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खनन चालू होने में तीसरी बार फंसा पेच

Sonbhadra

Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
ओबरा। खनन चालू होने में फिर पेंच फंस गया है। डीएम ने बिल्ली मारकुंडी क्षेत्र में स्थित 127 पट्टाें के एनओसी जांच के लिए पत्रावली ओबरा वन विभाग को भेजी थी। इसमें एक बार फिर वन विभाग के अधिकारियों द्वारा नया पेंच फंसा दिया गया है।
तत्कालीन जिलाधिकारी के 28 फरवरी को जारी आदेश के तहत सभी समस्त खदानों व क्रशर प्लांटों को बंद करने के पश्चात जांच की प्रक्रिया शुरू हुई, तो सबसे पहले मामला खान सुरक्षा निदेशालय के पाले में चला गया। काफी जद्दोजहद एवं माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के कड़े निर्देश के बाद खदानों के संचालन में अहम महकमे द्वारा लगभग 90 प्रतिशत खदानों के संचालन की स्वीकृति जिलाधिकारी को दे दी गई। खान सुरक्षा निदेशालय के एनओसी मिलने पर कयास लगाया जा रहा था कि सभी वैध खदानों को यथाशीघ्र चालू कर दिया जाएगा। प्रदेश एवं जिला प्रशासन के बीच खनन चालू कराने की कवायद चल ही रही थी कि इसी बीच चीफ कंजरवेटर मिर्जापुर एमपी सिंह द्वारा जिलाधिकारी को लिखे पत्र ने पुन: पेंच फंसा दिया।
श्री सिंह के पत्र में बिल्ली मारकुंडी के सभी गाटाें को मानचित्र में तरमीन किए जाने पर जोर दिया गया था। पत्र के अनुसार बिल्ली मारकुंडी क्षेत्र के मिल जुमला एवं सभी नंबरों में वन विभाग अपनी जमीन तरमीन कराने के पश्चात ही खनन चालू कराने की बात कही थी। लेकिन चूंकि क्षेत्र में धारा बीस का प्रकाशन न होने के कारण तरमीन की प्रक्रिया में कानूनी अड़चन आने लगी। जिला प्रशासन की कार्रवाई के बाद सभी खदानों के जल्द खुलने की उम्मीद बनी ही थी कि लखनऊ स्थित पर्यावरण एवं वन विभाग भारत सरकार द्वारा भेजे गए पत्र से खनन चालू करने में पुन: पेंच फंस गया। पिछले पांच छह महीने के हालात पर गौर करें तो खनन शुरू होते होते वन विभाग की कार्रवाई से कोई न कोई पेंच स्वत: फंस जाता है। खनन चालू न हो पाने की स्थिति में नक्सल क्षेत्राें से आने वाले लगभग 50 हजार मजदूर रोजी रोटी के लिए भटकने पर मजबूर हो गए हैं, वहीं पूर्वांचल के पांच मंडलों में रेलवे सहित एनएच के विकास पर विराम लग चुका है। गिट्टी, बालू के अभाव में विद्यालय, अस्पताल, प्रशासनिक भवन सहित आम आदमी के घर का सपना भी अधर में लटक गया है। वन विभाग के पेंच से पूरे पूर्वांचल में गिट्टी व मोरम की ब्लैक मार्केटिंग का धंधा जोर पकड़ लिया है।
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