747 शिक्षकों के पद सृजित हैं। लेकिन आरटीई के प्रभावी होने की स्थिति में यह आंकड़े बदल जाएंगे। आरटीई के मानक के अनुसार विभाग को करीब एक हजार शिक्षकों के अतिरिक्त पद सृजित करने होंगे। स्थिति की जानकारी होने के बाद भी विभाग के आला अधिकारी आरटीई को प्रभावी ढंग से लागू करने की बात कर रहे हैं। जबकि जिले में सृजित पदों के सापेक्ष प्राथमिक स्कूलों में मात्र 2854 शिक्षक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में मात्र 1690 शिक्षक ही सेवारत हैं। जिले में पहले से ही करीब एक तिहाई स्कूल शिक्षक विहीन और आधे से अधिक स्कूल एकल शिक्षक वाले हैं। शासन की ओर से अभी तक नई शिक्षक भर्ती की कोई नीति भी तय नहीं की जा सकी है। इन शिक्षकों को सर्व शिक्षा अभियान की तमाम योजनाओं के संचालन व क्रियान्वयन की जिम्मेदारी अभी भी इन्हें ही निभानी हैं। ऐसी स्थिति में स्कूलों का पठन पाठन व नामांकन आदि नियमानुसार पूरा होगा इसमें संदेह है।


छह हजार शिक्षकों की है कमी
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के 1994 और नगरीय क्षेत्र के 45 प्राथमिक स्कूलों में करीब दो लाख पचास हजार छात्र पंजीकृत हैं। ग्रामीण क्षेत्र के 788 व नगरीय क्षेत्र के 14 उच्च प्राथमिक स्कूलों में 75 हजार छात्र पंजीकृत हैं। यदि आरटीई का मानक देखा जाए तो प्राथमिक स्कूलों में आठ हजार से अधिक शिक्षकों की आवश्यकता है जबकि उच्च प्राथमिक स्कूलों में 2500 शिक्षक नियुक्त होने चाहिए। इस तरह प्राथमिक स्कूलों में करीब पांच हजार और जूनियर स्कूलों में करीब आठ सौ शिक्षकों की कमी है।

यह हैं आरटीई के मानक
प्राथमिक स्कूल
छात्र संख्या शिक्षक
0 से 60 दो
61 से 90 तीन
91 से 120 चार
121 से 150 पांच
151 से 200 5+1 प्रधान शिक्षक
200 छात्र से अधिक 40 छात्र/शिक्षक+हेड
उच्च प्राथमिक स्कूल
प्रति कक्षा एक शिक्षक (विज्ञान और गणित, सामाजिक अध्ययन व भाषा विषयों के)
प्रत्येक 35 छात्रों के लिए एक शिक्षक।
100 से अधिक छात्रों वाले स्कूल में एक पूर्णकालिक शिक्षक और कला शिक्षा, स्वास्थ्य व शारीरिक शिक्षा, कार्य शिक्षा के लिए अंशकालिक शिक्षक।

शिक्षक विहीन नहीं रहेंगे स्कूल
बीएसए डा. मुकेश कुमार सिंह का कहना है कि आरटीई को प्रभावी करने के लिए फिलहाल इसी व्यवस्था में प्रयास प्रारंभ कर दिए गए हैं। उन्होंने जूनियर स्कूलों में प्रमोशन के माध्यम से शिक्षक संख्या पूरी होने के साथ ही शासन स्तर से शिक्षक भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद जताई। डा. सिंह ने बताया कि उन्होंने जिले में शिक्षकों की स्थिति से शासन को अवगत करा दिया है।


संचालित परिषदीय विद्यालय
ग्रामीण क्षेत्र नगर क्षेत्र
प्राथमिक विद्यालय 1994 45
जूनियर विद्यालय 788 14


स्वीकृत पद प्राथमिक विद्यालय
ग्रामीण क्षेत्र-
शिक्षक पदनाम स्वीकृत तैनाती
प्रधान शिक्षक 1765 1398
सहायक शिक्षक 3333 1321
नगर क्षेत्र-
प्रधान शिक्षक 45 29
सहायक शिक्षक 140 51

स्वीकृत पद उच्चप्राथमिक विद्यालय
ग्रामीण क्षेत्र-
शिक्षक पदनाम स्वीकृत तैनाती
प्रधान शिक्षक 771 340
सहायक शिक्षक 1903 1317
नगर क्षेत्र-
प्रधान शिक्षक 11 06
सहायक शिक्षक 62 27

आरटीई के तहत यह भी करेंगे शिक्षक
6 से 14 वय वर्ग के सभी छात्रों का पंजीकरण।
अभिभावकों से बच्चों की समस्याओं की जानकारी लेंगे।
प्रधान अध्यापक सत्र प्रारंभ के समय विभाजन चक्र तैयार करेंगे।
समय समय पर बीआरसी पर दिए जाने वाले प्रशिक्षण में शामिल होंगे ।
गीत संगीत व व्यवसायिक पाठ्यक्रम संचालित कराएंगे ।
शिक्षण कार्य के साथ रसोइयों और निरक्षर ग्रामीणों को साक्षर करेंगे।
कुपोषण से बचाव को बच्चों को कैलोरी युक्त मिडडे मील।
गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को कक्षाएं न संचालित करने की चेतावनी।
वन महोत्सव का आयोजन कर प्रति विद्यालय दस पौधे रोपे जाएंगे।
प्रत्येक माह के अंतिम सप्ताह में मनाया जाएगा बच्चों का बर्थडे।
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