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‘कलरव’ नामक किताब से दो पाठ गायब

Sonbhadra

Updated Sat, 10 Nov 2012 12:00 PM IST
सोनभद्र। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद की लापरवाही का अंदाजा परिषदीय विद्यालयों में बंटने वाली किताबों से लगाया जा सकता है। कक्षा पांच के बच्चों को दी गई ‘कलरव’ नामक किताब से दो पाठ ही गायब हैं। इन दो पाठ में सबसे अहम है सरदार वल्लभ भाई पटेल की जीवनी, जिन्होंने देश को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जब बच्चे उनके जीवन का अध्ययन ही नहीं करेंगे तो उनमें आदर्श, त्याग और देशभक्ति की भावना कैसे जागेगी?
परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा नि:शुल्क किताब दी जाती है जिससे गरीब बच्चा शिक्षा से वंचित न रह सके। लेकिन शिक्षा सत्र 2012-13 में सोनभद्र मेें कक्षा पांच के ‘कलरव’ विषय की जो किताब बच्चों को बांटी गई है, उसमें कई खामियां हैं। बेसिक शिक्षा निदेशक एवं अध्यक्ष बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश वासुदेव यादव ने किताब में अपने प्राक्कथन में इस बात का जिक्र किया है कि नई पाठ्यपुस्तकें सार्थक और उद्देश्यपूर्ण परिवर्तन के साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास में उपयोगी सिद्ध होंगी लेकिन शायद उन्होंने इस पुस्तक के प्रकाशन के दौरान इस बात का ध्यान नहीं दिया कि किताब में पूरे पाठ क्रमश: हैं भी या नहीं। सर्व शिक्षा अभियान के तहत दी गई इस किताब के पांचवें पेज पर क्या-कहां में एक से लेकर 21 पाठ का जिक्र है। यह पाठ पेज छह से 125 तक है। इस किताब में पृष्ठ संख्या 51 पर तीन सवाल (कहानी), पृष्ठ 59 पर कितना सीखा-2, पृष्ठ 61 पर अपने आप-2 (कोई लाके मुझे दे) और पृष्ठ 62 पर सरदार वल्लभ भाई पटेल (जीवनी) पढ़ाने का जिक्र है लेकिन बच्चों को दी गई इस पुस्तक में पृष्ठ 49 से 64 तक गायब हैं। अहम बात यह है कि गायब पृष्ठ में ही सरदार पटेल की जीवनी भी थी जिसके बारे में बच्चों को शिक्षा दी जानी थी लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि न तो बेसिक शिक्षा परिषद के आला अफसरों ने इस पर ध्यान दिया और न ही परिषदीय विद्यालयों के अध्यापकों ने जबकि जुलाई माह से शुरू हुए शिक्षा सत्र का यह चौथा माह चल रहा है। यदि शिक्षा विभाग में सर्व शिक्षा अभियान से जुड़े अफसरों ने इस किताब को लेने से पहले पूरे पाठ्यक्रम को देखा होता और शिक्षकों ने भी बच्चों को पढ़ाने में रुचि ली होती तो विभाग की इस कमी का खुलासा पहले भी हो सकता था ।
और बच्चों को आधी-अधूरी किताब शिक्षा के लिए न दी जाती।
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