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चंदा कर किया किसान का अंतिम संस्कार

Unnao

Updated Sun, 01 Jul 2012 12:00 PM IST
उन्नाव। प्रशासन की सख्त के सदमे से मृृत परियर के किसान प्रीतम पासी का अंतिम संस्कार गांव के लोगों ने चंदा कर किया। गरीब किसान परिवार की मदद को न ही कोई प्रशासनिक अधिकारी पहुंचा और न ही कोई जनप्रतिनिधि या किसान नेता।
सदर तहसील के परियर गांव निवासी किसान प्रीतम पासी पर बैंक का 4 लाख 50 हजार रुपए कर्ज बकाया था। कर्ज न चुका पाने पर किसान के नाम आरसी काट दी गई थी। इस पर 19 जून को बीमार होने के बावजूद नायब तहसीलदार ने किसान को हिरासत में लेकर तहसील की हवालात में बंद कर दिया था। इससे किसान को गहरा सदमा लगा था। हालत बिगड़ने पर शुक्रवार को उसे छोड़ दिया गया लेकिन घर जाने से पहले उसने दम तोड़ दिया। गरीबी में जी रहे किसान के परिवार के पास उसके अंतिम संस्कार तक के लिए पैसे नहीं थे। गांव निवासी पोस्टमैन शिवशंकर की अगुवाई में ग्रामीणों ने चंदा कर प्रीतम का अंतिम संस्कार किया। किसान के परिवार की मदद के लिए न ही प्रशासन की ओर से कोई पहुंचा और न ही कोई नेता ही आगे आया। गांव में किसान के पास सिर छिपाने के लिए छत भी नहीं थी। उसका परिवार एक कच्ची दीवार पर तिरपाल डालकर रह रहा था।
इनसेट
दबंग किए हैं जमीन पर कब्जा
प्रीतम पुत्र सरजू पासी के नाम सात बीघा जमीन है। इसमें से पांच बीघा पर दबंग कब्जा किए हैं। महज दो बीघे पर ही किसान का कब्जा था। गंगा कटरी में होने के कारण लगभग हर साल उसकी फसल बाढ़ में तबाह हो जाती है। प्रीतम की विधवा दुलारी ने बताया कि गांव के दो लोग वर्ष 2004 में उन्हें यह कहकर ले गए थे कि बैंक में जमानत लेनी है। वहां धोखे से उन्हीं (प्रीतम) के नाम से ट्रैक्टर का लोन ले लिया। करीब तीन वर्ष पहले रिकवरी नोटिस आने पर हम लोगों से ट्रैक्टर का लोन होने की जानकारी हुई। इस पर उन लोगों ने ट्रैक्टर बेंच दिया। बैंक से 2 लाख 50 हजार रुपए ऋण लिया गया था जो अब बढ़कर साढ़े चार लाख रुपए हो गया है।
चंडीगढ़ में मजदूर करता था किसान
उन्नाव। हर साल गंगा में आने वाली बाढ़ में दो बीघा की फसल भी तबाह हो जाती थी। इससे किसान को परिवार पालना मुश्किल हो गया था। इसके प्रीतम कई साल पहले परिवार के साथ चंडीगढ़ चला गया था। वह और उसका परिवार वहां मेहनत मजदूरी कर गुजारा कर रहा था। बीच-बीच में वह गांव आता रहता था। करीब पंद्रह दिन पहले प्रीतम अपने कब्जे की दो बीघा जमीन बेच कर कर्ज चुकाने के लिए गांव आया था और इसी बीच तहसील प्रशासन ने उसे उठा लिया।


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