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ट्रेन के पायदान बने जान के दुश्मन

Unnao

Updated Fri, 07 Dec 2012 05:30 AM IST
उन्नाव। हर माह लगभग आधा दर्जन यात्रियों की सांसें रेलवे ट्रैक पर ही थम रही हैं। कारण लोग पायदान पर यात्रा करने का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक, ट्रेन के पायदान पर यात्रा ने इस साल ही करीब 85 लोगों की जिंदगी छीन ली है। इसके बाद भी लोग सबक नहीं ले रहे हैं। जीआरपी भयान चलाकर गेट पर बैठने और लटकने वालों को पकड़ती है। लोग जेल जाते हैं, जुर्माना अदा करते हैं लेकिन गेट पर बैठना नहीं छोड़ते।
वर्ष 2012 (जनवरी से नवंबर) में करीब 85 यात्रियों ने ट्रेन के गेट पर बैठने के मोह में अपनी जान गंवा दी। कुछ समय पहले कुशीनगर एक्सप्रेस के गेट पर बैठा युवक सलमान झपकी आने से ट्रेन से नीचे गिर गया था। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। बड़ी बात यह थी कि उसके परिजन अंदर सीट पर बैठे थे । उन्होंने सलमान को भी अंदर बैठने को कहा। वह नहीं माना। नतीजतन उसे अपनी जान गवानी पड़ी। यह अकेला मामला नहीं है गेट पर बैठने वाले 7 यात्री नीचे गिरकर असमय ही काल के गाल में समा गए। इसके अलावा 11 यात्री गिरकर घायल हुए हैं। इससे पहले फरवरी में 7, मार्च में 9, अप्रैल में 6, मई व जून में 8-8, जुलाई में 11, अगस्त में 5, मई में 10, अक्टूबर, नवबंर में लगभग 7-7 यात्री गेट पर बैठकर यात्रा करने के दौरान नीचे आ गए और जान से हाथ धो बैठे। यही नहीं करीब 24 यात्री गिरकर घायल भी हुए। इनमें से कुछ के तो हाथ पैर सलामत नहीं रहे। कुछ बिस्तर से ही उठ नहीं पा रहे हैं और जीवन भर के लिए विकलांग हो गए हैं। आए दिन हो रहे हादसाें के बाद भी यात्री बेफिक्र हैं। उन्नाव जंक्शन पर रुकने और यहां से गुजरने वाली ट्रेनों में गेट पर भारी संख्या में यात्री लटके या बैठे नजर आ जाते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि गेट पर लटकने और बैठकर यात्रा करने वालों पर कार्रवाई का रेलवे एक्ट में प्रावधान है। हर दूसरे-तीसरे दिन आरपीएफ अभियान चलाकर धरपकड़ भी करती है। रेलवे पुलिस ने अभियान चलाकर करीब एक सैकड़ा यात्रियों को पकड़ा और रेलवे एक्ट की धारा 156 में चालान कर कोर्ट में पेश किया। एक्ट के तहत गेट पर यात्रा करते पाए जाने पर अधिकतम 500 रुपए जुर्माना और तीन दिन की जेल हो सकती है। इसके बाद भी लोग जान की परवाह नहीं कर रहे हैं। खास बात यह भी है कि इस तरह की लापरवाही करने वालों में ज्यादातर युवा हैं।

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