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कोल मुद्दा गरमाया

Sonbhadra

Updated Sat, 08 Sep 2012 12:00 PM IST
अनपरा। ब्लैक डायमंड (कोयला) पर मचे घमासान का साफ असर ऊर्जांचल में भी दिखने लगा है। सिंगरौली तथा सोनभद्र में इसे लेकर लगातार धरना-प्रदर्शन का दौर जारी है। चूंकि देश की लगभग डेढ़ सौ कोल ब्लाकों के आवंटन के साथ ही ऊर्जांचल की भी चार कोल ब्लाक (मुहेर, अमलोरी, छत्रसाल तथा महान) निजी कंपनियों को आवंटित हुई है। ऐसे में यहां इस मसले पर कुछ ज्यादा हो हंगामा मचना लाजिमी है। अधिकांश बुद्धिजीवी कोल आवंटन को रद करने की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर एनसीएल की एक प्रमुख यूनियन भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) पांच सितंबर से नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की सभी परियोजनाओं के सामने धरना-प्रदर्शन भी करने जा रही है।
कोयला आवंटन रद करने की मांग करते हुए ऊर्जांचल जनकल्याण समिति के महामंत्री केसी जैन ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यांलय से 50 से अधिक कोल आवंटन रद करने का संकेत मिला है, इससे साफ है कि सरकार खुद इसमें धांधली की बात स्वीकार करती है। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि कैग खुद भारत सरकार की ही एक स्वायत्त संस्था है, ऐसे में संसद में उसे गलत ठहराने से सरकार की साख पर खुद बट्टा लग रहा है।
उद्योग व्यापारमंडल के अध्यक्ष गोपाल गुप्ता कहते है कि सरकार निजी कंपनियों को भारी मुनाफा कमवाने के लिए यह आवंटन की है। उन्होंने ऊर्र्जांचल सहित पूरे देश के कोल ब्लाकों को नए सिरे से पारदर्शी तरीके से आवंटित करने की मांग की। कोल ब्लाक आवंटन में काफी खोजबीन करने वाले संजय द्विवेदी ने सरकार का पक्ष लेते हुए कहा कि कोल ब्लाक के मौजूदा आवंटन से तापीय परियोजनाओं को सस्ती दर पर कोयला उपलब्ध हो सकेगा, जिससे सस्ती बिजली का निर्माण होगा।
मंहगे दर पर कोयला आवंटित होने से बिजली के दर में बेतहाशा वृद्धि होगी, जिसका खामियाजा आम उपभोक्ताओं को उठाना पड़ेगा। पत्रकारिता के पेशे से जुड़े टीएन सिंह ने बताया कि मौजूदा कोल आवंटन में ऊपर से लेकर नीचे तक काफी लंबा खेल खेला गया गया है। कोल इंडिया के पूर्व चेयरमैन से लेकर एनसीएल तथा अनुषांगी कंपनियों के सीएमडी एवं अन्य अधिकारी सेवानिवृत्त होने के बाद भारी भरकम पैकेज पर निजी कंपनियों में काम कर रहे है, इसकी भी जांच होनी चाहिए। सरकार कोल आवंटन से ध्यान भंग करने करने के लिए संसद में आरक्षण कोटा का कार्ड खेल रही है।
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