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पशुओं में तेजी से बढ़ रहा बांझपन

Sonbhadra

Updated Sun, 16 Dec 2012 05:30 AM IST
सोनभद्र। पशुओं में बांझपन की बीमारी ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। क्रासव्रीड गाय और मुर्रा भैंसें ज्यादा बांझपन की शिकार हो रही हैं। पशु चिकित्सा विभाग इस रोग से बचाव के लिए कोई खास पहल नहीं कर पा रहा है। ऐसे में पशुपालक खासे परेशान हैं।
अच्छी नस्ल और दुधारू पशुओं में बांझपन की शिकायत ज्यादा होती है। पशुओं में यह बीमारी पोषक तत्वों की कमी से होती है। इसे दूर करने के लिए पशुओं को हरे चारे में बर्सीम और जई की डोज नियमित देते रहना चाहिए। पशुपालकों को पशुओं के रखरखाव के लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए। ज्यादा रुपये खर्च कर पशुपालक अच्छी नस्ल की गाय और भैंसें तो ले आते हैं, लेकिन उनका उचित रखरखाव और भरपूर मात्रा में पोषक तत्व नहीं दे पाते हैं। इसके चलते पशु एक-दो बार के बाद बांझपन के शिकार हो जाते हैं। इनके इलाज में ज्यादा खर्च हो रहा है। अगर पशुओं को उचित मात्रा में पोषक तत्व मिलता रहा तो पशुओं में बांझपन जैसी बीमारी कभी आएगी ही नहीं। पशुओं में होने वाले इस बीमारी के लिए पशुविभाग के पास हर वर्ष कारगर दवाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं, लेकिन पशुओं को पोषक तत्व तो पशुपालक ही दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में पशुपालकों को हरा चारा नियमित और पशु आहार तथा खली, चूनी आदि नियमित मात्रा में हर रोज खिलाना चाहिए। अभी तक जनपद में कुल 270 पशु बांझपन के शिकार हो चुके हैं और करीब तीन सौ पशुओं का पहले भी इलाज किया जा चुका है। उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. एसपी सिंह ने बताया कि पशुओं में खान पान में कमी, विटामिन की कमी, मिनरल की कमी, समय-समय पर कृमि नाशक दवाओं का प्रयोग करके पशुओं में बांझपन की बीमारी दूर की जा सकती है।
अधिक बांझपन की समस्या क्रासवीड गायों और मुर्रा भैसों में होती है। पशुधन प्रसार अधिकारी बनारसी पांडेय ने बताया कि ग्राम बबुराही, अकछोर, सिद्धीकला, बघनारी, महुआव कला और बेलकप आदि जगहों पर कैंप लगा कर करीब 150 पशुओं का इलाज किया जा चुका है। सभी क्षेत्रों में बांझपन निवारण के लिए मुहिम चलाई जा रही है। बांझपन निवारण की योजना के अंतर्गत दवाएं प्रतिवर्ष निदेशक पशुपालन विभाग द्वारा दी जाती है।
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