आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

शिक्षा विभाग में बदली दिखेगी व्यवस्थाः अब नहीं बचेंगे लापरवाह अधिकारी

Unnao

Updated Thu, 28 Jun 2012 12:00 PM IST
उन्नाव। सत्ता परिवर्तन का असर शिक्षा के क्षेत्र में भी जल्द ही दिखेगा। अब विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही शायद न दिखे। राज्य परियोजना निदेशक अतुल कुमार ने प्रदेश के सभी बीएसए को भेजे आदेश में इसके स्पष्ट संकेत दिए हैं। उन्होंने स्वीकार किया है कि पूर्व में सर्वशिक्षा अभियान के अंतर्गत विद्यालय सांख्यकी रिपोर्ट में लापरवाही बरती गई , जिसका नतीजा है कि प्रदेश के शैक्षिक इंडीकेटर्स सही रूप से परिलक्षित नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने नए शिक्षा सत्र के साथ बीते शिक्षा सत्र का डायस (जिला शिक्षा सूचना प्रणाली) डाटा निर्धारित समय में पूर्ण रूप से उपलब्ध कराने के सख्त निर्देश दिए हैं।
जिले के सभी मान्यता प्राप्त प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को नए शिक्षा सत्र के साथ ही बीते वर्ष का भी डायस डाटा देना होगा। राज्य परियोजना निदेशक ने बीते शिक्षा सत्र में बरती गई लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने माना कि सर्वशिक्षा अभियान के अंतर्गत विद्यालय सांख्यकी रिपोर्ट में सभी विद्यालयों से पूरी तरह प्रपत्र एकत्रित न किए जाने से नामांकन की पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इससे प्रदेश के शैक्षिक इंडीकेटर्स सही तरह परिलक्षित नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने बिंदुवार आदेशित किया कि जिला व ब्लाक स्तर पर नोडल अधिकारी नामित कर विद्यालयों के प्रधान शिक्षकों को ब्लाक स्तर पर सांख्यकी रिपोर्ट भरने के लिए प्रशिक्षित किया जाए। चेतावनी दी है कि सभी प्रकार के विद्यालयों द्वारा डीसीएफ भरकर पूरा डाटा उपलब्ध कराया जाए। बीएसए स्तर से सभी अधिकारियों व स्टाफ को दिए गए निर्देशों की एक प्रति राज्य परियोजना कार्यालय को अवश्य उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने समय सारिणी देते हुए चेतावनी दी है कि निर्धारित तिथियों पर सूचनाओं का प्राप्त न होना अक्षम्य होगा।
इनसेट
बीएसए की होगी जिम्मेदारी
सभी प्रकार के विद्यालयों/मदरसों की स्कूल डायरेक्ट्री तैयार कराने के साथ ही बीएसए शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के परिप्रेक्ष्य में डायस 2012-13 में समय से पूर्ण कवरेज तथा डाटा उपलब्ध कराएंगे। इसके उपरांत भरे हुए डीसीएफ की एक छाया प्रति संबंधित विद्यालय को उपलब्ध कराना होगा।


क्यों आवश्यक हैं सांख्यकी प्रपत्र
सभी प्रकार के विद्यालयों और मदरसों से सांख्यकी प्रपत्र एकत्रित कर बीएसए कार्यालय में जमा किए जाएंगे। इससे जनपद स्तर पर बेसिक शिक्षा की समग्र स्थिति ज्ञात होगी। इसी आधार पर जनपद की आगामी वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट 2013-14 में वास्तविक एवं सही आंकड़े सम्मिलित किए जा सकेंगे।
यह भरकर देंगे सांख्यकी प्रपत्र
परिषदीय विद्यालय, मान्यता प्राप्त (अनुदानित/गैर अनुदानित) विद्यालय, माध्यमिक विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, जनजाति एवं समाज कल्याण विभाग, आईसीएसएई /सीबीएसएई से मान्यता प्राप्त, गैर मान्यता प्राप्त विद्यालय, मदरसा आदि को विद्यालय सांख्यकी प्रपत्र भेजने होंगे। विभिन्न चरणों से गुजरने के बाद 30 सितंबर 2012 के आधार पर 1 से 6 अक्टूबर के मध्य संपूर्ण प्रपत्र भरे जाएंगे। 8 से 10 अक्टूबर के मध्य यह प्रपत्र प्रधानाध्यापक संकुल स्तर पर जमा करेंगे। 11 व 12 अक्टूबर को बीआरसी पर जमा होंगे और 13 से 15 अक्टूबर के मध्य 25 प्रतिशत प्रपत्रों की क्रास चेकिंग कर बीएसए कार्यालय में जमा कराना होगा।

किसे और क्या दिया जाएगा प्रशिक्षण
ब्लाक स्तर पर डीसीएफ भरने का प्रशिक्षण सभी विद्यालयों के प्रधान शिक्षकों को दिया जाएगा। इस दौरान अवस्थापना सुविधाएं जैसे शौचालय, पेयजल सुविधा, कक्षा कक्ष, रैंप, किचन शेड, बाउंड्रीवाल, प्ले ग्राउंड, लाइब्रेरी पिछले वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक विद्यालय में आयु व कक्षावार नामांकन एवं शिक्षक अंकित करने होंगे।
कौन होगा जिम्मेदार
प्राथमिक विद्यालयों के संबंध में जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों के संबंध में जिला समन्वयक प्रशिक्षण को नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा। ब्लाक स्तर पर खंड शिक्षाधिकारी को नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा। नामित अधिकारियों के नाम, पदनाम व मोबाइल नंबर राज्य परियोजना कार्यालय के कंप्यूटर अनुभाग को तत्काल उपलब्ध कराया जाना है।


इन बिंदुओं पर बनेगी तुलनात्मक रिपोर्ट

हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू के अतिरिक्त अन्य मीडियम वाले विद्यालयों की संख्या
उन विद्यालयों की संख्या जिनमें आयुवार /कक्षावार प्रपत्र में आयु कक्षावार नहीं भरी हो
पेयजल व्यवस्था सहित विद्यालय
शौचालय (बालक) सहित विद्यालय
शौचालय (बालिका) सहित विद्यालय
रैंप्स सहित विद्यालय
बाउंड्रीवाल सहित विद्यालय
किचनशेड सहित विद्यालय
कक्षा कक्ष रहित विद्यालय
भवन रहित विद्यालय
प्लेग्राउंड सहित विद्यालय
लायब्रेरी सुविधा सहित विद्यालय
अध्यापक रहित विद्यालय
नामांकन रहित विद्यालय
नो रिस्पांस विद्यालय
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

education officials

स्पॉटलाइट

कुछ लड़कियां क्यों नहीं करतीं जिंदगीभर शादी, लड़के जान लें

  • बुधवार, 22 फरवरी 2017
  • +

IndVsAus: अश्विन, जडेजा, जयंत से नहीं, कंगारुओं को इससे है डर

  • गुरुवार, 23 फरवरी 2017
  • +

रिसर्च: मोटे मर्दों की सेक्स लाइफ होती है शानदार

  • बुधवार, 22 फरवरी 2017
  • +

सेल्फी के शौकीनों के लिए खुशखबरी, इस फोन में होगा 3D कैमरा

  • बुधवार, 22 फरवरी 2017
  • +

रजनीकांत की दीवानी है ये हीरोइन, अब साथ में करेगी काम

  • बुधवार, 22 फरवरी 2017
  • +

Most Read

भड़काऊ भाषण ने खड़ा किया मुसीबतों का पहाड़, पीएम मोदी के सामने आई नई मुश्किल

pm accused of making inflammatory speeches at rally
  • गुरुवार, 23 फरवरी 2017
  • +

खुशखबरी : 15 अप्रैल से यहां हाेगी सेना रैली भर्ती, 13 जिलाें के अभ्यर्थी अभी करें अावेदन

sena bharti rally in kanpur
  • बुधवार, 22 फरवरी 2017
  • +

यूपी चुनाव 2017 : एक गांव में एक वोट पड़ा दूसरे में एक भी नहीं, कारण जानकर रह जाएंगे हैरान

vilagers  voting boycott in kanpur
  • रविवार, 19 फरवरी 2017
  • +

सोनिया की चिट्ठी- 'मोदी ने आपका सब कुछ छीन लिया'

for the first time soina gandhi does not take part in election campaign at raibarielly
  • बुधवार, 22 फरवरी 2017
  • +

पुलिस अंकल जबरदस्ती करते रहे और मैं चिल्लाती रही

mai chilaati rahi
  • बुधवार, 22 फरवरी 2017
  • +

समाजवादी जब जोश में होते हैं तो हाथ छोड़ भी साइकिल चला लेते हैं: अखिलेश

akhilesh yadav rally bahraich
  • बुधवार, 22 फरवरी 2017
  • +
TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top