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38 विद्यालयों में 11 शिक्षक, कैसे हो पढ़ाई

Sonbhadra

Updated Fri, 14 Dec 2012 05:30 AM IST
कोन। न्याय पंचायत क्षेत्र में शिक्षा का कानून अधिकार की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। समायोजन में खामियों का नतीजा है कि क्षेत्र के 38 परिषदीय विद्यालय महज 11 शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। ऐसे कई विद्यालय हैं जहां कोई शिक्षक ही नहीं मिला। ऐसे में विभाग ने 92 बच्चों के लिए एक शिक्षामित्र को वहां तैनात कर दिया जो नियमों के विरुद्ध है।
भारत सरकार की मंशा है कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का अधिकार मिले। इसके लिए सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम बनाया और बच्चों को तमाम सुविधाएं मुहैया कराने का आदेश दिया। लेकिन इसका पालन परिषदीय विद्यालयों में किस हद तक हो रहा है यह कोन न्याय पंचायत में देखा जा सकता है। जुलाई माह में होने वाले समायोजन के बावजूद तमाम विद्यालय महज शिक्षामित्रों के सहारे संचालित हैं। कई विद्यालयों का प्रभार महज एक शिक्षक को दिया गया है। ऐसे में शिक्षक विद्यालय में बच्चों को पढ़ाएगा या फिर अन्य कार्य देखेगा इसे समझा जा सकता है। किसी कार्यालयीय कार्य से शिक्षक प्रभार वाले दूसरे विद्यालय में गया और किसी अफसर ने निरीक्षण कर लिया तो निलंबन की भी गाज उसी पर गिरनी है। ऐसे मेें शिक्षक क्या करें यह सवाल गंभीर है। कोन न्याय पंचायत में कुल 38 परिषदीय विद्यालय हैं। इन विद्यालयों को संचालित करने के लिए पूरे न्याय पंचायत क्षेत्र में महज 11 शिक्षकों को ही तैनात किया गया है। विभागीय समायोजन में किस कदर की लापरवाही और गड़बड़ी बरती गई इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उच्च प्राथमिक विद्यालय बहुअरा में एक भी शिक्षक नहीं तैनात किया गया। जबकि यहां 92 बच्चे अध्ययनरत हैं। विभाग ने बाद में इस विद्यालय पर एक शिक्षामित्र की तैनाती कर दी गई जो कि पूरी तरह से नियम विरुद्ध है। खास बात यह है कि इस न्याय पंचायत में छह विद्यालय निर्माणाधीन हैं लेकिन विभाग ने खनन सामग्री न उपलब्ध होने की बात कह इन भवनों को अब तक पूर्ण नहीं कराया। इससे अब तक इन विद्यालयों में पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी। इस बारे में एबीएसए सुनील कुमार सिंह का कहना है कि विभाग में शिक्षकों की कमी है। शिक्षक मिलते ही सभी विद्यालयों में तैनाती कर दी जाएगी। फिलहाल शिक्षामित्रों के सहारे ही काम चलाया जा रहा है।
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